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वाराणसी मदरसे में महिलाओं ने ईरान की मदद में जुटाया चंदा, अमेरिका पर जताई नाराज़गी

अमेरिका के लगातार हमलों को लेकर उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसा करता ही रहेगा, लेकिन इंशाअल्लाह ईरान डटा हुआ है. पूरी दुनिया देख रही है कि ईरान मजबूती से खड़ा है. उन्होंने कहा कि हमारे खामेनेई ने जो मकसद छोड़ा है, इंशाअल्लाह उनका बेटा उसे पूरा करेगा.

Image Credits: NMF News
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अमेरिका, ईरान और इज़रायल के बीच चल रहे युद्ध को लेकर देशभर से अलग-अलग तस्वीरें सामने आ रही हैं. ऐसे में आज वाराणसी के एक मदरसे से एक तस्वीर सामने आई है, जिसमें महिलाओं द्वारा ईरान की मदद के लिए चंदा इकट्ठा किया जा रहा है.

मुस्लिम महिलाओं ने ईरान की मदद के लिए इकट्ठा किया चंदा

तनवीर फ़ातिमा, जिन्हें लोग "नेताइन आंटी" भी कहते हैं, ने बताया कि यह सब उनके नेतृत्व में हो रहा है. उन्होंने कहा कि सभी बच्चियाँ और महिलाएँ इसमें जुटी हैं. हमने सिर्फ एक बात कही है कि यह जज़्बे मोहब्बत का इज़हार है. ईरान किसी का मोहताज नहीं है.

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खुदा न करे कि अमेरिका लगातार हमला करे. इस पर तनवीर फ़ातिमा ने कहा कि अमेरिका लगातार हमला कर रहा है, वह गद्दार है और ऐसा ही करेगा. उन्होंने बताया कि जो पैसा इकट्ठा किया जा रहा है, वह कैंप के माध्यम से ईरान तक पहुँचाया जाएगा.

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किसी ने 10,000 तो किसी ने 5000 देकर की मदद

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उन्होंने यह भी बताया कि इस चंदे में सभी ने सहयोग दिया है. किसी ने 10,000 रुपये, किसी ने 5,000 रुपये, किसी ने 1,000 रुपये, और किसी बच्ची ने 100 रुपये दिए हैं. सबने मिलकर यह नज़राना ईरान के नाम पेश किया है. हम चाहते हैं कि ईरान को मदद मिले और वह कामयाब हो.

अमेरिका के लगातार हमलों को लेकर उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसा करता ही रहेगा, लेकिन इंशाअल्लाह ईरान डटा हुआ है. पूरी दुनिया देख रही है कि ईरान मजबूती से खड़ा है. उन्होंने कहा कि हमारे खामेनेई ने जो मकसद छोड़ा है, इंशाअल्लाह उनका बेटा उसे पूरा करेगा.

खामेनेई की मौत पर उन्होंने कहा कि लोग अगर विरोध कर रहे हैं तो करने दें. कल सच्चाई उनके सामने आएगी, तब उन्हें समझ में आएगा. कुछ लोग उन्हें आतंकवादी कहते हैं, लेकिन सच यह है कि आतंकवादी जान लेते हैं, देते नहीं.

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"आतंकवाद का कोई धर्म या मजहब नहीं होता"

उन्होंने कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म या मजहब नहीं होता, उसमें सिर्फ हिंसा होती है. खुमैनी से लेकर खामेनेई तक का रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए, किसी ने जंग या ज़ुल्म नहीं किया.

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अंत में उन्होंने कहा कि हमारे पास ज्यादा कुछ नहीं है. मेरे पास एक मकान है, अगर ज़रूरत पड़ी तो हम उसे भी बेचकर ईरान की मदद करेंगे.

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