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बंगाल में फिर से वोटिंग? 77 बूथों पर री-पोल की मांग पर चुनाव आयोग सख्त, राजनीतिक गलियारों में मची हलचल

Re-Poll On 77 Booths: बंगाल में चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों के बीच 77 बूथों पर फिर से मतदान की मांग ने राजनीतिक पारा बढ़ा दिया है, जिस पर चुनाव आयोग अब कड़ा रुख अपना रहा है.

Image Source: IANS/X/@ECISVEEP
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भारतीय जनता पार्टी में पश्चिम बंगाल में 77 बूथों पर दोबारा मतदान की मांग की है. 29 अप्रैल को दूसरे चरण के दौरान इन 77 बूथों पर वोटिंग हुई थी, जहां गड़बड़ी और झड़प की खबरें भी सामने आई थीं. वहीं, सूत्रों ने बताया है कि गुरुवार को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) बीजेपी की मांग पर फैसला ले सकता है. 

किन सीटों पर दोबारा मतदान की उठ रही मांग?

77 मतदान केंद्रों में से 64 डायमंड हार्बर के अंतर्गत आते हैं. यहां से तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी सांसद हैं. मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया कि जिन 77 मतदान केंद्रों पर भाजपा ने दोबारा मतदान की मांग की है, उनमें से 32 फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में, 29 डायमंड हार्बर विधानसभा सीट पर, तीन बज-बज विधानसभा क्षेत्र में और 13 मगराहाट (पूर्व) विधानसभा क्षेत्र में आते हैं. 

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बीजेपी ने क्या लगाए आरोप?

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पहले तीन विधानसभा क्षेत्र डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं. मगराहाट (पूर्व) विधानसभा क्षेत्र जयनगर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. ये दोनों ही संसदीय क्षेत्र दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित हैं. फाल्टा में कई मतदान केंद्रों पर ईवीएम (EVM) से छेड़छाड़ की शिकायतें थीं. भाजपा ने आरोप लगाए कि ईवीएम में पार्टी सिंबल के सामने की बटन को टेप से ब्लॉक किया गया था, ताकि वोटर अपने पसंद का उम्मीदवार चुनने से वंचित रह जाएं. भाजपा ने चुनाव आयोग के सामने ईवीएम से छेड़छाड़ की शिकायतें भी दर्ज कराई थीं.

कैसे शुरू हुआ विवाद?

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बता दें कि फाल्टा विधानसभा क्षेत्र पिछले कुछ दिनों से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. इसकी पहली वजह ईसीआई (ECI) की ओर से डायमंड हार्बर उप-मंडल के लिए नियुक्त पुलिस पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) अजय पाल शर्मा थे. उनकी फाल्टा से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान के साथ हुई तीखी नोकझोंक हुई थी. इसके बाद, बुधवार को फाल्टा ईवीएम मशीनों पर टेप चिपकाने के आरोपों के कारण विवादों में आया.

चुनाव आयोग क्या कदम उठा रहा है?

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चुनाव आयोग ने इस मामले का तत्काल संज्ञान लिया और सीईओ कार्यालय से इस संबंध में एक रिपोर्ट तलब की. सीईओ कार्यालय के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया, "रिपोर्ट भेज दी गई है और उम्मीद है कि आयोग जल्द ही दोबारा मतदान कराने के संबंध में अपना फैसला सुना देगा”. बता दें कि पश्चिम बंगाल में छुट-पुट घटनाओं के साथ पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को हुआ था. इस दौरान रिकॉर्ड वोट पड़े और किसी भी मतदान केंद्र पर दोबारा वोटिंग की जरूरत नहीं पड़ी. 

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