योगी से लिया आशीर्वाद और धारण कर लिया उनका रौद्र 'अवतार', बंगाल में सनातनियों के लिए ताबड़तोड़ फैसले, भागे-भगे फिरेंगे कट्टरपंथी
सुभेंदु अधिकारी यूपी के सीएम योगी से भी काफी प्रभावित हैं, उनके इस बदलते राजनीतिक चरित्र की बड़ी झलक तब भी दिखी थी जब तीन हफ्ते पहले एक चुनावी मंच पर उन्होंने योगी आदित्यनाथ के सामने साष्टांग दंडवत होकर उनके पैर हुए थे.
Follow Us:
बंगाल में इस बार वो हुआ जो बीते 15 सालों में नहीं हुआ था, ममता बनर्जी की TMC को करारी मात देकर बीजेपी ने बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में प्रचंड बहुमत हासिल कर सभी को चौंका दिया है, बंगला की जनता को बदलाव चाहिए और बदलाव हो गया है.
सुभेंदु अधिकारी का बयान वायरल
कोलकाता के भवानीपुर से 4 मई को चुनावी जीत का सर्टिफ़िकेट हाथ में लेते हुए सुभेंदु अधिकारी ने जो बयान दिया उसने हर किसी को हैरान कर दिया.उन्होंने बिना घुमाए फिराए अपनी बात रखी और कहा है कि मुई वार्ड नंबर 77, 78, और 80 के मुसलमानों ने वोट नहीं दिया है, मेरी जीत वार्ड नंबर 71 और 74 के हिंदुओं की बदौलत हुई है.
योगी अवतार में नज़र आ रहे सुभेंदु अधिकारी
सुभेंदु अधिकारी का ये बयान सिर्फ एक चुनावी जीत का सिर्फ आंकड़ा भर नहीं था, बल्कि उनका ये बयान बंगाल के भविष्य की सियासत में बदलाव का बड़ा संकेत था. जो इस बात की तरफ़ साफ़-साफ इशारा कर रहा था कि अब वो किसी धर्मनिरपेक्षता की चादर ओड़ने के बजाय खुले तौर पर हिंदुत्व की उसी पिच पर बैटिंग करेंगे, जिसे उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ और असम में हिमंत बिस्वा सरमा ने स्थापित किया है. ऐसा लग रहा है कि अब सुभेंदु अधिकारी योगी अवतार में नज़र आ रहे हैं.
वैसे ये पहली बार है, जब सुभेंदु अधिकारी ने 4 मई को ही इस तरह का संकेत दिया हो, वो इस पूरे चुनाव प्रचार के दौरान यूं कहें की बीते कुछ महीनों से इसी तेवर में नज़र आ रहे हैं, चलिए बताते हैं आपको वो संकेत क्या हैं.
सुवेंदु के भवानीपुर वाले बयान के मायने
सुभेंदु अधिकारी ने अपनी जीत के बाद जिस तरह से आंकडों का जिक्र किया था, उससे बहुत कुछ बयां हो गया था, यूं कहें कि उसने बंगाल की पारंपरिक राजनीति को बदला लिया है, उन्होंने खुले मंच से वार्डों का हवाला देते हुए कहा है कि मुस्लिम इलाकों ने उन्हें पूरी तरह से नकार दिया, जबकि हिंदू इलाकों ने उन पर अपना भरोसा जताया. बंगाल की राजनीति में ये पहली बार था, जब किसी बड़े नेता ने खुलकर अपनी सबके सामने कह दी. उन्होंने सबका साथ जैसी औपचारिकतों को किनारे रखकर खुलकर उस वोट बैंक की बात की, जो चुनाव के दौरान उनके साथ खड़ा रहा. सुभेंदु ने साफ़ कर दिया वो उन्हीं के लिए आवाज उठाएंगे और उन्हीं के लिए काम करेंगे, जिन्होंने उन्हें चुना है.
सीएम योगी को किया 'साष्टांग प्रणाम'
सुभेंदु अधिकारी यूपी के सीएम योगी से भी काफी प्रभावित हैं, उनके इस बदलते राजनीतिक चरित्र की बड़ी झलक तब भी दिखी थी जब तीन हफ्ते पहले एक चुनावी मंच पर उन्होंने योगी आदित्यनाथ के सामने साष्टांग दंडवत होकर उनके पैर हुए थे. ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था और इसे बंगाल में योगी मॉडल के ऑफिशियली प्रवेश के रुप में देखा गया.
सुभेंदु के भाषणों में भी 70 बनाम 30
अब तो सुभेंदु अपने भाषणों में भी 70 बनाम 30 के समीकरण को खुलकर हवा देते हैं. उनका तर्क एक दम साफ़ है कि अगर 70 प्रतिशत हिंदू एकजुट हो जाएं, तो बंगाल से तुष्टिकरण की राजनीति का हमेशा के लिए अंत हो जाएगा. सुभेंदु का ये नैरेटिव बिल्कुल योगी के 80 बनाम 20 वाले फॉर्मूले की कार्बन कॉपी नज़र आता है.
सुभेंदु अधिकारी यूपी के सीएम योगी से भी काफी प्रभावित हैं, उनके इस बदलते राजनीतिक चरित्र की बड़ी झलक तब भी दिखी थी जब तीन हफ्ते पहले एक चुनावी मंच पर उन्होंने योगी आदित्यनाथ के सामने साष्टांग दंडवत होकर उनके पैर हुए थे. ये वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था. #yogi… pic.twitter.com/6OPUDEoP1k
— NMF NEWS (@NMFNewsNational) May 6, 2026
सुभेंदु का 'जो हमारे साथ, हम उनके साथ' वाला मंत्र
सुभेंदु अधिकारी ने 17 जुलाई 2024 को ही कोलकाता के साइंस सिटी ऑडिटोरियम में आयोजित बीजेपी राज्य कार्यकारिणी की बैठक में अपनी नई राजनीतिक लाइन खींच दी थी. उन्होंने मंच से खुले तौर पर कहा था, "मैंने अब 'सबका साथ-सबका विकास' कहना बंद कर दिया है. अब मेरा मंत्र है— 'जो हमारे साथ, हम उनके साथ' सुभेंदु ने साफ किया कि जब अल्पसंख्यकों ने पार्टी को वोट नहीं दिया, तो अब बीजेपी को भी सिर्फ अपने समर्थक हिंदू मतदाताओं के हितों की बात करनी चाहिए.
सुभेंदु की रणनीति में हिमंत वाला ‘कड़ा तेवर’
सुभेंदु की रणनीति में योगी के अलावा असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा वाला कड़ा तेवर भी साफ़ दिखाई देता है. जिस तरह से हिमंत ने असम में घुसपैठ और सांस्कृतिक पहचान को मुद्दा बनाकर अल्पसंख्यक वोट बैंक की अहमियत को चुनौती दी. सुभेंदु भी बंगाल में वही कर रहे हैं. ये अब ममता बनर्जी को उनके गढ़ में ही घेरने के लिए सनातन और हिंदू गौरव को ढाल बना रहे हैं. विधानसभा के अंदर और बाहर सुभेंदु का हर प्रहार अब इसी तरफ़ इशारा कर रहा है कि वो ख़ुद को बंगाल में हिंदू हिंदू हृदय सम्राट' के रूप में स्थापित करना चाहते हैं.
ममता बनर्जी को शुभेंदु ने कितने वोटों से दी मात?
बता दें कि इस चुनाव में चौंकाने वाला मोड़ तब सामने आया,जब सीएम और TMC की प्रमुख ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से शुभेंदु अधिकारी से 15,105 वोटों से हार गईं. जहां अधिकारी को 73,917 वोट मिले, जबकि बनर्जी को 58,812 वोट मिले थे. वहीं माकपा के श्रीजीव बिस्वास काफी पीछे रहे.
किस पार्टी ने कितनी सीटें जीतीं?
EC के आकड़ों की मानें तो 294 सीटों में से बीजेपी ने 206 सीटें जीती हैं. वहीं TMC ने 81 सीटें जीती. और एक सीट पर गिनती जारी है. कांग्रेस को 2 सीटें मिली हैं, जबकि हुमायूं कबीर की एजेूपी को भी 2 सीटे मिली हैं. वहीं माकपा केवल एक ही सीट जीत पाई.
बंगाल में कितने चरणों में हुए चुनाव
यह भी पढ़ें
बंगाल में दो चरणों में चुनाव हुए थे. पहले चरण के मतदान 23 अप्रैल को हुए थे, जबकि दूसरे चरण के मतदान 29 अप्रैल को हुए थे. वहीं 4 मई को नतीजे घोषित हुए थे. जिसमें बीजेपी ने बंपर जीत हासिल कर ममता की TMC को मात दे दी.
कृपया Google से लॉग इन करें टिप्पणी पोस्ट करने के लिए
Google से लॉग इन करें