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BJP विपक्ष में होती तो क्या धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगती? केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने दिया ऐसा जवाब, जिसे सुनकर हैरान रह जाएंगे!
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि किसी मंत्री या उसके कार्यालय की गलती होने पर मंत्री जिम्मेदार होता है. लेकिन CBSE और NTA जैसी स्वायत्त संस्थाओं में किसी गड़बड़ी की स्थिति में जवाबदेही संबंधित संस्था की होती है, क्योंकि मंत्रालय उनका रोजमर्रा का संचालन नहीं करता.
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देश में इन दिनों NEET परीक्षा, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है. छात्रों, अभिभावकों और विभिन्न संगठनों के बीच नाराजगी का माहौल देखने को मिल रहा है. सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है. इसी बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का एक बयान राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ गया है.
दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू के दौरान केंद्रीय मंत्री रिजिजू से पूछा गया कि अगर आज भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में होती, तो क्या वह भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करती. इस सवाल पर उन्होंने विस्तार से अपनी बात रखते हुए सरकार और विपक्ष की राजनीति के बीच अंतर समझाने की कोशिश की.
मंत्री की जवाबदेही पर क्या बोले रिजिजू?
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इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में किरेन रिजिजू ने कहा कि किसी भी मामले में जिम्मेदारी तय करने से पहले यह देखना जरूरी है कि गलती कहां हुई है. उनके मुताबिक, यदि किसी मंत्री या उसके कार्यालय की ओर से कोई गलत काम या धोखाधड़ी होती है, तो मंत्री सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि CBSE और NTA जैसी संस्थाएं स्वायत्त संस्थाएं हैं. इनका रोजमर्रा का संचालन मंत्रालय सीधे नहीं करता. रिजिजू ने कहा कि अगर किसी स्वायत्त संस्था में कोई समस्या सामने आती है, तो सबसे पहले उसी संस्था की जवाबदेही तय की जानी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि जब बीजेपी विपक्ष में थी, तब अक्सर मंत्रियों पर भ्रष्टाचार, घोटालों या कमीशनखोरी के आरोप लगते थे. लेकिन पिछले कई वर्षों में केंद्र सरकार के किसी मंत्री पर इस तरह के सीधे आरोप नहीं लगे हैं. इसलिए वर्तमान परिस्थितियों की तुलना पुराने राजनीतिक दौर से करना उचित नहीं होगा.
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कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर भी दिया जवाब
इंटरव्यू के दौरान रिजिजू से कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP को लेकर भी सवाल पूछा गया. हाल के दिनों में यह संगठन सोशल मीडिया और कुछ प्रदर्शनों के कारण चर्चा में रहा है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी को भी राजनीतिक दल बनाने का अधिकार है. लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं का मजाक उड़ाना या व्यवस्था को कमजोर करना सही नहीं माना जा सकता. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि CJP अगर किसी के लिए चुनौती है तो वह कांग्रेस है, इसलिए चिंता भी कांग्रेस को ही करनी चाहिए.
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कांग्रेस शुरू करेगी देशव्यापी अभियान
दूसरी तरफ कांग्रेस ने NEET, पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला किया है. पार्टी का कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल के अनुसार, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 17 जून से इस अभियान की शुरुआत करेंगे. पहला छात्र सम्मेलन राजस्थान के कोटा में आयोजित होगा. इसके बाद इलाहाबाद, पटना और दिल्ली में भी बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जहां छात्रों और युवाओं से संवाद किया जाएगा.
बेंगलुरु में हुआ विरोध प्रदर्शन
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इस बीच कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में भी NEET विवाद को लेकर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. बड़ी संख्या में युवा फ्रीडम पार्क में एकत्र हुए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों का भरोसा प्रभावित किया है. आंदोलन में अभिनेता प्रकाश राज समेत कई सामाजिक और छात्र संगठनों ने भी हिस्सा लिया.
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बताते चलें कि प्रदर्शन के दौरान यह मांग उठाई गई कि आने वाले भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए नए नियम लागू किए जाएं. फिलहाल NEET विवाद सिर्फ शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक बहस का भी बड़ा विषय बन चुका है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत और तेज होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं.