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किसानों को वापस मिलेगी ट्यूबवेल की जमीन, हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला

Haryana: नायब सिंह सैनी सरकार अब उन जमीनों को वापस करने की तैयारी कर रही है, जो पहले सरकारी ट्यूबवेल लगाने के लिए ली गई थीं, लेकिन अब उनका उपयोग नहीं हो रहा है.

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16 Apr 2026
( Updated: 16 Apr 2026
03:39 PM )
किसानों को वापस मिलेगी ट्यूबवेल की जमीन, हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला
Image Source: ScreenGrab IANS
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Haryana: हरियाणा के गावों में कई साल पहले किसानों की जमीन लेकर सरकारी ट्यूबवेल लगाए गए थे. ताकि सिंचाई की सुविधा बेहतर हो सके. लेकिन समय के साथ इनमें से कई ट्यूबवेल या तो बंद हो गए या फिर उनका इस्तेमाल लगभग न के बराबर रह गया. अब इसी पुरानी व्यवस्था को सुधारने की दिशा में सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है, जिससे किसानों को उनकी जमीन वापस मिल सकती है. 

बंद पड़े ट्यूबवेल वाली जमीन लौटाने की योजना

नायब सिंह सैनी सरकार अब उन जमीनों को वापस करने की तैयारी कर रही है, जो पहले सरकारी ट्यूबवेल लगाने के लिए ली गई थीं, लेकिन अब उनका उपयोग नहीं हो रहा है. सरकार का मानना है कि अगर किसी जमीन का इस्तेमाल ही नहीं हो रहा, तो उसे उसी के असली मालिक को वापस कर देना ज्यादा सही है.

कलेक्टर रेट पर मिलेगा मुआवजा

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सरकार की योजना के मुताबिक, जमीन लौटाने से पहले किसानों को उसका उचित भुगतान किया जाएगा. यह भुगतान कलेक्टर रेट के आधार पर होगा, यानी जमीन की सरकारी दर के हिसाब से पैसा देकर फिर जमीन मालिक को वापस दी जाएगी. इसका मतलब है कि किसान को न सिर्फ अपनी जमीन वापस मिलेगी, बल्कि उसका पूरा आर्थिक हिसाब भी साफ किया जाएगा.

सर्वे और लिस्टिंग का काम शुरू होगा

इस पूरी प्रक्रिया को लागू करने के लिए पहले एक बड़ा सर्वे किया जाएगा. सिंचाई विभाग और पंचायत विभाग की टीमें मिलकर उन सभी जगहों की पहचान करेंगी जहां ट्यूबवेल लगे थे लेकिन अब बंद पड़े हैं. इसके बाद एक पूरी लिस्ट तैयार करके सरकार को भेजी जाएगी, ताकि आगे की कार्रवाई आसानी से की जा सके.

पंचायत विभाग भी करेगा मदद

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इस काम में सिर्फ सिंचाई विभाग ही नहीं, बल्कि पंचायत विभाग भी शामिल रहेगा.पंचायत विभाग गांव स्तर पर जाकर जमीनों की स्थिति का आकलन करेगा और रिपोर्ट तैयार करेगा, जिससे कोई भी जमीन छूट न जाए.

क्यों लिया जा रहा है यह फैसला?

यह विचार सबसे पहले बजट से पहले हुई बैठकों में सामने आया था, जब किसान संगठनों ने यह मुद्दा उठाया कि कई जगहों पर जमीन ली तो गई, लेकिन उसका उपयोग अब नहीं हो रहा. इसके बाद सरकार ने इस पर गंभीरता से विचार किया और अब इसे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया गया है.

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किसानों के लिए क्या मतलब है यह फैसला?

इस फैसले से उन किसानों को राहत मिलेगी जिनकी जमीन सालों से सरकारी उपयोग में नहीं आ रही थी. अब उन्हें या तो उनकी जमीन वापस मिलेगी या उसका उचित मुआवजा मिलेगा, जिससे उनका नुकसान कम हो सके.

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