'मैं भ्रष्ट पार्टी के साथ नहीं रह सकता...', बंगाल चुनाव से पहले TMC को बड़ा झटका, पूर्व विधायक ने थामा BJP का दामन
पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज है. अर्घ्य रॉय प्रधान और बंशी बदन बर्मन ने टीएमसी छोड़कर बीजेपी जॉइन कर ली. यह फैसला ऐसे समय आया है जब नितिन नबीन कोलकाता दौरे पर हैं.
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West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राज्य की राजनीति में हलचल तेज होती जा रही है. सत्ताधारी टीएमसी के लिए इस बार चुनौती और बढ़ती नजर आ रही है.मंगलवार को पार्टी को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब उसके पूर्व विधायक अर्घ्य रॉय प्रधान और राजबंशी समाज के प्रमुख नेता बंशी बदन बर्मन (Banshi Badan Barman) ने बीजेपी का दामन थाम लिया. यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब बीजेपी अपने संगठन को मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है.
कोलकाता में बीजेपी का शक्ति प्रदर्शन
दोनों नेताओं ने बीजेपी की सदस्यता उस समय ली, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता सुकांता मजूमदार (Sukanta Majumdar) और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) मौजूद थे. यह सिर्फ एक औपचारिक जॉइनिंग नहीं थी, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी था कि चुनाव से पहले बीजेपी अपने कुनबे को तेजी से बढ़ा रही है.
North Bengal leader Shri Bangshibadon Barman, who has long fought for the region’s development, has joined the BJP today in the presence of State President @SamikBJP and LoP Shri @SuvenduWB.
— BJP West Bengal (@BJP4Bengal) March 24, 2026
This reflects the growing anger against TMC’s neglect of North Bengal. One by one,… pic.twitter.com/hjYCSSfwKX
टीएमसी छोड़ने की वजह क्या रही
अर्घ्य रॉय प्रधान ने पार्टी छोड़ने के पीछे की वजह साफ शब्दों में बताई. उन्होंने कहा कि वे अब एक भ्रष्ट पार्टी के साथ नहीं रह सकते और अपने क्षेत्र की जनता का सामना करने में असहज महसूस कर रहे थे. उनका यह बयान सीधे तौर पर टीएमसी की छवि पर सवाल खड़ा करता है. बंशी बदन बर्मन का बीजेपी में आना सिर्फ एक राजनीतिक जॉइनिंग नहीं, बल्कि उत्तर बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. राजबंशी समुदाय इस क्षेत्र में प्रभावशाली माना जाता है. ऐसे में बर्मन की एंट्री से बीजेपी को इस वोट बैंक में मजबूती मिलने की उम्मीद है. बर्मन ने साफ कहा कि उनकी प्राथमिकता अपनी भाषा और समुदाय के अधिकारों को पहचान दिलाना है.
ग्रामीण क्षेत्रों में मज़बूत हो रही बीजेपी
बीजेपी का विस्तार सिर्फ ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है. हाल ही में कोलकाता नगर निगम के पार्षद संतोष पाठक का पार्टी में शामिल होना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. लगातार हो रही इन जॉइनिंग्स से साफ है कि बीजेपी राज्य में हर स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है.
चुनावी रणनीति पर फोकस
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का कोलकाता दौरा इस बात का संकेत है कि पार्टी बंगाल चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है. अपने दौरे के दौरान वे संगठन की समीक्षा और नई रणनीति पर काम कर रहे हैं. खासकर उत्तर बंगाल और राजबंशी वोट बैंक पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है.
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बताते चलें कि विधानसभा चुनाव से पहले सूबे में लगातार हो रहे दलबदल और नेताओं की एंट्री से बंगाल की राजनीति में नया मोड़ आता दिख रहा है. अब देखना दिलचस्प होगा कि ये सियासी बदलाव चुनावी नतीजों को कितना प्रभावित करते हैं. क्योंकि इस बार की लड़ाई सिर्फ सत्ता की नहीं, बल्कि साख और रणनीति की भी है.
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