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जुटाए जा रहे सबूत, नाबालिग का हुआ मेडिकल… स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पुलिस ने जांच कार्रवाई की तेज

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज पॉक्सो मामले में जांच तेज हो गई है. पुलिस ने एक नाबालिग का मेडिकल कराया है, जबकि दूसरे के बयान व साक्ष्यों का मिलान जारी है.

जुटाए जा रहे सबूत, नाबालिग का हुआ मेडिकल… स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पुलिस ने जांच कार्रवाई की तेज
Swami Avimukteshwaranand (File Photo)
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज पॉक्सो एक्ट के मुकदमे में जांच ने रफ्तार पकड़ ली है. झूंसी थाने में दर्ज इस एफआईआर (FIR) के बाद पुलिस तकनीकी और प्रत्यक्ष साक्ष्यों को तेजी से जुटाने में लगी है. मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चाधिकारी खुद निगरानी कर रहे हैं.

मेडिकल, बयान और साक्ष्यों का हो रहा मिलान

पुलिस ने एक नाबालिग पीड़ित का मेडिकल परीक्षण करा लिया है. दूसरे पीड़ित के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, मेडिकल रिपोर्ट, पहले दर्ज बयान और घटनाक्रम के बीच सामंजस्य बैठाने की प्रक्रिया जारी है. जांच टीम यह सुनिश्चित करना चाहती है कि हर तथ्य दस्तावेजी साक्ष्य से मेल खाए. यह मुकदमा अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ है. शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने विशेष अदालत में दो नाबालिगों को पेश किया था. उसी आधार पर पॉक्सो अदालत के आदेश पर झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज की गई.

माघ मेला क्षेत्र में दोबारा निरीक्षण

जांच टीम ने माघ मेला क्षेत्र में कथित घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण किया है. शिविरों की स्थिति, वहां की आवाजाही और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से पड़ताल की जा रही है. पुलिस मोबाइल कॉल डिटेल और लोकेशन डेटा भी खंगाल रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित घटनाओं के समय संबंधित लोग कहां मौजूद थे. सिर्फ तकनीकी साक्ष्य ही नहीं, बल्कि सामाजिक और प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं. शिविर क्षेत्र का मानचित्र तैयार किया गया है. आसपास के शिविर संचालकों, सुरक्षाकर्मियों और नियमित आने जाने वाले साधु संतों से पूछताछ की तैयारी है. पुलिस का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या उस अवधि में नाबालिगों की उपस्थिति वहां देखी गई थी और क्या किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी किसी को थी. उच्चाधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि जांच के हर चरण की वीडियोग्राफी कराई जाए. इससे भविष्य में साक्ष्यों से छेड़छाड़ या पक्षपात के आरोपों से बचा जा सकेगा. अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शिता इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण है.

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सोशल मीडिया पर आरोप 

मामले ने तब और तूल पकड़ा जब अविमुक्तेश्वरानंद ने सोशल मीडिया पर प्रयागराज के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और शिकायतकर्ता की कथित फोटो साझा की. उन्होंने आरोप लगाया कि मिलीभगत के तहत उन्हें फंसाया जा रहा है. हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वायरल तस्वीर की सत्यता और संदर्भ की जांच की जा रही है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विवेचना तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी, न कि आरोप प्रत्यारोप के आधार पर.

अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल

एफआईआर दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी की संभावना को देखते हुए अविमुक्तेश्वरानंद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की है. माना जा रहा है कि इस पर जल्द सुनवाई हो सकती है. झूंसी पुलिस ने मुकदमा दर्ज होने के बाद विवेचना तेज कर दी है. पीड़ितों के बयान दर्ज करने के लिए टीम हरदोई भी गई थी.

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बताते चलें कि पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर कानून के तहत दर्ज मुकदमे में जांच की निष्पक्षता और संवेदनशीलता बेहद अहम होती है. फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच में जुटी है. आने वाले दिनों में मेडिकल रिपोर्ट, तकनीकी साक्ष्य और गवाहों के बयान इस मामले की दिशा तय करेंगे. पूरे प्रदेश की नजर अब इस हाई प्रोफाइल जांच पर टिकी है.

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