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CM योगी ने बाबासाहेब की जयंती से पहले उनके विचारों को समर्पित की इस बार की 'योगी की पाती', जनता से आत्मसात करने की अपील

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने भारत रत्न बाबासाहेब डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की जयंती से पहले लिखी अपनी 'योगी की पाती' के जिए बाबासाहेब को श्रद्धांजलि अर्पित की है. सीएम ने मौजूदा दौर पर उनके विचारों को बेहद प्रासंगिक बताया और सरकार के कामकाज के प्रति मार्गदर्शक करार दिया.

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13 Apr 2026
( Updated: 13 Apr 2026
11:41 AM )
CM योगी ने बाबासाहेब की जयंती से पहले उनके विचारों को समर्पित की इस बार की 'योगी की पाती', जनता से आत्मसात करने की अपील
Yogi Ki Pati
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बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी विशेष 'योगी की पाती' में बाबासाहेब के आदर्शों मसलन शिक्षा, समाज और आर्थिकी को लेकर विचारों को समर्पित की है. अपनी पाती के जरिए मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को अंबेडकर जयंती की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए बाबासाहेब के विजन को अपनी सरकार के कार्यों और योजनाओं के मूल में उतारने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की.

सीएम योगी ने आगे अपील की कि समाज के हर वर्ग को बाबासाहेब के महान विचारों को केवल याद नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने जीवन में आत्मसात भी करना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि बाबासाहेब का 'समतामूलक समाज' का सपना तभी पूरा होगा जब हम उनके बताए सिद्धांतों को अपने आचरण में उतारेंगे.

CM योगी ने बाबासाहेब को समर्पित की 'योगी की पाती'

सीएम योगी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर लिखा, "14 अप्रैल को भारत रत्न बाबासाहेब डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर जी की पावन जयंती है. यह अवसर भारत के संविधान की रूपरेखा तैयार करने वाले उस महान व्यक्तित्व को कृतज्ञता अर्पित करने का है, जिसकी दृष्टि से करोड़ों लोगों को गरिमामयी जीवन का अधिकार मिला."

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बाबासाहेब के शिक्षा और आर्थिकी को लेकर विचार का उल्लेख करते हुए उन्होंने आगे कहा कि, "वैसे तो विजन, मिशन और लगन के धनी बाबासाहेब के हर शब्द प्रेरक हैं, परंतु आर्थिक आयाम और शिक्षा के प्रति उनकी दूरदृष्टि अमूल्य है. उन्होंने राजकोषीय संघवाद का विचार दिया. साथ ही कहा था, शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो. अपने समय में बाबासाहेब भारत के सर्वाधिक शिक्षित लोगों में एक थे. 35 हजार से अधिक पुस्तकों के संग्रहकर्ता बाबासाहेब 16 से 18 घंटे प्रतिदिन अध्ययन करते थे."

बाबासाहेब की है बहुआयामी विचारक की पहचान

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सीएम योगी ने कहा, "स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री बाबासाहेब की पहचान न्यायविद, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ एवं संवेदनशील समाज सुधारक की है. बाबासाहेब ने घर पर सहयोग के लिए सुदामा नाम के व्यक्ति को रखा था. एक बार सुदामा देर रात फिल्म देखकर लौटे, तो बाहर ही सो गए. सुबह सुदामा जागे, तो उन्होंने पाया कि बाबासाहेब ने उनके ऊपर अपना ओवरकोट ओढ़ा दिया है."

उन्होंने कहा, "बाबासाहेब के विचारों को अपनाकर हमारी सरकार न्याय और समता के आदर्शों के अनुरूप प्रत्येक गरीब, वंचित, महिला और युवा तक योजनाओं का लाभ पहुंचा रही है- चाहे वह राशन, आवास, शौचालय, स्वास्थ्य सेवाएं हों या 'घरौनी' के माध्यम से महिलाओं को मालिकाना अधिकार. छात्रवृत्तियां, सामूहिक विवाह योजना, प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री आवास योजना वंचितों के लिए संबल बनी. अटल आवासीय विद्यालयों में वंचित बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है."

'बाबासाहेब के सिद्धांतों को आत्मसात कर रही योगी सरकार'

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उन्होंने बताया, "बाबासाहेब के नाम पर छात्रावासों के पुनर्निर्माण और नवनिर्माण की योजना से दलित और कमजोर वर्गों के छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में सहायता मिलेगी. नियोजित कार्यक्रमों से उत्तर प्रदेश में 6 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से ऊपर आए हैं और अब सरकार बाबासाहेब के सिद्धांतों को आत्मसात करते हुए जीरो पॉवर्टी कार्यक्रम को आगे बढ़ा रही है."

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उन्होंने कहा, "बाबासाहेब के विचार अपनाने से ही समरस, सशक्त और समृद्ध प्रदेश के निर्माण का संकल्प पूरा होगा. प्रदेशवासियों से मेरा आग्रह है कि अपने घर में अच्छी पुस्तकें रखें, स्वयं पढ़ें और बच्चों को भी प्रेरित करें, तभी बाबासाहेब का सपना साकार होगा."

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