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‘हम एक ही कश्ती के मुसाफिर, साथ तैरेंगे, साथ…’ मोदी के ‘धुरंधर’ डोभाल ने मुस्लिमों से ऐसा क्यों कहा, जानें मायनें
अजीत डोभाल ने कहा, हमें अपनी पहचान को सिर्फ एक धार्मिक दायरे तक सीमित नहीं करना चाहिए. पिछले 12 साल में बड़ी संख्या में सेना और अर्ध्दसैनिक बलों में मुस्लिम युवकों की भर्ती हुई है.
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भारत के ‘धुरंधर’ कहे जाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित पवार ने 18 अप्रैल कोे एक अहम बैठक की थी. यह बैठक प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई थी. इसकी खास बात ये थी कि इसमें केवल मुस्लिम समुदाय के चुनिंदा लोग थे. बैठक में अजित डोभाल ने समुदाय को संबोधित करते हुए बड़ी बात कही.
NSA अजित डोभाल ने मीटिंग में भारत के हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों को एक ही नाव की सवारी बताया. अजित डोभाल ने कहा, हिंदू और मुस्लिम एक ही जहाज के मुसाफिर हैं. हम या तो साथ तैरेंगे या साथ में डूबेंगे.
NSA और मुस्लिम समुदाय की मीटिंग का क्या था मकसद?
अजित डोभाल के साथ मीटिंग में पारंपरिक वोट बैंक या राजनीति को लेकर कोई बात नहीं हुई. इस मीटिंग का मकसद मुस्लिम समुदाय के विकास, शिक्षा और उद्यमिता पर फोकस था.
वैसे तो अजित डोभाल के स्पीच का ज्यादातर हिस्सा अंग्रेजी में था, लेकिन इसमें उन्होंने उर्दू का टच भी दिया. मुस्लिम समुदाय से कनेक्ट करने का NSA डोभाल की इस पहल की काफी तारीफ भी हो रही है. स्पीच के बीच डब डोभाल ने कहा, ‘हिंदू और मुसलमान एक ही जहाज पर सवार हैं, हम या तो साथ तैरेंगे या साथ डूबेंगे.’ इस लाइन ने मीटिंग में मौजूद लोगों का दिल जीत लिया.
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बैठक में अजित डोभाल ने मुस्लिमों की समानता और अधिकार और सामाजित सहभागिता पर पर भी बात की. उन्होंने कहा, पिछले 12 साल में बड़ी संख्या में सेना और अर्ध्दसैनिक बलों में मुस्लिम युवकों की भर्ती हुई है. उनका कहना था कि ये इस बात का संकेत है कि भारत में किसी समुदाय के खिलाफ कोई संस्थागत भेदभाव नहीं है. NSA डोभाल ने कहा,
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‘हमें अपनी पहचान को सिर्फ एक धार्मिक दायरे तक सीमित नहीं करना चाहिए. हर भारतीय की पहचान बहुस्तरीय होती है और धर्म, संस्कृति, पेशा, भाषा सब मिलकर हमारी पहचान बनाते हैं.’
उन्होंने कहा, ‘सरकारी नौकरियों में सफलता न मिलने के पीछे कई कारण हो सकते हैं और यह भेदभाव नहीं बल्कि आर्थिक तौर तालीम में पिछड़ा होना भी हो सकता है. जब कोई व्यक्ति खुदको एक पहचान तक सीमित कर लेता है तो अलगाव और भ्रम पैदा हो सकता है.’
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इस मुस्लिम डेलिगेशन का नेतृत्व कर रहे नेतृत्व प्रसिद्ध शिक्षाविद् और व्यवसायी जफर सरेशवाला ने कहा, हम नए भारत का हिस्सा हैं.
मीटिंग में कौन-कौन हुआ शामिल?
NSA डोभाल के साथ मीटिंग में शामिल मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल में शिक्षा जगत से लेकर उद्यमी शामिल थे.
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- कौसर जहां- अध्यक्ष, भारतीय हज समिति
- जफर सरेशवाला- शिक्षाविद् और व्यवसायी
- फारुक पटेल- चेयरमैन, केपी ग्रुप
- इनामुल राकी- CMD, जर्मन स्टील कंपनी (1 बिलियन डॉलर टर्नओवर)
- इबरार इराकी- कार्यकारी निदेशक, जर्मन स्टील लिमिटेड
- जुनैद शरीफ- CEO, निटोन वाल्व्स लिमिटेड
- अल्ताफ सादिकोट- वरिष्ठ पदाधिकारी, दाऊदी बोहरा जमात
- नईमा खातून- कुलपति, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
- समीना शेख - जूम टीवी (मीडिया)
- सहर भामला - पर्यावरण कार्यकर्ता
- डॉ. निशात हुसैन- एम्स (AIIMS) की गोल्ड मेडलिस्ट डॉक्टर
- डॉ. जहीर काजी - अध्यक्ष, अंजुमन-ए-इस्लाम (प्रमुख शैक्षणिक संस्थान)
- जफर एम. लारी- जीएलएस स्विचगियर्स लिमिटेड
- हाजी रयामा- कच्छ (गुजरात) से प्रतिनिधित्व
देश की सीमाओं पर सुरक्षा के भरोसे की बाड़ बनाने वाले NSA डोभाल देश के अंदर भी हर समुदाय को सशक्त, आत्मनिर्भर और आत्मविश्वास से भर रहे हैं. मुस्लिम समुदाय के साथ अजित डोभाल की मीटिंग न केवल देश की एकता को मजबूत करने वाली थी, बल्कि ये भी दर्शाया गया कि मुस्लिम समुदाय केवल वोट बैंक के लिए राजनीतिक मोहरा नहीं है. उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर समाज के हर क्षेत्र में उनकी भागीदारी जरूरी है.