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विजय को मिली मुख्यमंत्री जैसी सुरक्षा हटाई गई... क्या तमिलनाडु में नहीं बन पाएगी TVK की सरकार? जानें पूरा मामला

तमिलनाडु पुलिस ने TVK प्रमुख सी. जोसेफ विजय को दी गई मुख्यमंत्री स्तर की Z-Plus सुरक्षा और वीआईपी काफिला वापस ले लिया है. चुनाव नतीजों के दौरान पार्टी की बड़ी बढ़त के बाद सुरक्षा बढ़ाई गई थी, लेकिन अब इसे घटाकर न्यूनतम कर दिया गया है.

विजय को मिली मुख्यमंत्री जैसी सुरक्षा हटाई गई... क्या तमिलनाडु में नहीं बन पाएगी TVK की सरकार? जानें पूरा मामला
Image Source: IANS
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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में इस बार जनता ने एक नई पार्टी को अपना वोट रूपी आशीर्वाद देकर सबको चौंका दिया है. अभिनेता से नेता बने तमिझगा वेत्री कड़गम (TVK) प्रमुख विजय लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं. विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी के शानदार प्रदर्शन के बाद जहां एक तरफ उन्हें मुख्यमंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अचानक लिया गया बड़ा फैसला अब नई चर्चाओं को जन्म दे रहा है.

अचानक हटाई गई Z-Plus सुरक्षा

तमिलनाडु पुलिस ने बुधवार रात विजय को दी गई कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और उनके वीआईपी काफिले को वापस ले लिया. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, विजय को कुछ दिनों से मुख्यमंत्री स्तर की ‘Z-Plus’ सुरक्षा दी जा रही थी, लेकिन अब इसे घटाकर न्यूनतम स्तर पर कर दिया गया है. इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

क्यों बढ़ाई गई थी सुरक्षा?

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दरअसल, चार मई को मतगणना शुरू होने के साथ ही TVK की बड़ी जीत के संकेत मिलने लगे थे. शुरुआती रुझानों में पार्टी के शानदार प्रदर्शन के बाद विजय के आवास और पार्टी कार्यालय के बाहर समर्थकों की भारी भीड़ जमा होने लगी. इसी को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था अचानक बढ़ा दी थी. हालांकि, सिर्फ भीड़ नियंत्रण तक ही मामला सीमित नहीं था. विजय के लिए जिस तरह का रूट प्रोटोकॉल और सुरक्षा घेरा तैयार किया गया, उसने साफ संकेत दिया कि उन्हें मुख्यमंत्री स्तर की सुरक्षा दी जा रही है.

सुरक्षा व्यवस्था में कौन-कौन था शामिल?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विजय की सुरक्षा की निगरानी के लिए डीआईजी रैंक के वरिष्ठ अधिकारी को तैनात किया गया था. इसके अलावा सिक्योरिटी ब्रांच CID के कई सशस्त्र कमांडो भी उनकी सुरक्षा में लगाए गए थे. विजय के आवास और पार्टी कार्यालय में एंट्री कंट्रोल सिस्टम तक स्थापित कर दिया गया था. इतना ही नहीं, पुलिस अधीक्षक रैंक के अधिकारियों को भी विशेष ड्यूटी पर लगाया गया था, जो सीधे खुफिया विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट कर रहे थे.

पार्टी नेताओं के अनुरोध पर हटाई गई सुरक्षा

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एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, TVK के वरिष्ठ नेताओं ने खुद यह अनुरोध किया था कि विजय को जरूरत से ज्यादा वीआईपी सुरक्षा न दी जाए. पार्टी नहीं चाहती थी कि जनता के बीच यह संदेश जाए कि विजय पहले ही मुख्यमंत्री जैसी सुविधाएं लेने लगे हैं. यही वजह रही कि विशेष सुरक्षा में तैनात अधिकारियों को भी उनकी पुरानी जिम्मेदारियों पर वापस भेज दिया गया. हालांकि सुरक्षा घटाए जाने के बाद भी विजय पूरी तरह बिना सुरक्षा के नहीं रहेंगे. केंद्र सरकार की ओर से उन्हें पहले से ‘Y’ श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है. उनकी सुरक्षा में CRPF के जवान तैनात रहते हैं. इसके अलावा पार्टी के निजी सुरक्षा गार्ड भी लगातार उनके साथ मौजूद रहते हैं. सार्वजनिक कार्यक्रमों और यात्राओं के दौरान स्थानीय पुलिस भी अतिरिक्त सुरक्षा देती है.

सरकार गठन को लेकर बढ़ा सस्पेंस

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ी चर्चा सरकार गठन को लेकर हो रही है. विजय ने बुधवार को तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया. उन्होंने राज्यपाल को समर्थन देने वाले विधायकों की सूची भी सौंपी. खास बात यह रही कि कांग्रेस ने भी बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए विजय की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया. इसके साथ ही कांग्रेस ने अपने पुराने सहयोगी द्रमुक से दूरी बना ली.

तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव

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तमिलनाडु की राजनीति में यह बदलाव बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि दशकों से राज्य की राजनीति द्रमुक और अन्नाद्रमुक के इर्द-गिर्द घूमती रही है. लेकिन इस चुनाव में TVK ने 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया. हालांकि सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा अभी भी पूरी तरह उनके पास नहीं पहुंचा है. कांग्रेस की पांच सीटों के समर्थन के बावजूद स्थिति पूरी तरह साफ नहीं मानी जा रही. राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए राज्यपाल अभी संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं. यही कारण है कि सरकार गठन और शपथ ग्रहण को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.

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बहरहाल, तमिलनाडु की राजनीति में सस्पेंस लगातार बढ़ता जा रहा है. एक तरफ विजय की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ सत्ता तक पहुंचने का रास्ता अभी पूरी तरह साफ नहीं हुआ है. अब सबकी नजर राज्यपाल के अगले फैसले और राजनीतिक जोड़तोड़ पर टिकी हुई है.

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