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बंगाल में ममता के लिए काल बना 'डबल M' फैक्टर, मुस्लिम बहुल जिलों में भी BJP ने TMC को पछाड़ा; जानें सियासी गणित

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में ममता बनर्जी की हार की बड़ी वजह उनके दो मजबूत ‘M फैक्टर’, महिला और मुस्लिम वोटर का कमजोर पड़ना रहा. महिला सुरक्षा और राजनीतिक मुद्दों के साथ-साथ मुस्लिम वोटों में बिखराव ने टीएमसी को बड़ा नुकसान पहुंचाया.

बंगाल में ममता के लिए काल बना 'डबल M' फैक्टर, मुस्लिम बहुल जिलों में भी BJP ने TMC को पछाड़ा; जानें सियासी गणित
Image Source: IANS
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West Bengal Election Result 2026: पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव ने एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है. लंबे समय से सत्ता में काबिज ममता बनर्जी की पकड़ इस बार राज्य में ढीली पड़ती नजर आई. खास बात यह रही कि जिन दो बड़े फैक्टर, मुस्लिम वोटर और महिला वोटर को उनकी ताकत माना जाता था, वही इस चुनाव में कमजोर पड़ गए. यही बदलाव नतीजों में साफ तौर पर देखने को मिला. बता दें कि चुनावी नतीजों में बीजेपी को 206 सीटें मिली जबकि सत्ताधारी टीएमसी 81 सीटों पर सिमट कर रह गई. 

महिला वोटरों का बदला मूड

इस बार महिला वोटरों के बीच सुरक्षा का मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना ने महिलाओं के मन में सवाल खड़े कर दिए. इसके साथ ही महिला आरक्षण जैसे मुद्दों को लेकर भी सियासत गरमाई. बीजेपी ने महिलाओं को केंद्र में रखते हुए कई वादे और योजनाओं का जिक्र किया, जिसका असर जमीनी स्तर पर दिखा. माना जा रहा है कि महिला वोटरों का एक बड़ा हिस्सा इस बार टीएमसी से दूर हुआ.

मुस्लिम वोटों में दिखा बिखराव

दूसरा बड़ा फैक्टर 'M' मुस्लिम वोटर रहे, जो पहले एकजुट होकर टीएमसी के साथ खड़े नजर आते थे. लेकिन इस बार हालात अलग दिखे. पार्टी के अंदर ही यह चर्चा रही कि कुछ मुद्दों पर मुस्लिम समुदाय खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा था. इसका असर यह हुआ कि वोटों का बंटवारा हुआ और टीएमसी को सीधा नुकसान उठाना पड़ा. इसका सबसे बड़ा असर मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे जिलों में देखने को मिला. मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद में बीजेपी को 8 सीटों पर जीत मिली, जो अपने आप में बड़ा बदलाव है. वहीं मालदा में भी बीजेपी ने 6 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया. इसके अलावा उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और पश्चिम बर्धमान में भी मुस्लिम वोटों का विभाजन देखने को मिला.

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कई मजबूत सीटों पर पलटा खेल

इस बार कई ऐसी सीटें रहीं, जहां पहले टीएमसी का दबदबा था, लेकिन नतीजे उलट गए. बहरामपुर, जंगीपुर, कांडी और मुर्शिदाबाद जैसी सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की. मालदा की इंग्लिश बाजार सीट पर बड़ी जीत ने यह साफ कर दिया कि माहौल किस तरह बदल चुका है. यह सिर्फ सीटों की जीत नहीं, बल्कि वोटिंग पैटर्न में बड़े बदलाव का संकेत है.

केंद्रीय नेतृत्व ने बढ़ाया दम

बीजेपी की इस जीत में केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका भी अहम रही. नरेंद्र मोदी ने कई रैलियां कर माहौल बनाया, वहीं अमित शाह ने करीब 10 दिन तक बंगाल में रहकर चुनावी रणनीति को धार दी. इसके अलावा भूपेंद्र यादव और बिप्लब देब जैसे नेताओं ने भी लगातार मेहनत की. बीजेपी ने इस बार सिर्फ बड़े स्तर पर नहीं, बल्कि बूथ स्तर तक अपनी रणनीति को लागू किया. यही वजह रही कि कई ऐसी सीटों पर भी जीत मिली, जहां पहले पार्टी का कोई खास प्रभाव नहीं था.

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बहरहाल, पश्चिम बंगाल का यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के बदलने की कहानी है. ‘दो M फैक्टर’ का कमजोर पड़ना और भाजपा की मजबूत रणनीति, दोनों ने मिलकर इस बार का पूरा खेल बदल दिया. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नया सियासी संतुलन कितने समय तक कायम रहता है.

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