Advertisement

Loading Ad...

पार्टी में मची कलह के बीच अपने खाते फ्रीज क्यों करना चाहती है TMC? करोड़ों का मसला, बैंक को लिखा लेटर

पश्चिम बंगाल में TMC का आंतरिक संकट अब पार्टी की वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच गया है. पूर्व मंत्री अरूप विश्वास ने एक निजी बैंक को पत्र लिखकर पार्टी के बैंक खाते से किसी भी तरह के लेनदेन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है.

Image Source- IANS/Video Grab
Loading Ad...

तृणमूल कांग्रेस में बड़े पैमाने पर हुई बगावत के बाद पार्टी को अब अपने पैसे-टके की चिंता सता रही है. TMC के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अरूप विश्वास ने एक निजी बैंक को पत्र लिखकर पार्टी के बैंक खातों के संचालन पर रोक लगाने की मांग की है. 

अपने अस्तित्व के संकट का सामना कर रही है TMC के लिए अब अपने खातों को बचाना भी बड़ी चुनौती बन गई है. इसीलिए पार्टी नेता अरूप विश्वास ने कोलकाता में HDFC बैंक में पार्टी के खातों को फ्रीज करने की मांग की है. 

बैंक से क्या मांग की गई? 

Loading Ad...

सूत्रों के अनुसार, TMC के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने बैंक को पत्र लिखकर खातों के ट्रांजैक्शन और एक्टिविटी को रोकने की मांग की है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे लेटर में सामने आया कि अरूप विश्वास ने कोलकाता में बैंक शाखा में संपर्क कर खातों को फ्रीज करने की मांग की है. 

Loading Ad...

इस कथित पत्र में, TMC के कोषाध्यक्ष के रूप में अरूप विश्वास ने बैंक से कहा है कि विवाद के समाधान तक किसी भी डेबिट ट्रांजैक्शन या खाते के संचालन संबंधी अधिकारों में बदलाव की अनुमति न दी जाए. 

अरूप बिस्वास ने बैंक से अनुरोध किया है कि पार्टी के नेतृत्व और नियंत्रण को लेकर जारी विवाद के समाधान तक खाते से निकासी और अन्य डेबिट लेनदेन पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखी जाए. 

Loading Ad...

यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विधानसभा चुनाव में हार के बाद 5 जून को TMC ने संगठनात्मक फेरबदल करते हुए पूर्व सांसद सुभाषिष चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया था. हालांकि, बैंक को भेजे गए अपने पत्र में अरूप बिस्वास ने दावा किया है कि वह अब भी पार्टी के वैध कोषाध्यक्ष हैं. 

चुनाव आयोग को सौंपे गए ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, TMC के इस बैंक खाते में लगभग 675 करोड़ रुपये जमा हैं. अरूप विश्वास का पत्र 12 जून को लिखा गया था, जो बैंक को 16 जून को मिला. 

पार्टी के अधिकार और नियंत्रण पर चल रहा विवाद

Loading Ad...

अपने पत्र में बिस्वास ने कहा कि पार्टी के भीतर विभिन्न गुट खुद को TMC का वैध प्रतिनिधि और पदाधिकारी बता रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट नहीं है कि बैंक खाते का संचालन करने का अधिकार किसके पास है. उन्होंने बैंक से अपील की कि किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति को खाते से निकासी या अन्य लेनदेन की अनुमति न दी जाए और पहले से हस्ताक्षरित चेकों के संभावित दुरुपयोग को भी रोका जाए. 

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए सुभाषिष चक्रवर्ती ने कहा कि उन्हें इस पत्र की जानकारी नहीं है. उन्होंने दावा किया कि वह राज्य संगठन के कोषाध्यक्ष हैं, जबकि अरूप बिस्वास अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के कोषाध्यक्ष थे. जब उनसे पूछा गया कि क्या राज्य और अखिल भारतीय संगठन के अलग-अलग बैंक खाते हैं, तो उन्होंने कहा कि पार्टी का केवल एक ही बैंक खाता है.

विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC में आंतरिक कलह लगातार बढ़ती जा रही है. पार्टी फिलहाल तीन गुटों में बंटी नजर आ रही है- एक गुट बागी विधायकों का, दूसरा बागी सांसदों का और तीसरा ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट. 

Loading Ad...

यह भी पढ़ें-‘हमारे बाप का नाम बाला साहेब ठाकरे है…’ बागियों को संजय राउत की सीधी चेतावनी, क्या एक्शन लेगी शिवसेना? खुद बताया

सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तिदार समर्थक सांसदों का गुट, जिसने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय किया है, TMC के चुनाव चिह्न पर दावा करने की कोशिश जारी रखने की बात कह चुका है। वहीं, विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के समर्थक विधायक खुद को ‘असली तृणमूल’ बता रहे हैं. 

ममता बनर्जी के करीबी हैं अरूप विश्वास

Loading Ad...

अरूप बिस्वास का यह कदम इसलिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मौजूदा बगावत के दौरान उन्हें ममता बनर्जी का करीबी माना जाता रहा है. हालांकि 5 जून के संगठनात्मक फेरबदल में उन्हें कोषाध्यक्ष पद से हटा दिया गया था, लेकिन पार्टी महासचिव के रूप में बरकरार रखा गया था. 

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...