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यूपी के पशुपालकों को मिलेगा सुरक्षा कवच, मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को कैबिनेट की मंजूरी

प्रदेश सरकार ने योजना में दावा निस्तारण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया है. पशु की मृत्यु होने पर बीमा दावा स्वीकृत होने के बाद क्लेम की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी. वहीं, यदि कोई पशु स्थायी रूप से विकलांग (पीटीडी) हो जाता है, तो बीमा कंपनी बीमित राशि का 75 प्रतिशत तक भुगतान करेगी.

Image Credits: UP Information Department
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सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना (राज्य योजना) की कार्ययोजना एवं वित्तीय प्रावधान को मंजूरी दे दी गई. इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के किसानों, पशुपालकों और डेयरी संचालकों को पशुओं की मृत्यु या दुर्घटना से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना और उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है. वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के संचालन के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है. बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी.

पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन है. अगर किसी वजह से पशु की मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से काम करने योग्य नहीं रहता, तो इससे पशुपालक की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ता है. ऐसे संकट से बचाने के लिए राज्य सरकार ने इस नई योजना को मंजूरी दी है.

इन स्थितियों में मिलेगा बीमा का लाभ
योजना के तहत लघु एवं सीमांत किसान, भूमिहीन पशुपालक, डेयरी फार्म के पशुपालकों तथा अन्य पात्र पशुपालकों के पशुओं का बीमा कराया जाएगा. यदि किसी पशु की महामारी, दैविक आपदा, आकस्मिक दुर्घटना के कारण मृत्यु हो जाती है या वह अनुपयोगी हो जाता है, तो बीमा के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.

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पशु की स्थायी विकलांगता पर 75 प्रतिशत तक भुगतान
प्रदेश सरकार ने योजना में दावा निस्तारण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया है. पशु की मृत्यु होने पर बीमा दावा स्वीकृत होने के बाद क्लेम की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी. वहीं, यदि कोई पशु स्थायी रूप से विकलांग (पीटीडी) हो जाता है, तो बीमा कंपनी बीमित राशि का 75 प्रतिशत तक भुगतान करेगी. योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न पशुपालन एवं डेयरी विकास योजनाओं के अंतर्गत लाभान्वित पशुओं के बीमा को प्राथमिकता दी जाएगी. इससे पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा मिलने के साथ-साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा.

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2.28 लाख से अधिक पशुओं को होगा बीमा
कैबिनेट द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव में वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के संचालन के लिए 60 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है. इस बजट के माध्यम से प्रदेश में कुल 2,28,350 पशुओं का बीमा कराया जाएगा. इनमें 1,86,800 पशुओं का बीमा सामान्य मद और 41,550 पशुओं का बीमा एससीएसपी कम्पोनेंट के अंतर्गत किया जाएगा. योजना के तहत बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि 15 प्रतिशत राशि लाभार्थी को अंशदान के रूप में देनी होगी.

धर्मपाल सिंह ने बताया कि यूपी पशुधन की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा प्रदेश है. जीडीपी के संदर्भ में पशुधन का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में 5.50 प्रतिशत का योगदान है. प्रदेश में कृषि एवं संबंध क्षेत्र की कुल जीडीपी 30 प्रतिशत से अधिक है. पशुधन का इसमें विशेष योगदान है. पशुधन के माध्यम से यह क्षेत्र विदेशी मुद्रा का स्रोत भी है. मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना 75 जिलों में लागू होगी. राज्यांश 85 प्रतिशत (इसमें केंद्र का हिस्सा 51 प्रतिशत और राज्य का 34 प्रतिशत शामिल) और लाभार्थी का अंश 15 प्रतिशत होगा. योजना के तहत एक महीने के अंदर बीमा राशि का भुगतान बीमा कंपनी द्वारा कराया जाएगा. इस बीमा योजना से पशुपालकों को बड़ा लाभ होगा.

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यूपी के गोरसंरक्षण केंद्रों में 13.50 लाख गाय संरक्षित
मंत्री ने बताया कि निराश्रित पशुओं को गो संरक्षण केंद्रों में लाया जा रहा है. प्रदेश में 7,500 गोसंरक्षण केंद्र हैं, जिसमें लगभग 13.50 लाख गायें संरक्षित हैं. इन पर प्रतिदिन 8 करोड़ रुपये सरकार खर्च कर रही है. उत्तर प्रदेश चारा नीति के तहत ग्राम समाज, वन विभाग की जमीन पर हरा चारा उगाकर गोशालाओं को उपलब्ध कराया जा रहा है.

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