'दंगों से उत्सव तक बदला यूपी...', CM योगी ने बताया कैसे बदली राज्य की कानून-व्यवस्था, बोले- अब कभी-कभी होती है मॉक ड्रिल
लखनऊ में सीएम योगी ने कानून-व्यवस्था में बदलाव का दावा करते हुए कहा कि यूपी अब उपद्रव से उत्सव की ओर बढ़ा है. उन्होंने महिला सुरक्षा और अपराधियों में कानून के डर को पुलिस की बड़ी उपलब्धि बताया.
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार राजधानी लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदेश की कानून-व्यवस्था, पुलिस व्यवस्था और सरकारी भर्ती प्रक्रिया में हुए बदलावों का जिक्र किया. उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में नव नियुक्त कर्मियों को नियुक्ति पत्र वितरित करने के दौरान मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश की तस्वीर बदली है. उनके मुताबिक, जो उत्तर प्रदेश कभी उपद्रव और अशांति के लिए जाना जाता था, वह अब उत्सवों और बेहतर कानून-व्यवस्था वाला प्रदेश बन रहा है.
मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में खास तौर पर महिला सुरक्षा का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि आज सड़क पर चल रही किसी बेटी को परेशान करने से पहले अपराधी परिणाम के बारे में सोचता है. योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, प्रदेश में पुलिस की कार्रवाई और कानून के डर ने लोगों की सोच में भी बदलाव लाने में भूमिका निभाई है.
बेटी को परेशान करने की हिम्मत नहीं करेगा कोई
नवनियुक्त पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब प्रदेश में किसी बेटी के साथ सड़क पर छेड़छाड़ करने की हिम्मत करना आसान नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर कोई ऐसा अपराध करता है, तो उसे उसके संभावित परिणामों का अंदाजा होता है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर लोगों की धारणा में बदलाव आया है और इसमें पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण रही है. उन्होंने नवनियुक्त कर्मियों से कहा कि वे ऐसे पुलिस बल का हिस्सा बनने जा रहे हैं, जिसे प्रदेश की करीब 25 करोड़ आबादी के भरोसे के प्रतीक के तौर पर देखा जा रहा है.
देश में 'यूपी पुलिस मॉडल' की चर्चा का दावा
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. उन्होंने दावा किया कि देश में जब शासन और कानून-व्यवस्था के अलग-अलग मॉडलों की चर्चा होती है, तो उत्तर प्रदेश पुलिस मॉडल का भी उल्लेख किया जाता है. मुख्यमंत्री ने नए पुलिसकर्मियों को यह संदेश दिया कि वर्दी केवल नौकरी का माध्यम नहीं है, बल्कि जनता के साथ भरोसे का संबंध बनाने की जिम्मेदारी भी है. उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए ऐसा व्यवहार करना चाहिए, जिससे आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस करे.
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दंगों को लेकर सीएम ने किया बड़ा दावा
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में प्रदेश में दंगों की स्थिति को लेकर भी अपनी सरकार के कार्यकाल की तुलना पुराने दौर से की. उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में दंगे अतीत की बात हो गए हैं. उन्होंने यहां तक कहा कि कभी-कभी दंगों की मॉक ड्रिल इसलिए कराई जाती है, ताकि नई पीढ़ी यह न भूल जाए कि पहले ऐसी परिस्थितियां किस तरह पैदा होती थीं. योगी आदित्यनाथ ने 2017 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय प्रदेश के कई हिस्सों में दंगे और कर्फ्यू की घटनाएं होती थीं. उन्होंने अलीगढ़, मेरठ और मुजफ्फरनगर जैसे शहरों का उदाहरण देते हुए पिछली स्थिति का उल्लेख किया. मुजफ्फरनगर में लंबे समय तक चले दंगों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस दौर में आम नागरिकों के साथ व्यापारी, अधिकारी, पुलिस और न्यायपालिका से जुड़े लोग भी असुरक्षा महसूस करते थे. हालांकि, इन घटनाओं और उनकी अवधि को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा भाषण में किए गए दावे उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं. ऐसे दावों को समझते समय संबंधित घटनाओं के स्वतंत्र आधिकारिक रिकॉर्ड और अन्य विश्वसनीय स्रोतों को भी देखा जा सकता है.
अब यूपी पुलिस के मॉडल की चर्चा होती है... pic.twitter.com/Vb1TPBpCT0
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) September 20, 2026Advertisement
अब खुलेआम हथियार लहराना आसान नहीं
कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेश में कोई अपराधी खुलेआम हथियार लेकर घूमते हुए पहले जैसी स्थिति पैदा नहीं कर सकता. उन्होंने सवाल के अंदाज में कहा कि क्या आज कोई त्योहार से पहले अशांति फैलाने की हिम्मत कर सकता है या खुलेआम दंगा कर सकता है. योगी ने कहा कि यूपी पुलिस ने प्रदेश की समग्र छवि बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उनके अनुसार, पुलिस व्यवस्था में बदलाव का असर केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे आम लोगों के बीच सुरक्षा और प्रशासन को लेकर भरोसा भी बढ़ा है.
सरकारी भर्तियों में भ्रष्टाचार पर भी निशाना
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सरकारी भर्तियों का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठते थे. उनके मुताबिक, पेपर लीक और भर्ती में अनियमितताओं की शिकायतों के कारण युवाओं के बीच निराशा का माहौल था. योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि ऐसी स्थिति भी सामने आती थी, जब परीक्षा देने वाले योग्य उम्मीदवार चयन से बाहर हो जाते थे और ऐसे लोगों को नियुक्ति मिल जाती थी, जिन्होंने आवेदन तक नहीं किया था. उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर लंबे समय तक जांच होती रही, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं आए. मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी सरकारी व्यवस्था में जनता का भरोसा तभी मजबूत होता है, जब नियुक्तियां निष्पक्ष, पारदर्शी और योग्यता के आधार पर हों. उनका कहना था कि जब किसी युवा को उसकी योग्यता के आधार पर नौकरी मिलती है, तो इसका असर केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके पूरे परिवार का शासन व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होता है.
2017 के बाद भर्ती प्रक्रिया में सुधार का दावा
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 में सत्ता संभालने के बाद उनकी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में बदलाव शुरू किए. उनके अनुसार, सरकार का उद्देश्य बिचौलियों की भूमिका खत्म करना, पेपर लीक से जुड़ी व्यवस्थाओं पर रोक लगाना और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना था. उन्होंने कहा कि अलग-अलग भर्ती बोर्डों, सेवा आयोगों और शिक्षा से जुड़े क्षेत्रों में चयन प्रक्रिया को व्यवस्थित करने की दिशा में काम किया गया. मुख्यमंत्री ने एकीकृत संस्थाओं के गठन का भी उल्लेख किया और कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य योग्य उम्मीदवारों को निष्पक्ष तरीके से अवसर देना है.
अधिकारी वही, सोच बदली
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में आए बदलाव को केवल नए अधिकारियों या अतिरिक्त प्रशासनिक संसाधनों का परिणाम मानने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि राज्य वही है, प्रशासनिक पद भी वही हैं और मानव संसाधन में कोई ऐसा बड़ा बदलाव नहीं हुआ है कि बाहर से अधिकारियों को लाकर पूरी व्यवस्था संचालित की जा रही हो. उनके मुताबिक, पिछले साढ़े नौ वर्षों में सबसे बड़ा बदलाव कार्य संस्कृति और लोगों के नजरिए में आया है. उन्होंने कहा कि जब योग्य लोगों का चयन होता है और व्यवस्था ईमानदारी से काम करती है, तो धीरे-धीरे पूरे प्रशासन में बदलाव दिखाई देने लगता है.
नए पुलिसकर्मियों के सामने बड़ी जिम्मेदारी
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त पुलिसकर्मियों को उनकी नई जिम्मेदारी का अहसास कराया. उन्होंने कहा कि वे ऐसे पुलिस बल का हिस्सा बनने जा रहे हैं, जिसे प्रदेश के करोड़ों लोगों की सुरक्षा और विश्वास की जिम्मेदारी निभानी है. दरअसल, किसी भी राज्य में कानून-व्यवस्था केवल अपराधियों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं होती. पुलिस की कार्यप्रणाली, भर्ती में पारदर्शिता, नागरिकों के साथ व्यवहार और अपराध के खिलाफ समय पर कार्रवाई, ये सभी पहलू जनता के भरोसे को प्रभावित करते हैं. ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से किए जा रहे बदलावों और मुख्यमंत्री के दावों को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा सकता है.
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बताते चलें कि सीएम योगी ने अपने संबोधन में जिस बदलाव की तस्वीर पेश की, उसमें कानून-व्यवस्था और पारदर्शी भर्ती को शासन की अहम प्राथमिकताओं के तौर पर सामने रखा गया. अब इन व्यवस्थाओं को जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी माना जाता है, इसका आकलन अपराध के आधिकारिक आंकड़ों, भर्ती प्रक्रियाओं और नागरिकों के अनुभवों के आधार पर किया जाना महत्वपूर्ण होगा.