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जब चक्रवात ‘भोला’ ने ली 5 लाख लोगों की जान, अर्नब से पहले तबाही मचाने वाले Cyclone का इतिहास
साइक्लोन ‘भोला’ नाम से भले ही भोला हो लेकिन यह किसी दैत्य से कम नहीं था. साल 1970 में बंगाल की खाड़ी से उठे इस तूफान ने तीन देशों को अपनी चपेट में लिया.
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चक्रवात अर्नब (Cyclone Arnab) ने ओडिशा और आंध्र प्रदेश में कई जगह तबाही मचानी शुरू कर दी है. ओडिशा के कई जिलों में बाढ़ आ गई. सबसे ज्यादा प्रभावित गंजाम, गजपति और कंधमाल जिले हैं. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी तटीय इलाकों में असर दिख रहा है. हालांकि अपने पीक पर पहुंचने के बाद साइक्लोन अर्नब कम दबाव के क्षेत्र में बदल गया, लेकिन इससे बचने के लिए देश के कई राज्यों में व्यापक तैयारियां की गई थी. अर्नब से पहले देश और दुनिया ऐसे कई तूफानों का गवाह बनी जिन्होंने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई. आज बात सदी के सबसे खतरनाक साइक्लोन की. इसमें सबसे ऊपर नाम है साइक्लोन ‘भोला’ का. जानते हैं इसका पूरा इतिहास.
यह साल था 1970 और महीना था नवंबर. जब बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न हुआ साइक्लोन भोला. यह साइक्लोन नाम से भले ही भोला हो लेकिन यह किसी दैत्य से कम नहीं था. 12-13 नवंबर को तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) और भारत के कुछ हिस्सों पर टकराया. इस तूफान की चपेट में आने से 3 से 5 लाख लोग मारे गए थे. जिसका मुख्य कारण स्टॉर्म सर्ज यानी विशाल समुद्री लहरें थीं. इसे विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने सबसे घातक तूफान में दर्ज किया था.
तबाही का मुख्य कारण इस तूफान की तीव्रता रही. साइक्लोन ‘भोला’ इतनी तेजी से आया कि लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला. यह कम दबाव के क्षेत्र के रूप में विकसित हुआ था. वहीं, ‘भोला’ तूफान रात के समय में टकराया था. जिससे घनी आबादी वाले इलाकों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा.
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कैसे तय होता है साइक्लोन का नाम
किसी भी तूफान या चक्रवात का नाम एक पूरी प्रक्रिया के तहत रखा जाता है. इसके लिए कई नामों की लिस्ट तैयार होती है. जिसे विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और एशिया-प्रशांत आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) का पैनल ऑन ट्रॉपिकल साइक्लोन्स तैयार करता है.
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अप्रैल 2020 में नामों की सूची तय करने के लिए उत्तरी हिंद महासागर में आने वाले चक्रवातों के नाम तय करने के लिए 13 देशों की लिस्ट तैयार की गई थी. इनमें,
- भारत
- बांग्लादेश
- पाकिस्तान
- म्यांमार
- कतर
- श्रीलंका
- मालदीव
- ईरान
- UAE
- कतर
- श्रीलंका
- थाईलैंड
- यमन
हर देश एक नाम सुझाता है जिसे अंतर्राष्ट्रीय प्रक्रिया के तहत चुना जाता है. IMD दुनिया के 6 RSMC में से एक है और इस क्षेत्र के चक्रवातों के नामकरण और सलाह देने का जिम्मेदार है.
कोई भी नाम किसी खास देश के तट पर आने वाले तूफान के आधार पर नहीं चुना जाता, जो अगला नाम सूची में है, वही दिया जाता है.
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नाम कब दिया जाता है?
जब हवा की रफ्तार 34 नॉट (लगभग 62 किमी/घंटा) या उससे ज्यादा हो जाए (यानी यह साइक्लोनिक स्टॉर्म बन जाए), तब IMD उसे सूची से अगला नाम देता है. एक बार इस्तेमाल होने के बाद नाम फिर से नहीं लिया जाता (अटलांटिक क्षेत्र की तरह रिटायरमेंट का अलग सिस्टम नहीं है, लेकिन नाम रिपीट नहीं होते).
नाम चुनते समय यह भी ध्यान रखा जाता है कि वह छोटा हो, 8 से ज्यादा अक्षर नहीं होने चाहिए और जिसको बोलने में आसानी हो, इन बातों का खास ध्यान रखा जाता है. इस दौरान यह भी ध्यान रखा जाता है कि साइक्लोन का नाम राजनीति, धर्म, संस्कृति, लिंग या किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस न पहुंचाने वाला न हो.
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नाम देने के पीछे कारण यह होता है कि एक साथ कई तूफान सक्रिय हो सकते हैं. ऐसे में नाम से भ्रम कम होता है, चेतावनियां आसानी से समझ और याद रहती हैं और आपदा प्रबंधन में मदद मिलती है.
अर्नब नाम के पीछे की कहानी
‘अर्नब’ बंगाली भाषा में आमतौर पर ‘समुद्र’ या ‘महासागर’ से जुड़ा माना जाता है. यानी इस नाम का समुद्र से सीधा संबंध है. बाद में इसे विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) और संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग फॉर एशिया एंड द पैसिफिक (ईएससीएपी) ने चक्रवातों की सूची में शामिल किया. रिपोर्ट के मुताबिक, इस चक्रवात का नाम का सुझाव बांग्लादेश ने दिया था.
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इन राज्यों में ‘अर्नब’ का असर
ओडिशा
- चक्रवात अर्नब ने सबसे ज्यादा ओडिशा को प्रभावित किया है
- बाढ़, लैंडस्लाइड और नदियों का जलस्तर बढ़ा
- गंजाम और गजपति जिलों में बचाव और राहत कार्य तेज
- हजारों लोग प्रभावित, कई घर, सड़कें और खेत बर्बाद
- सड़कें और पुल बह जाने के कारण कई इलाके कट गए
अधिकारियों के अनुसार, गंजाम जिले के 22 ब्लॉकों के 299 गांव और गजपति जिले के 7 ब्लॉकों के 711 गांव बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. गंजाम में लगभग 42,500 लोग और गजपति में 20,000 लोग प्रभावित हुए हैं.
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एनडीआरएफ,ओडीआरएएफ और फायर सर्विस के जवानों ने गंजाम से 11,882 लोगों और गजपति से 17,441 लोगों को सुरक्षित निकालकर बाढ़ और चक्रवात आश्रय स्थलों (शेल्टर) में पहुंचाया है. गंजाम में अभी भी 70 गांवों के 2,328 लोग फंसे हुए हैं.
फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए भारतीय तटरक्षक बल (इंडियन कोस्ट गार्ड) के हेलीकॉप्टरों की मदद से एयरलिफ्ट किया जा रहा है.
आंध्र प्रदेश
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चक्रवात अर्नब से आंध्र प्रदेश में सात लोगों की मौत हो गई. शुरुआती अनुमान के मुताबिक, 4,600 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने बताया कि चक्रवात से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीमें शुक्रवार को राज्य का दौरा करेंगी.
अर्नब के कमजोर होने के बावजूद मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत 14 राज्यों में आंधी-बारिश दर्ज की गई. मौसम विभाग (IMD) ने अगले दो दिन के लिए इन राज्यों में रेड-ऑरेंज अलर्ट जारी किया है.
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