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10 महीने की बच्ची ने लौटाई 5 लोगों को जिंदगी, राजकीय सम्मान से दी गई अंतिम विदाई, जानें कौन हैं आलिन शेरिन?

केरल के पथानामथिट्टा में 10 महीने की नन्हीं आलिन को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. आलिन इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनकी वजह से पांच लोगों को नई जिंदगी मिल गई.

10 महीने की बच्ची ने लौटाई 5 लोगों को जिंदगी, राजकीय सम्मान से दी गई अंतिम विदाई, जानें कौन हैं आलिन शेरिन?
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Aalin Sherin Abraham: वो सिर्फ़ 10 महीने की थी लेकिन इन 10 महीनों में उसने पांच जिंदगियां हमेशा के लिए बदल दीं. या यूं कहें नई जिंदगी दे दी. केरल की सबसे कम उम्र की अंगदाता आलिन शेरिन अब्राहम इस दुनिया में नहीं रहीं लेकिन वह हमेशा के लिए कई जिंदगियों में बस गईं. 

केरल के पथानामथिट्टा में 10 महीने की नन्हीं आलिन को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. इस दौरान राजनीतिक हस्तियों के साथ पूरा जनसैलाब उमड़ा. पुलिस ने नन्हीं आलिन को सैल्यूट किया और सलाम किया उन मां-बाप के साहस को, जिन्होंने अपनी बच्ची के अंग दान करने का फैसला लिया. आलिन शेरिन अब्राहम को नेदुंगदप्पल्ली सेंट थॉमस सीएसआई चर्च में अंतिम विदाई दी गई. इस दौरान हर किसी की आंखें नम थीं. 

कार एक्सीडेंट में गंवाई जान 

दरअसल, 5 फरवरी को अरुण अब्राहम और शेरिन एन जॉन अपनी बेटी आलिन को लेकर कोट्टायम में रिश्तेदारों के साथ कार से कहीं जा रहे थे. रास्ते में उनकी कार हादसे का शिकार हो गई. इस हादसे में आलिन गंभीर रूप से घायल हो गईं थी. इसके बाद डॉक्टर्स ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया. इस मुश्किल घड़ी में अरुण और शेरिन अब्राहम ने असाधारण उदारता दिखाई और बच्ची के पांच ऑर्गन डोनेट करने का फैसला लिया. 

बच्ची के पांच अंग दान किए गए, इनमें लीवर, किडनी, कॉर्निया और हार्ट वॉस्व थे. आलिन का लीवर जो दूसरे बच्चे की नई जिंदगी है, हार्ट वॉस्व जो किसी बच्चे के दिल में धड़क रहे हैं. किडनी जिसने जिंदगी में नई उम्मीद जगाई है. आलिन की आंखें जिसने किसी के जीवन को रोशनी से भर दिया है. 

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आलिन को अंतिम विदाई देने केरल में हजारों लोग जमा हुए. राजनीतिक हस्तियां जैसे मंत्री वीना जॉर्ज और वी एन वासवन, BJP सांसद सुरेश गोपी और कई अन्य जन प्रतिनिधि भी आलिन के घर उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे. आलिन को राजकीय सम्मान से अंतिम विदाई दी गई. जो प्रसिद्ध, असाधारण और बड़ी हस्तियों को ही दिया जाता है. आलिन के छोटे ताबूत को चमेली के फूलों से सजाया गया था. 

मां-बाप के फैसले पर दादा ने क्या कहा? 

आलिन के दादा रेजी सैमुअल अपनी पोती को अंतिम विदाई देते हुए बेहद भावुक थे, लेकिन ये सांत्वना थी कि उनकी नन्हीं पोती कई जिंदगियों को बटा गई. रेजी सैमुअल ने बताया कि परिवार को इस बात से सांत्वना मिली है कि चार अन्य बच्चों को नया जीवन मिला है. ‘जब मेरे बेटे ने मुझे अपनी पोती के अंग दान करने के निर्णय के बारे में बताया, तो मैं सहमत हो गया. लोगों ने पूछा कि क्या मुझे दर्द हो रहा है. हां, दर्द तो है, लेकिन मैं अपने बच्चों के निर्णय के साथ खड़ा रहा. हमने अपनी उस बच्ची को खो दिया, जो 20 महीने हमारे साथ रही - 10 महीने गर्भ में और 10 महीने धरती पर- लेकिन हमें चार बच्चे मिले. हमारी बच्ची अपने जन्म से पहले ही उसे सौंपे गए कर्तव्य को पूरा करके लौट गई. ईश्वर ने उसे उसके जन्म के उद्देश्य को पूरा करने के बाद वापस बुला लिया.’

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आलिन को अंतिम विदाई देने वे परिवार भी पहुंचे जिनके बच्चों को आलिन के अंग लगे हैं. आलिन खुद दुनिया नहीं देख सकी, लेकिन उसके दुनिया में आने भर से कई जिंदगियों को जैसे सांस मिल गई. इस असाधारण साहस के लिए लोग आलिन के मां-बाप अरुण शेरिन जॉन को सलाम कर रहे हैं. 

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