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बंगाल में बदल जाएगा सत्ता का पता... ‘नबान्न’ से दूरी बनाएगी नई BJP सरकार, सामने आया नया प्लान

पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद राज्य सचिवालय को हावड़ा के नबान्न से वापस कोलकाता की ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग में शिफ्ट करने की तैयारी तेज हो गई है. शपथ ग्रहण के बाद यहीं से कामकाज शुरू हो सकता है.

बंगाल में बदल जाएगा सत्ता का पता... ‘नबान्न’ से दूरी बनाएगी नई BJP सरकार, सामने आया नया प्लान
Image Source: IANS
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार सिर्फ सत्ता परिवर्तन की चर्चा नहीं हो रही, बल्कि सरकार के कामकाज के केंद्र को लेकर भी बड़ी हलचल तेज हो गई है. बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब राज्य सचिवालय को लेकर बड़ा फैसला सामने आता दिख रहा है. करीब 13 साल तक सत्ता का केंद्र रहे ‘नबान्न’ को छोड़कर नई सरकार एक बार फिर ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग से शासन चलाने की तैयारी में है. यही वजह है कि कोलकाता के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों राइटर्स बिल्डिंग सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई है.

नबान्न से राइटर्स बिल्डिंग में शिफ्ट होने की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी सरकार बनने के बाद राज्य सचिवालय को हावड़ा स्थित नबान्न से वापस कोलकाता के बीबीडी बाग इलाके में मौजूद राइटर्स बिल्डिंग में शिफ्ट किया जा सकता है. बताया जा रहा है कि नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के तुरंत बाद प्रशासनिक कामकाज धीरे-धीरे यहीं से शुरू करने की योजना बनाई जा रही है.

बीजेपी नेताओं ने दिए बड़े संकेत

रिपोर्ट के अनुसार बुधवार को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कार्यवाहक मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने साफ संकेत दिया कि नई सरकार बनने के बाद सचिवालय को फिर से राइटर्स बिल्डिंग में ले जाया जाएगा. बीजेपी नेताओं का कहना है कि पार्टी लंबे समय से इस फैसले के पक्ष में रही है और 2021 से ही यह वादा लगातार किया जाता रहा है.

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राइटर्स बिल्डिंग का ऐतिहासिक महत्व

दरअसल, राइटर्स बिल्डिंग सिर्फ एक सरकारी दफ्तर नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीतिक और प्रशासनिक विरासत का सबसे बड़ा प्रतीक मानी जाती है. करीब ढाई सौ वर्षों तक यही इमारत बंगाल की सत्ता का केंद्र रही. अंग्रेजों के दौर से लेकर स्वतंत्र भारत तक पश्चिम बंगाल सरकार का पूरा प्रशासनिक तंत्र यहीं से संचालित होता था. लेकिन 2013 में ममता बनर्जी सरकार ने इसे अस्थायी तौर पर छोड़कर सचिवालय को हावड़ा स्थित नबान्न में शिफ्ट कर दिया था.

क्यों छोड़ी गई थी राइटर्स बिल्डिंग?

उस समय ममता सरकार ने राइटर्स बिल्डिंग की जर्जर स्थिति, आग और सुरक्षा से जुड़े खतरों का हवाला दिया था. सरकार ने इसके जीर्णोद्धार के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये भी मंजूर किए थे. ममता बनर्जी ने उस समय यहां तक कहा था कि यह इमारत बारूद के ढेर जैसी बन चुकी है और कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए अस्थायी रूप से सचिवालय को दूसरी जगह ले जाया जा रहा है. हालांकि इसके बाद मरम्मत का काम वर्षों तक चलता रहा, लेकिन सरकार की वापसी कभी नहीं हो सकी.

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बीजेपी क्यों मान रही इसे बड़ा प्रतीक?

अब बीजेपी इस पूरे मुद्दे को प्रतीकात्मक और राजनीतिक दोनों नजरिए से देख रही है. पार्टी नेताओं का मानना है कि राइटर्स बिल्डिंग बंगाल की असली प्रशासनिक पहचान है और सरकार को वहीं से चलाया जाना चाहिए. यही वजह है कि नई सरकार बनने से पहले ही यहां सुरक्षा और तैयारियों को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं.

सुरक्षा और तैयारियों का जायजा

बुधवार को कोलकाता पुलिस कमिश्नर अजय नंद ने भी राइटर्स बिल्डिंग का दौरा किया और सुरक्षा व्यवस्था के साथ नवीनीकरण कार्य का जायजा लिया. लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल इमारत के कुछ हिस्सों में काम लगभग पूरा हो चुका है. खासतौर पर ब्लॉक 1 और ब्लॉक 2 को जल्द उपयोग के लिए तैयार माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि नया मुख्यमंत्री कार्यालय दूसरी मंजिल पर बनाया जा सकता है, जहां अधिकांश काम पूरा हो चुका है.

जीर्णोद्धार का काम अब भी अधूरा

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हालांकि पूरी इमारत का नवीनीकरण अब भी अधूरा है. वर्षों पहले पुनर्निर्माण के दौरान इमारत के बीच बने दो एनेक्सी ब्लॉक्स को तोड़ दिया गया था, जिसके बाद कार्यक्षेत्र पहले से कम हो गया. बावजूद इसके अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय समेत आठ से दस विभाग आसानी से यहां से काम कर सकते हैं.

250 साल पुरानी विरासत

गौर करने वाली बात यह भी है कि राइटर्स बिल्डिंग सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी बेहद खास मानी जाती है. वर्ष 1777 में बनी इस लाल इमारत को थॉमस लियोन ने डिजाइन किया था. यह इमारत ब्रिटिश शासन, स्वतंत्रता आंदोलन और आधुनिक बंगाल की राजनीति की गवाह रही है.

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बताते चलें कि अब बीजेपी सरकार अगर वास्तव में यहां लौटती है, तो यह सिर्फ सचिवालय बदलने का फैसला नहीं होगा, बल्कि बंगाल की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत के तौर पर भी देखा जाएगा. फिलहाल सबकी नजर नई सरकार और उसके पहले बड़े फैसले पर टिकी हुई है.

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