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'कांग्रेस बन जाएगी एक समुदाय की पार्टी…', असम चुनाव से पहले CM हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा हमला, बोले- 99% हिंदू छोड़ेंगे दल
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर हमला करते हुए दावा किया कि पार्टी के 99 प्रतिशत हिंदू सदस्य उसे छोड़ना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद कांग्रेस केवल एक समुदाय की पार्टी बनकर रह जाएगी.
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असम में आगामी 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा चुका है. चुनावी मैदान में जहां एक तरफ विकास के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बयानबाजी और दल-बदल ने सियासी पारा और बढ़ा दिया है. इसी बीच राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस पार्टी के भविष्य को लेकर बड़ा दावा किया है.
कांग्रेस पर बड़ा दावा
मुख्यमंत्री सरमा ने एक न्यूज़ एजेंसी को दिए इंटरव्यू के दौरान कहा कि कांग्रेस के भीतर विघटन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के लगभग 99 प्रतिशत हिंदू सदस्य पार्टी छोड़ना चाहते हैं. उनके अनुसार, चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस केवल एक समुदाय विशेष की पार्टी बनकर रह जाएगी. यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में राजनीतिक हलचल अपने चरम पर है.
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दल-बदल से कांग्रेस को झटके
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दरअसल, असम में चुनाव से पहले कांग्रेस को लगातार झटके लग रहे हैं. कई बड़े नेता पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुके हैं. इनमें सांसद प्रद्युत बोरदोलोई और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा जैसे नाम शामिल हैं. इसके अलावा कई विधायक भी पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं. इन घटनाओं ने कांग्रेस की स्थिति को कमजोर करने का संकेत दिया है.
मियां’ समुदाय पर बयान से बढ़ी बहस
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इसी क्रम में मुख्यमंत्री का एक और बयान चर्चा में आ गया, जिसमें उन्होंने बांग्लादेशी ‘मियां’ समुदाय को लेकर कड़ा रुख दिखाया. एक चुनावी सभा में उन्होंने कहा कि अगर भाजपा गठबंधन फिर से सत्ता में आता है तो इस समुदाय की ‘कमर तोड़ दी जाएगी’. उन्होंने इसे एक मजबूत असमिया समाज के निर्माण से जोड़ा और कहा कि अवैध प्रवासी स्थानीय लोगों के लिए चुनौती नहीं बन पाएंगे. इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है. मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भी तंज कसते हुए कहा कि ‘बांग्लादेशी’ लोग कांग्रेस को वोट देंगे. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस भारत में सरकार नहीं बना सकती, बल्कि वह पाकिस्तान या बांग्लादेश में सरकार बना सकती है. इस तरह के बयान चुनावी माहौल को और ज्यादा तीखा बना रहे हैं.
विकास नौकरियों का दावा
मुख्यमंत्री सरमा ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले पांच सालों में असम में बड़े पैमाने पर विकास हुआ है. उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने 1.65 लाख लोगों को सरकारी नौकरियां दी हैं. सरमा ने इसे अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यही वजह है कि राज्य में चुनाव एक उत्सव की तरह हो रहे हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा इस बार भी रिकॉर्ड जीत के साथ सत्ता में वापसी करेगी.
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घुसपैठ बना अहम मुद्दा
हालांकि, चुनावी माहौल में सिर्फ विकास ही नहीं बल्कि अन्य मुद्दे भी प्रमुखता से उठ रहे हैं. घुसपैठ का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है. मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि यह समस्या अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है और आगे भी इसे नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे.
कांग्रेस का पलटवार
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वहीं, इन आरोपों पर कांग्रेस ने भी जोरदार पलटवार किया है. कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री सरमा पर समाज को बांटने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी केवल ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा देती है. शिवकुमार ने असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई का बचाव करते हुए कहा कि वह एक मजबूत नेता हैं और उनके पिता तरुण गोगोई राज्य के सम्मानित मुख्यमंत्री रह चुके हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री सरमा गौरव गोगोई से डरते हैं, इसलिए उनके नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं.
चुनाव में असली मुद्दों पर बहस
कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया कि राज्य में ‘बांग्लादेशी’ जैसे मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है, जबकि असल मुद्दे विकास और रोजगार होने चाहिए. पार्टी का मानना है कि जनता इन मुद्दों को समझती है और चुनाव में इसका जवाब देगी.
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बताते चलें कि अब सबकी नजरें 9 अप्रैल पर टिकी हैं, जब जनता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेगी. यह चुनाव सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि असम के भविष्य की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है. चुनावी नतीजे यह भी तय करेंगे कि जनता विकास, बयानबाजी या किसी और मुद्दे को ज्यादा महत्व देती है.