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पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में देरी खत्म, सीएम फडणवीस ने उठाया बड़ा कदम

मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि जहां जरूरत है, वहां कोल्ड स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध है और सभी सेंटरों में सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए एक व्यापक ऑडिट किया जाएगा. फडणवीस ने प्राइवेसी को लेकर भी कड़ी चेतावनी दी और कहा कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के दौरान गोपनीयता बनाए रखना कानूनी रूप से जरूरी है.

Image Credits: X/@CMOMaharashtra
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महाराष्ट्र सरकार राज्य में पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया को आधुनिक बनाने के लिए बड़े कदम उठा रही है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधान परिषद में प्रश्नकाल के दौरान बताया कि मुंबई में 'नॉन-इनवेसिव पोस्ट-मॉर्टम' (वर्चुअल ऑटोप्सी) तकनीक जैसी हाई-टेक सुविधाएं शुरू की जाएंगी. 

महाराष्ट्र में पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया होगी हाईटेक

उन्होंने कहा कि सरकार ने यह पक्का करने के लिए कई कदम उठाए हैं कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट समय पर मिलें. इससे पिछले दो-तीन सालों में पेंडिंग रिपोर्ट की संख्या को काफी कम करने में सफलता मिली है. यह मुद्दा सदस्य चित्रा वाघ ने उठाया था और सतेज पाटिल, अंबादास दानवे, प्रज्ञा सातव और नीलम गोर्हे जैसे सदस्यों ने इस पर और सवाल पूछे.

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सीएम फडणवीस ने नॉन-इनवेसिव तकनीक के फायदों के बारे में बताते हुए कहा कि इससे शरीर को बिना चीर-फाड़ किए उसकी जांच की जा सकती है. इस तरीके से समय की बचत होती है, कम लोगों की जरूरत पड़ती है, मानवीय गलतियां कम होती हैं और शरीर में होने वाले बहुत छोटे बदलावों का भी सटीक पता चल जाता है.

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मुंबई के जेजे और केईएम अस्पतालों में जरूरी मशीनों के लिए टेंडर और खरीद की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है.

मुंबई में शुरू होगी वर्चुअल ऑटोप्सी सुविधा

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अभी महाराष्ट्र में 533 पोस्टमॉर्टम सेंटर काम कर रहे हैं और इस साल मई तक वहां 10,905 ऑटोप्सी की जा चुकी हैं. मुख्यमंत्री ने इन सेंटरों पर काम के भारी बोझ को देखते हुए स्टाफ, इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरे संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए एक तय समय-सीमा में समीक्षा करने का वादा किया.

फडणवीस ने बताया कि पहले पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने में छह महीने से लेकर एक साल तक का समय लग जाता था. लेकिन, पिछले दो-तीन सालों में फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी में कामकाज की गति बढ़ाकर पेंडिंग रिपोर्ट की संख्या को लगभग 3,00,000 से घटाकर 75,000 कर दिया गया है.

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले तीन-चार महीनों में इस पेंडिंग काम को सामान्य स्तर पर लाना है. इसके लिए मेडिको-लीगल मामलों और सुरक्षित रखे गए विसरा (अंगों) से जुड़े मामलों को सबसे ज्‍यादा प्राथमिकता दी जाएगी. जहां कुछ ग्रामीण सेंटरों में शव कम आते हैं, वहीं दुर्घटना-प्रवण इलाकों में सेंटरों पर बहुत ज्‍यादा दबाव होता है.

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“जहां जरूरत है, वहां कोल्ड स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध है”

मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि जहां जरूरत है, वहां कोल्ड स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध है और सभी सेंटरों में सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए एक व्यापक ऑडिट किया जाएगा. फडणवीस ने प्राइवेसी को लेकर भी कड़ी चेतावनी दी और कहा कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के दौरान गोपनीयता बनाए रखना कानूनी रूप से जरूरी है.

उन्होंने चेतावनी दी कि पुलिस को आधिकारिक रिपोर्ट सौंपने से पहले कोई भी जानकारी लीक करना गैर-कानूनी है और इन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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इस बीच, चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने विधानसभा को बताया कि सर जेजे ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के सोशल वर्क डिपार्टमेंट के दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. उन्होंने कहा कि अस्पताल के सभी संबंधित अधिकारियों को सख्‍त निर्देश दिए गए हैं कि वे मरीजों और उनके रिश्तेदारों के साथ सहानुभूति और विनम्रता से पेश आएं.

प्रश्नकाल के दौरान विधायक विलास भुमरे के सवाल का जवाब देते हुए, मुश्रीफ ने पुष्टि की कि जेजे अस्पताल के सोशल वर्क डिपार्टमेंट में सुपरिटेंडेंट के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई थी.

आरोपी कर्मचारियों को कड़ी चेतावनी

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सर जेजे ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के डीन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी कर्मचारियों को कड़ी चेतावनी जारी की है ताकि भविष्य में काम में कोई लापरवाही न हो.

इसके अलावा, बिना आधिकारिक अनुमति के अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों की सैलरी काटी गई है ('नो वर्क, नो पे' यानी काम नहीं तो वेतन नहीं). मंत्री ने बताया कि मेडिकल एजुकेशन डायरेक्टरेट के 26 जून, 2026 के आदेश के बाद, दो दोषी सोशल वर्क सुपरिटेंडेंट का तबादला दूसरी जगहों पर कर दिया गया है.

उन्होंने कहा कि सभी कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य कर दी गई है, और सेक्रेटरी व कमिश्नर को सिस्टम के कामकाज और अधिकारियों के प्रदर्शन पर कड़ी नजर रखने का निर्देश दिया गया है.

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