×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

अदालत से निराश? यहां मिल सकता है न्याय, जानिए गोलू देवता मंदिर का रहस्य

भारत आस्था और चमत्कारों का देश है, जहां मंदिर केवल पूजा के स्थान नहीं बल्कि विश्वास और न्याय के प्रतीक भी हैं. इन्हीं में से एक है उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित चिताई गोलू देवता मंदिर, जिसे न्याय के देवता का दरबार कहा जाता है.

अदालत से निराश? यहां मिल सकता है न्याय, जानिए गोलू देवता मंदिर का रहस्य
Image Credits: IANS
Advertisement

भारत एक ऐसा देश है, जहां कई भव्य मंदिर और उनसे जुड़ी अद्भुत और हैरत में डालने वाली कथाएं भी हैं. ये केवल ईंट-पत्थरों से बने देवालय नहीं बल्कि भक्तों की आस्था, विश्वास का ठिकाना भी है. ऐसा ही एक भैरवनाथ का मंदिर देवभूमि उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित है, जहां लोग अदालतों से निराश होकर न्याय की गुहार लगाते हैं. इस मंदिर को न्याय के देवता का मंदिर भी कहा जाता है. 

'देवभूमि' में भैरवनाथ का अद्भुत मंदिर

यह मंदिर है चिताई गोलू देवता मंदिर, जिसे भैरवनाथ या गौर भैरव के रूप में भगवान शिव का अवतार माना जाता है. यहां भक्त लिखित याचिकाएं डालते हैं और मान्यता है कि गोलू देवता तुरंत न्याय दिलाते व मनोकामनाएं पूरी करते हैं. मंदिर की पहचान वहां लटकी हजारों तांबे की घंटियों से आसानी से हो जाती है. हर आकार की घंटियां मंदिर परिसर में झूल रही हैं. जब कोई भक्त की इच्छा पूरी होती है तो वह मंदिर में घंटी चढ़ाता है. यही कारण है कि आज वहां हजारों घंटियां लटकी हुई दिखाई देती हैं. कई भक्त अदालती मामलों की याचिकाएं, स्टांप पेपर और लिखित अर्जियां भी मंदिर में डालते हैं.

Advertisement

जहां भक्त न्याय के लिए डालते हैं याचिका

जनश्रुति के अनुसार, राम सिंह नामक एक किसान अल्मोड़ा के पास के गांव में रहते थे. उनके भाई के साथ जमीन के बंटवारे को लेकर सालों से विवाद चल रहा था. अदालत में साल गुजर गए लेकिन न्याय नहीं मिला. एक दिन किसी ने उन्हें चिताई गोलू देवता मंदिर के बारे में बताया. राम सिंह ने पूरे विश्वास के साथ मंदिर पहुंचकर गोलू देवता के सामने अपनी समस्या लिखकर याचिका डाल दी और भगवान से न्याय की गुहार लगाई.

 तुरंत मिलता है न्याय

आश्चर्य हुआ कि कुछ महीनों बाद ही उनके भाई ने खुद बुलाकर समझौता कर लिया और जमीन का सही बंटवारा हो गया. राम सिंह मानते हैं कि गोलू देवता ने ही उनके पक्ष में तुरंत न्याय दिलाया. इच्छा पूरी होने पर उन्होंने मंदिर में एक बड़ी घंटी चढ़ाई. आज तक यह परंपरा चली आ रही है.

Advertisement

वहीं, किंवदंतियों के अनुसार, गोलू देवता को गौर भैरव के रूप में भगवान शिव का अवतार माना जाता है. कुमाऊं क्षेत्र में इन्हें न्याय का देवता कहा जाता है. लोक कथा के अनुसार श्री कल्याण सिंह बिष्ट (कालबिष्ट) का जन्म कत्युडा गांव में हुआ था. वे बहुत छोटी उम्र में ही शक्तिशाली हो गए और क्षेत्र के सभी शैतानों को परास्त कर सभी की रक्षा करने लगे. वह हमेशा गरीबों और दबे-कुचले लोगों की मदद करते थे. एक षड्यंत्र में उनके निकट रिश्तेदार ने कुल्हाड़ी से उनका सिर काट दिया. उनका शरीर डाना गोलू गैराड़ (बिनसर वन्यजीव अभ्यारण्य के पास) में गिरा और सिर कपड़खान में. यहां गोलू देवता सफेद कपड़े, सफेद पगड़ी और सफेद शाल में विराजमान रहते हैं. उनके भाई कलवा भैरव के रूप में पूजे जाते हैं. पास में गर्भ देवी शक्ति का भी मंदिर है.

कुमाऊं के कई गांवों में गोलू देवता कुल देवता या इष्ट देवता के रूप में पूजे जाते हैं. चिताई के अलावा गैराड़ (बिनसर), चंपावत और घोड़ाखाल में भी उनके प्रसिद्ध मंदिर हैं.

गोलू देवता मंदिर अल्मोड़ा शहर के पास है

चिताई गोलू देवता मंदिर अल्मोड़ा शहर से मात्र 8-10 किलोमीटर दूर जागेश्वर धाम रोड पर स्थित है. अल्मोड़ा से टैक्सी, बस या निजी वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है. गैराड़ गोलू मंदिर बिनसर वन्यजीव अभ्यारण्य के मुख्य द्वार से करीब 2 किलोमीटर और अल्मोड़ा से लगभग 15 किलोमीटर दूर है. पूरे क्षेत्र का सड़क नेटवर्क अच्छा है. दिल्ली या अन्य शहरों से टैक्सी लेकर सीधे पहुंचा जा सकता है. वहींं, निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है जो अल्मोड़ा से करीब 110 किलोमीटर दूर है.

यह भी पढ़ें

काठगोदाम से दिल्ली, लखनऊ और देहरादून के लिए ट्रेनें उपलब्ध हैं. स्टेशन से अल्मोड़ा तक टैक्सी या बस ले सकते हैं. निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर में है, जो अल्मोड़ा से लगभग 127 किलोमीटर और गैराड़ से करीब 147 किलोमीटर दूर है. पंतनगर से अल्मोड़ा पहुंचकर आगे टैक्सी से मंदिर तक जा सकते हैं.

टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें