शिक्षामित्रों के ‘अच्छे दिन’ आने वाले...! वेतन बढ़ोतरी पर CM योगी का बड़ा ऐलान
ShikshaMitras Salary Hikes: मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने विधान परिषद में कहा है कि सरकार इस मुद्दे पर काम कर रही है. उनके इस बयान के बाद राज्य के लाखों शिक्षामित्रों और हजारों अनुदेशकों में नई उम्मीद जगी है. वर्षों से कम वेतन में काम कर रहे ये लोग अब उम्मीद लगा रहे हैं कि जल्द ही उनकी आय में बढ़ोतरी हो सकती है.
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ShikshaMitras Salary Hikes: उत्तर प्रदेश में लंबे समय से शिक्षामित्र और अनुदेशक अपनी सैलरी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. अब उनके लिए राहत भरी खबर सामने आई है. मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने विधान परिषद में कहा है कि सरकार इस मुद्दे पर काम कर रही है. उनके इस बयान के बाद राज्य के लाखों शिक्षामित्रों और हजारों अनुदेशकों में नई उम्मीद जगी है. वर्षों से कम वेतन में काम कर रहे ये लोग अब उम्मीद लगा रहे हैं कि जल्द ही उनकी आय में बढ़ोतरी हो सकती है.
यूपी में कितने हैं शिक्षामित्र और क्या है उनका मामला
प्रदेश में करीब 1 लाख 43 हजार शिक्षामित्र हैं. इनकी शुरुआत Mayawati की सरकार के समय हुई थी, जब इन्हें ट्रेनिंग दी गई थी. बाद में 2012 में Akhilesh Yadav की सरकार ने इन्हें सहायक शिक्षक बना दिया था. उस समय इनकी सैलरी लगभग 50 हजार रुपये महीना हो गई थी.
लेकिन यह फैसला अदालत में चुनौती दे दिया गया. मामला पहले हाईकोर्ट और फिर Supreme Court of India तक पहुंचा. कोर्ट ने कहा कि सहायक शिक्षक बनने के लिए RTE कानून के तहत TET पास करना जरूरी है. चूंकि सभी शिक्षामित्र TET पास नहीं थे, इसलिए उनकी सहायक शिक्षक के रूप में भर्ती रद्द कर दी गई.इसके बाद वे फिर से शिक्षामित्र बन गए और उनकी सैलरी घटाकर लगभग 10 हजार रुपये महीना कर दी गई.
सोचिए, जिन लोगों को 50 हजार रुपये मिल रहे थे, वे अचानक 10 हजार रुपये पर आ गए. इतने कम वेतन में परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो गया. इसी वजह से वे लंबे समय से वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं.
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अनुदेशकों की स्थिति भी कठिन
सिर्फ शिक्षामित्र ही नहीं, बल्कि प्रदेश के जूनियर हाईस्कूलों में काम कर रहे 24 हजार से ज्यादा अनुदेशक भी कम वेतन की समस्या झेल रहे हैं। ये लोग संविदा पर काम करते हैं और इन्हें करीब 7 हजार रुपये महीना मिलते हैं. जबकि कोर्ट पहले ही आदेश दे चुका है कि इन्हें 17 हजार रुपये महीना मिलना चाहिए.
कम वेतन में गुजारा करना आसान नहीं है. महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन इनकी आय कई सालों से लगभग वही की वही है. इसलिए अनुदेशक भी लगातार सरकार से वेतन बढ़ाने की मांग करते रहे हैं.
सीएम के बयान से बढ़ी उम्मीद
विधान परिषद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा कि सरकार इस मुद्दे पर विचार कर रही है. यह बयान छोटा जरूर है, लेकिन इसका मतलब बड़ा है. इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की परेशानी को समझ रही है और समाधान निकालने की दिशा में काम कर रही है.
शिक्षामित्र और अनुदेशक दोनों ही शिक्षा व्यवस्था की अहम कड़ी हैं. गांव-देहात के स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी काफी हद तक इन्हीं पर होती है. ऐसे में अगर उनका वेतन बढ़ता है, तो उनका मनोबल भी बढ़ेगा और वे और बेहतर तरीके से बच्चों को शिक्षा दे पाएंगे.
आगे क्या हो सकता है
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अब सबकी नजर सरकार के अगले फैसले पर है. अगर वेतन बढ़ता है, तो लाखों परिवारों को राहत मिलेगी. शिक्षामित्र और अनुदेशक लंबे समय से जिस “अच्छे दिन” का इंतजार कर रहे हैं, वह शायद अब दूर नहीं है. सरकार अगर जल्द निर्णय लेती है, तो यह कदम शिक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों दोनों के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है.
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