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महाराष्ट्र से 36 हजार कंपनियां हुईं बंद? फडणवीस ने बताया आंकड़ों का पूरा सच

महाराष्ट्र के बाजार नेतृत्व को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला दिया और कहा कि राज्य में देशभर में सबसे अधिक सक्रिय कंपनियां हैं. महाराष्ट्र में सक्रिय कंपनियों की संख्या 3,96,211 है और नई कंपनियों के गठन के मामले में भी राज्य देश में शीर्ष पर बना हुआ है.

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14 Aug 2026
( Updated: 14 Aug 2026
04:54 PM )
महाराष्ट्र से 36 हजार कंपनियां हुईं बंद? फडणवीस ने बताया आंकड़ों का पूरा सच
Image Credit: IANS
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को राज्य में पिछले पांच वर्षों के दौरान 36,211 पंजीकृत कंपनियों के बंद होने को लेकर लगाए जा रहे उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें इसे औद्योगिक मंदी या बड़े पैमाने पर कंपनियों के राज्य से बाहर जाने का संकेत बताया जा रहा था. उन्होंने कहा कि इनमें से अधिकांश ऐसी निष्क्रिय कंपनियां थीं, जिन्हें नियमित नियामकीय प्रक्रिया के तहत आधिकारिक रिकॉर्ड से हटाया गया है. 

36,211 कंपनियों के बंद होने पर क्या बोले फडणवीस?

विपक्ष की ओर से संसद में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के आधार पर की जा रही आलोचना का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अपंजीकृत या रजिस्टर से हटाई गई कंपनियों में लगभग 76 फीसदी ऐसी इकाइयां थीं, जो गैर-संचालित या ‘डिफंक्ट’ थीं. इनमें या तो कारोबार पहले ही बंद हो चुका था या उन्होंने कभी व्यावसायिक गतिविधियां शुरू ही नहीं की थीं.

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सक्रिय कंपनियों के मामले में महाराष्ट्र नंबर-1

महाराष्ट्र के बाजार नेतृत्व को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला दिया और कहा कि राज्य में देशभर में सबसे अधिक सक्रिय कंपनियां हैं. महाराष्ट्र में सक्रिय कंपनियों की संख्या 3,96,211 है और नई कंपनियों के गठन के मामले में भी राज्य देश में शीर्ष पर बना हुआ है.

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों और कुछ मीडिया संस्थानों ने इन आंकड़ों की व्याख्या राज्य में सक्रिय कारोबारों के बड़े पैमाने पर बंद होने या कंपनियों के महाराष्ट्र से पलायन के रूप में की.

फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट की गई विस्तृत सफाई में कहा कि कंपनियों के बंद होने के आंकड़ों को महाराष्ट्र से औद्योगिक पलायन के सबूत के तौर पर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है, जबकि ये आंकड़े मुख्य रूप से समय-समय पर अनुपालन प्रक्रिया के तहत निष्क्रिय कंपनियों को आधिकारिक रिकॉर्ड से हटाए जाने को दर्शाते हैं.

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उन्होंने बताया कि बंद या हटाई गई इकाइयों में 12 फीसदी कंपनियां बड़ी कॉरपोरेट संरचनाओं में विलय हो गईं, दो प्रतिशत कंपनियों का औपचारिक परिसमापन हुआ, जबकि बाकी 10 फीसदी को अन्य नियामकीय कारणों से रजिस्टर से हटाया गया.

फडणवीस ने कहा, “आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि बंद किए गए पंजीकरणों में 76 फीसदी डिफंक्ट कंपनियों के हैं-ऐसी इकाइयां जो गैर-संचालित थीं या जिन्होंने कभी कारोबार शुरू ही नहीं किया. 12 फीसदी विलय की गई कंपनियां हैं यानी बड़ी कॉरपोरेट संरचनाओं में शामिल हो गईं. दो फीसदी का औपचारिक परिसमापन हुआ, यानी कारोबार पूरी तरह बंद किए गए जबकि 10 फीसदी अन्य नियामकीय अनुपालन कारणों से रजिस्टर से हटाई गईं.”

देश में तीन गुना से ज्यादा बढ़ीं सक्रिय कंपनियां

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आर्थिक विकास के ढांचे के तहत भारत में सक्रिय कंपनियों के पंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. वर्ष 2015-16 में देश में 6,78,768 सक्रिय कंपनियां थीं, जबकि 2025-26 में इनकी संख्या बढ़कर 21,17,747 हो गई है, यानी तीन गुना से भी अधिक वृद्धि हुई है.

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यह बहस उस समय शुरू हुई जब लोकसभा सांसद राजाभाऊ वाजे को केंद्रीय कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा की ओर से संसद में दिए गए जवाब से पता चला कि महाराष्ट्र में पिछले पांच वर्षों के दौरान 36,211 निजी कंपनियां बंद हुईं.

बड़े पैमाने पर कंपनियों के बंद होने की राजनीतिक व्याख्याओं का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, “एमसीए समय-समय पर निष्क्रिय कारोबारों का पंजीकरण रद्द करता है. देशभर में 2019-20 में चलाए गए विशेष अभियानों जैसी नियमित प्रक्रियाओं के तहत करीब छह लाख डिफंक्ट कंपनियों को रजिस्टर से हटाया गया था. इसलिए संख्या में बड़ी गिरावट का मुख्य कारण वास्तविक कारोबारी पलायन नहीं, बल्कि ऐसी निष्क्रिय कंपनियों को हटाना है. पूरे भारत में हर साल औसतन 20,000 से 22,000 इकाइयों का कॉरपोरेट डीरजिस्ट्रेशन होता है.”

कैसे शुरू हुई कंपनियों के बंद होने पर बहस?

मुख्यमंत्री ने कंपनियों के विस्तार से जुड़े आंकड़ों को सामने रखते हुए कहा कि भारत में सक्रिय कॉरपोरेट इकाइयों की संख्या 2015-16 में 6.78 लाख से बढ़कर 2025-26 में 21.17 लाख से अधिक हो गई है.

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उन्होंने कहा कि कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया जाना निष्क्रिय इकाइयों के लिए एमसीए की नियमित अनुपालन प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे सक्रिय विनिर्माण इकाइयों के राज्य छोड़ने के मापदंड के तौर पर नहीं देखा जा सकता.


‘कंपनियों का डीरजिस्ट्रेशन औद्योगिक पलायन का पैमाना नहीं’

फडणवीस ने कहा कि सक्रिय कंपनियों की संख्या के मामले में महाराष्ट्र 3.96 लाख से अधिक कंपनियों के साथ देश में पहले स्थान पर है. नई कंपनियों के गठन के मामले में भी महाराष्ट्र सबसे आगे है. वर्ष 2025-26 में राज्य में 41,525 नई कंपनियां पंजीकृत हुईं.

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मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में हर साल लगभग एक लाख नई कंपनियां पंजीकृत होती हैं और राज्य स्तर पर नए पंजीकरण के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है. महाराष्ट्र में 41,525 नई कंपनियां पंजीकृत हुईं और वह पहले स्थान पर रहा. इसके बाद उत्तर प्रदेश में 27,494, दिल्ली में 20,272, कर्नाटक में 17,857, तेलंगाना में 17,300, तमिलनाडु में 17,024, गुजरात में 14,666 और पश्चिम बंगाल में 10,598 नई कंपनियां पंजीकृत हुईं.

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