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असम सरकार की पहल, 23 लाख परिवारों को भूमि अधिकार और सुरक्षा
मुख्यमंत्री के अनुसार, मिशन वसुंधरा के तहत 23 लाख से अधिक परिवार भूमि मालिक बन गए हैं, जिसे उन्होंने स्वदेशी समुदायों के लिए भूमि स्वामित्व सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है.
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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य सरकार ने स्वदेशी लोगों के भूमि अधिकारों को सुनिश्चित करके और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ बेदखली अभियान चलाकर "जाति, माटी, भेती" की रक्षा करने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा किया है.
"असम की जमीनें यहां के लोगों की हैं"
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, "जाति, मति, भेती' की रक्षा करने के अपने वादे पर खरा उतरते हुए, हमारी सरकार ने न केवल अतिक्रमणकारियों के चंगुल से जमीनें मुक्त कराई हैं बल्कि आजादी के बाद पहली बार स्वदेशी लोगों को भूमि अधिकार भी दिए हैं। असम की जमीनें यहां के लोगों की हैं, अतिक्रमणकारियों की नहीं."
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उन्होंने कहा कि सरकार की प्रमुख पहल, मिशन वसुंधरा ने राज्यभर में बड़ी संख्या में परिवारों को भूमि स्वामित्व अधिकार प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
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"23 लाख से अधिक परिवारों को भूमि अधिकार मिला"
मुख्यमंत्री के अनुसार, मिशन वसुंधरा के तहत 23 लाख से अधिक परिवार भूमि मालिक बन गए हैं, जिसे उन्होंने स्वदेशी समुदायों के लिए भूमि स्वामित्व सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है.
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इसके अतिरिक्त, लगभग 3.5 लाख चाय बागान परिवारों को "टी लाइन" भूमि के लिए भूमि पट्टे उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे भूमि स्वामित्व तक पहुंच का और विस्तार हो रहा है.
मुख्यमंत्री सरमा ने यह भी दोहराया कि सरकार के बेदखली अभियान का उद्देश्य अतिक्रमित भूमि को वापस लेना और पात्र लाभार्थियों विशेष रूप से स्वदेशी लोगों के बीच इसका पुनर्वितरण सुनिश्चित करना है.
भाजपा ने दिया "जाति, मति, भेती" का नारा
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भाजपा सरकार ने लगातार भूमि अधिकारों और स्वदेशी पहचान के संरक्षण को एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाया है, खासकर चुनावों से पहले। "जाति, मति, भेती" का नारा उसके प्रचार-प्रसार का मुख्य केंद्र रहा है, जो पहचान, भूमि और सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर देता है.
अधिकारियों ने कहा कि इन पहलों से महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है क्योंकि इससे उन हजारों परिवारों को कानूनी स्वामित्व और सुरक्षा प्रदान की जाएगी जिनके पास पहले औपचारिक भूमि दस्तावेज नहीं थे.
यह पोस्ट असम में राजनीतिक गतिविधियों में तेजी के बीच आई है, जहां विधानसभा चुनावों से पहले भूमि और पहचान के मुद्दे चुनावी चर्चा पर हावी हैं. 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 9 अप्रैल को होगा और वोटों की गिनती 4 मई को निर्धारित है.
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