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'मनुस्मृति' से शुरू हुई बहस पहुंची UCC और शरिया तक... राहुल गांधी पर CM हिमंत सरमा का तीखा हमला, पूछे कई सवाल
असम CM हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वह महिलाओं के अधिकारों की आड़ में हिंदू धर्म को निशाना बना रहे हैं. उन्होंने राहुल गांधी को UCC पर बिना शर्त समर्थन देने की चुनौती दी. सीएम हिमंत के बयान के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी अब तेज हो सकती है.
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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से मनुस्मृति और महिलाओं की स्थिति को लेकर की गई टिप्पणी के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह महिला अधिकारों के मुद्दे को हिंदू धर्म को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. सरमा ने राहुल गांधी को यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर अपना रुख साफ करने की चुनौती भी दी.
दरअसल, हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी के खिलाफ बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि 'राहुल गांधी पागल हैं, पागल थे और पागल ही रहेंगे. असम सीएम ने कांग्रेस नेता की चुनावी राजनीति और उनके बयानों को लेकर भी कटाक्ष किया. उन्होंने कहा कि चुनाव हारने के बाद राहुल गांधी कुछ समय तक मुद्दा उठाते हैं और फिर विदेश चले जाते हैं. पागल के बारे में क्या चर्चा करें.'
राहुल गांधी पर हिंदू धर्म को निशाना बनाने का आरोप
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Delhi: On Congress MP and Leader of Opposition Rahul Gandhi's statement, Assam Chief Minister Himanta Biswa Sarma says, "Rahul Gandhi is mad. He was mad and will remain mad. He keeps losing elections. Then he makes noise for a few days, and the media promotes him. Then he loses… pic.twitter.com/4DhEgI4zA5
— IANS (@ians_india) ?ref_src=twsrc%5Etfw">August 25, 2026Advertisement
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हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी राहुल गांधी पर हमला किया. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता महिलाओं के अधिकारों के समर्थक नहीं हैं, बल्कि महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को हिंदू धर्म के खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हैं. सरमा का कहना है कि हिंदू धर्म की परंपराओं में समय के साथ बदलाव और सुधार की क्षमता रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर राहुल गांधी वास्तव में महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता की बात करते हैं, तो उन्हें धर्म से परे समान अधिकारों की बात करने वाले UCC का बिना शर्त समर्थन करना चाहिए.
Rahul Gandhi is NO champion of women’s rights. He is simply a Hindu baiter, using the cause of women’s empowerment as a convenient smokescreen to target and discredit Hindu Dharma.
Consider this: how many times has he spoken with the same outrage against patriarchal and medieval…— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) ?ref_src=twsrc%5Etfw">August 24, 2026Advertisement
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राहुल गांधी ने पुणे में क्या कहा था?
दरअसल, राहुल गांधी ने पुणे में अपने ‘छात्रों की गूंज’ आउटरीच कार्यक्रम के दौरान महिलाओं के अधिकार और पितृसत्ता का मुद्दा उठाया था. उन्होंने कहा कि भारत की करीब 70 करोड़ महिलाएं देश की बड़ी ताकत हैं, लेकिन उन्हें अक्सर बेटी, पत्नी और मां जैसी पारिवारिक पहचान तक सीमित कर दिया जाता है. राहुल गांधी ने इसे मनुस्मृति वाली सोच से जोड़ते हुए इसकी आलोचना की. उन्होंने युवा महिलाओं से कहा कि उनकी पहचान केवल पिता, पति या बेटे के रिश्ते से तय नहीं होनी चाहिए. साथ ही उन्होंने महिलाओं से पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती देने की अपील की. इसी बयान को लेकर हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी पर निशाना साधा और उनके महिला अधिकारों के दावे पर सवाल खड़े किए.
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शरिया पर क्यों नहीं बोलते राहुल गांधी?
असम के मुख्यमंत्री ने अपने हमले को आगे बढ़ाते हुए शरिया से जुड़े मुद्दे भी उठाए. उन्होंने सवाल किया कि राहुल गांधी हिंदू धार्मिक परंपराओं पर जिस तरह सवाल उठाते हैं, उसी तरह शरिया के तहत मौजूद पितृसत्तात्मक प्रथाओं पर कितनी बार बोले हैं. सरमा ने मनुस्मृति और शरिया के बीच अंतर बताते हुए दावा किया कि मनुस्मृति हिंदू धर्म में कोई सर्वमान्य कानून नहीं है. उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म की एक विशेषता यह रही है कि उसने समय के साथ बदलाव और सुधार को स्वीकार किया है. उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर उनकी चिंता वास्तव में समानता के लिए है या फिर इसका इस्तेमाल हिंदू धर्म को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है.
शाह बानो और तीन तलाक का भी उठाया मुद्दा
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हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस की पुरानी राजनीति का हवाला देते हुए शाह बानो मामले और मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े मुद्दों को भी चर्चा में ला दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि 1986 में कानून के जरिए सुप्रीम कोर्ट के शाह बानो फैसले के प्रभाव को पलटने में कांग्रेस की भूमिका रही. इसके अलावा उन्होंने तीन तलाक को अपराध घोषित करने वाले कानून के कांग्रेस की ओर से किए गए विरोध का भी जिक्र किया. सरमा का तर्क है कि अगर कांग्रेस वास्तव में महिलाओं के अधिकारों को लेकर गंभीर है, तो उसे सभी समुदायों से जुड़े समान सवालों पर एक जैसा रुख अपनाना चाहिए.
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कर्नाटक कैबिनेट को लेकर भी हमला
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असम सीएम ने कर्नाटक में कैबिनेट गठन का मुद्दा भी राहुल गांधी के सामने रखा. उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक सत्ता बनाए रखने की कोशिश में राज्य मंत्रिमंडल में एक भी महिला को जगह नहीं दी गई. हालांकि, राहुल गांधी की ओर से हिमंत बिस्वा सरमा के इन ताजा आरोपों पर प्रतिक्रिया इस बयान में सामने नहीं आई है. ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि कांग्रेस और राहुल गांधी UCC को लेकर सरमा की चुनौती का क्या जवाब देते हैं.
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बताते चलें कि मनुस्मृति, महिला अधिकार, UCC और शरिया जैसे मुद्दों के एक साथ सामने आने से यह विवाद सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है. आने वाले दिनों में यह बहस संसद से लेकर चुनावी मंचों तक राजनीतिक चर्चा का बड़ा मुद्दा बन सकती है.