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मन की बात में PM मोदी ने की बिजनौर की महिलाओं की तारीफ, बोले-सब जानते हैं मेरा चाय से क्या रिश्ता

पीएम मोदी ने बताया कि सबसे प्रेरक बात इसकी शुरुआत है. उन्होंने कहा कि यह पूरा प्रयास सिर्फ एक लाख रुपए से शुरू हुआ था. आज यह ब्रांड देश के बड़े संस्थानों तक पहुंच चुका है. ये पहल हमें बताती है कि जब स्थानीय ज्ञान, प्रकृति और महिलाओं का आत्मविश्वास साथ आते हैं, तो एक छोटा-सा प्रयास भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन जाता है.

Image Credit: IANS
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के लखीवाला गांव में 'स्वयं सहायता समूह' से जुड़ी महिलाओं की प्रशंसा की है. उन्होंने इन महिलाओं की ओर से तैयार की गई 'विदुर प्रेरणा स्वदेशी हर्बल टी' का जिक्र करते हुए कहा कि आज यह ब्रांड देश के बड़े संस्थानों तक पहुंच चुका है.

प्रधानमंत्री ने 'मन की बात' में राष्ट्र को किया संबोधित

प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 136वें एपिसोड के जरिए राष्ट्र को संबोधित किया. इस दौरान, पीएम मोदी ने कहा, "हमारे देश में चाय सिर्फ एक पेय नहीं है, ये अपनापन भी है. सुबह की शुरुआत हो, दोस्तों की मुलाकात हो या परिवार के साथ कुछ पल बिताने हों 'चाय' हर मौके का हिस्सा बन जाती है."

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उन्होंने कहा, "वैसे तो आप भी भलीभांति जानते हैं मेरा चाय से रिश्ता क्या है. लेकिन आज मैं जिस चाय की चर्चा कर रहा हूं, उसने सिर्फ स्वाद ही नहीं दिया, बल्कि अनेक बहनों के जीवन में, आत्मनिर्भरता की नई खुशबू भी घोल दी है."

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बिजनौर की महिलाओं के स्वदेशी हर्बल टी ब्रांड की पीएम मोदी ने की प्रशंसा

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प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के लखीवाला गांव में 'स्वयं सहायता समूह' से जुड़ी महिलाओं ने 'विदुर प्रेरणा स्वदेशी हर्बल टी' तैयार की है. इसमें लेमनग्रास, गिलोय, मुलेठी, तुलसी, कच्ची हल्दी, दालचीनी, इलायची और सौंफ जैसी प्राकृतिक सामग्रियां शामिल हैं.

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, "अपने अनोखे स्वाद और गुणों की वजह से इस चाय ने बहुत कम समय में लोगों के बीच खास पहचान बना ली. प्रयागराज के महाकुंभ और दिल्ली के अंतर्राष्ट्रीय खाद्य महोत्सव में इस हर्बल चाय को खूब सराहना मिली है. विदेशों से आए लोगों ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई है."

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पीएम मोदी ने बताया कि सबसे प्रेरक बात इसकी शुरुआत है. उन्होंने कहा कि यह पूरा प्रयास सिर्फ एक लाख रुपए से शुरू हुआ था. आज यह ब्रांड देश के बड़े संस्थानों तक पहुंच चुका है. ये पहल हमें बताती है कि जब स्थानीय ज्ञान, प्रकृति और महिलाओं का आत्मविश्वास साथ आते हैं, तो एक छोटा-सा प्रयास भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन जाता है.

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