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दिल्ली कूच पर निकले किसान, दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर लगा भारी जाम, अलर्ट पर पुलिस
हज़ारों की संख्या में किसान अपनी माँगो को लेकर दिल्ली की ओर कूच कर रहे हैं. जिसकी वजह से दिल्ली नोएडा बॉर्डर पर भारी जाम लग गया है. पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड़ में आ गया है बताया जा रहा है कि अपनी 5 सूत्रीय मांगों को लेकर किसान सड़कों पर उतरे हैं. और बीते कुछ दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रशासन के साथ कई दौर की बैठक कर चुके है
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क्या देश को दहलाने की बड़ी साज़िश रची जा रही है। क्या किसानों के नाम पर टूलकिट गैंग काम पर चल पड़ी है ताकी मोदी सरकार के साथ साथ योगी सरकार को निशाना बना सके। ये बात इसलिए उठ रही है। क्योंकि एक बार फिर बड़ी संख्या में किसान दिल्ली बॉर्डर की और टूट पड़े हैं। संसद के घेराव की तैयारी में जुट गए हैं। हैरानी की बात तो ये है कि किसान बवाल पर तब उतरे हैं जब इनकी माँगों को लेकर सरकार के साथ लगातार बातचीत चल रही है। बैठक पर बैठक चल रही है। बावजूद उसके भी किसानों ने सुबह सुबह दिल्ली नोएडा बॉर्डर पर हंगामा काटते हुए जाम लगा दिया। ना सिर्फ़ सरकार को चुनौती देने की कोशिश की। बल्कि आम जनता को भी परेशानी दी।जिसको देखते हुए शासन प्रशासन भी तुरंत अलर्ट मोड़ में आ गया है।
किसानों के प्रदर्शन को देखते नोएडा से सटे सभी बॉर्डर पर बैरिकेटिंग की गई है। कई किसान नेताओं को नज़रबंद किया जा रहा है। भारी जाम की वजह से लोगों को मेट्रो इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है। किसानों को रोकने के लिए पुलिस मुस्तैद की गई है।
मोदी सरकार से लेकर योगी सरकार तक किसानों की एक एक गतिविधि पर नज़र बनाए हुए हैं। ताकी 2021 में 26 जनवरी जैसा बवाल दोबारा ना भड़काया जा सके। तो आगे कुछ बताए या समझाएँ। उससे पहले वो पांच वजह बताते हैं जिनकी वजह से किसान मोर्चा खोलते हुए बिना किसी को सूचना दिए दिल्ली नोएडा बॉर्डर पर दौड़ पड़े।
क्या है किसानों की 5 सूत्रीय मांगे ?
पुराने भूमि अधिग्रहण क़ानून के तहत प्रभावित किसानों को 10 प्रतिशत प्लॉट और 64.7 प्रतिशत बढ़ा हुआ मुआवज़ा मिले। 1 जनवरी 2014 के बाद अधिग्रहण भूमि पर बाज़ार दर का चार गुना मुआवज़ा और 20 प्रतिशत प्लॉट दिया जाए। सभी भूमिधर और भूमिहीन किसानों के बच्चों को रोज़गार और पुनर्वास लाभ भी मिले। हाई पावर कमेटी द्वारा पास किए गए मुद्दों पर सरकारी आदेश जारी किया जाए। आबादी वाले क्षेत्र का उचित निस्तारण किया जाना चाहिए।
तो अपनी इन माँगों को लेकर किसान लगातार सरकार के संपर्क में थे। आला अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। हालही में संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारियों की नोएडा अथॉरिटी, पुलिस और जिला प्रशासन के उच्चाधिकारियों के साथ बैठक हुई। ये बैठक क़रीब 3 घंटे तक चली। लेकिन बेनतीजा रही। किसानों मानने को तैयार ही नहीं हुए। जिसके बाद सरकार को चुनौती देते हुए भारतीय किसान परिषद ने किसान मज़दूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा जैसे कई अन्य किसान संगठनों के साथ मिलकर घोषणा कर दी कि वो दिल्ली कूच करेंगे ।संसद का घेराव करेंगे। हालांकि किसान अपनी किसी भी साज़िश को अंजाम दे पाते। उससे पहले ही पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड़ में आ गया।
अब सवाल यही है कि जब सरकार बातचीत के लिए तैयार है तो आख़िर क्यों बार बार किसान छूटते ही संसद के घेराव की धमकी देते है। और सड़कों पर जाम लगाने निकल पड़ते हैं। जबकि इस वक़्त संसद का सत्र रच रहा है तो मामला काफ़ी संवेदनशील हो जाता है। ऐसे में अब सवाल उठता है कि क्या इस किसान आंदोलन के पीछे किसी की साज़िश है। क्या लगातार किसानों को कोई भड़का रहा है। या फिर देश में कुछ बड़ा करने की कोशिश हो रही है। क्योंकि 26 जनवरी 2021 का वो दिन भी याद होगा ही जब किसान प्रदर्शन कर रहे थे। और देखते ही देखते ट्रेक्टर लेकर संसद के घेराव के लिए निकल पड़े। लाल क़िले की प्राचीर से तिरंगा हटाकर धार्मिक झंडा फहरा दिया। काफ़ी तोड़फोड़ बवाल मचाया गया। मोदी सरकार को गिराने। और बदनाम करने की साज़िश रची गई। आख़िर में सरकार ने सख़्ती दिखाते हुए आगे कदम बढ़ाया।साज़िशकर्ता की कमर तोड़ने का काम किया। और एक बार फिर उसी तरह की साज़िश रचने की कोशिश की जा रही है। जिससे निपटने के लिए सरकार तैयार हो गईं है।
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