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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में बड़ा एक्शन, 40 कर्मचारी हटाए गए; SIT की पहली रिपोर्ट तैयार

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच तेज हो गई है. SIT ने 6 दिन की जांच के बाद अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर ली है. इस बीच चढ़ावे की गणना में लगे करीब 40 कर्मचारियों को हटाकर नए गणनाकर्मी नियुक्त किए गए हैं.

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में बड़ा एक्शन, 40 कर्मचारी हटाए गए; SIT की पहली रिपोर्ट तैयार
Image Source: X/ @ShriRamTeerth
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अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है. इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी देखने को मिल रही है, लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यानाथ की सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच प्रक्रिया को तेज कर दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) लगातार मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है.

जांच के बीच बड़ा प्रशासनिक फैसला

मामले की जांच के दौरान एक बड़ा कदम उठाते हुए चढ़ावे की गणना से जुड़े करीब 40 कर्मचारियों को उनके वर्तमान कार्य से हटा दिया गया है. उनकी जगह बैंक और ट्रस्ट की ओर से नए गणनाकर्मियों की नियुक्ति की गई है. साथ ही मंदिर में प्राप्त होने वाली नकदी, आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की गणना एवं निगरानी व्यवस्था को भी और अधिक सख्त बनाया गया है. सूत्रों के अनुसार, छह दिनों तक अयोध्या में जांच करने के बाद SIT की टीम लखनऊ लौट चुकी है. माना जा रहा है कि टीम अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप सकती है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी.

100 से ज्यादा लोगों से पूछताछ

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय SIT ने जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल की. टीम ने दान के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, नकदी गिनने की प्रक्रिया और गहनों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की है. जानकारी के मुताबिक, ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों, पुजारियों, बैंक अधिकारियों और नकदी प्रबंधन में शामिल कर्मचारियों समेत 100 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई. जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं किसी स्तर पर प्रक्रिया में गड़बड़ी या लापरवाही तो नहीं हुई.

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जांच पूरी होने तक शहर न छोड़ने का निर्देश

SIT ने जांच के दायरे में आए कई लोगों को फिलहाल अयोध्या न छोड़ने का निर्देश दिया है. अधिकारियों का मानना है कि जांच के दौरान किसी भी समय दोबारा पूछताछ की आवश्यकता पड़ सकती है. इसी वजह से संबंधित लोगों को अगले आदेश तक शहर में रहने को कहा गया है. बताया जा रहा है कि जांच से जुड़ी हर गतिविधि का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया गया है. इससे भविष्य में किसी भी तथ्य की दोबारा समीक्षा करना आसान होगा.

टिन्नू से लगातार पूछताछ

जांच के दौरान रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू से भी लगातार पूछताछ की गई. उन्हें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का पुराना सहयोगी माना जाता है. SIT ने केवल उनसे ही नहीं, बल्कि उनके करीबी सहयोगियों, रिश्तेदारों और उनसे जुड़े अन्य पहलुओं की भी जानकारी जुटाई है. सूत्रों का दावा है कि संभावित अनियमितताओं का दायरा उस समय बढ़ा, जब प्रयागराज महाकुंभ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे थे. उस अवधि में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं के आने से दान-पात्र बेहद तेजी से भर रहे थे, जिससे नकदी प्रबंधन का दबाव भी काफी बढ़ गया था.

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बहरहाल, सभी की नजर SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट पर टिकी हुई है. रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और जांच किस दिशा में बढ़ती है. तब जाकर यह तय होगा की विपक्षी पार्टी इस मामले में बीजेपी को जो घेरने की कोशिश कर रही हहै उसमें कितना हद तक कामयाब होती है. 

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