'अगर घुसपैठ-धर्मांतरण पर एक्शन हेट स्पीच है तो ये भी सही...', उत्तराखंड में UCC की पहली वर्षगांठ, CM धामी का धांसू बयान वायरल
उत्तराखंड में UCC के लागू हुए एक साल हो गए हैं. इस अवसर पर सीएम धामी का एक धांसू बयान वायरल हो रहा है, जिसमें वो कह रहे हैं कि अगर घुसपैठ-धर्मांतरण पर एक्शन हेट स्पीच है तो ये उन्हें स्वीकार्य है.
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उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) कानून के लागू हुए एक साल हो गए हैं. UCC की वर्षगांठ पर इसे 'समान नागरिक संहिता दिवस' के रूप में मनाया जा रहा है. इस अवसर पर मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से शुरू हुई यह ऐतिहासिक पहल सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि समानता, पारदर्शिता और सामाजिक समरसता की एक सशक्त नींव है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य महिलाओं को उनके वैधानिक अधिकारों में पूर्ण समानता दिलाना है. यह व्यवस्था विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषयों में महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करते हुए उन्हें समान और न्यायसंगत अधिकार सुनिश्चित करती है."
उन्होंने लिखा, "पिछले एक साल में यूसीसी के अंतर्गत विवाह पंजीकरण और नागरिक सेवाओं में उल्लेखनीय तेजी आई है. राज्य सरकार की ओर से 23 भाषाओं में सहायता और एआई-आधारित सपोर्ट की सुविधा के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि हर नागरिक इस सकारात्मक परिवर्तन का लाभ उठा सके."
"अगर धर्मांतरण-घुसपैठ पर कार्रवाई हेट स्पीच है, तो स्वीकार्य"
वहीं गणतंत्र दिवस पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री धामी ने देवभूमि में एक साजिश के तहत की जा रही डेमोग्राफी चेंज की कोशिशों और घुसपैठ-धर्मांतरण की समस्या से निपटने को लेकर जारी अभियान में और तेजी लाने का ऐलान किया. उन्होंने इस दौरान कहा कि देवभूमि के मूल स्वरूप के लिए आवाज़ बुलंद करना है हेट स्पीच है क्या? साजिशकर्ताओं को आगाह कर देना चाहता हूं कि उनके इन हथकंडों से हम रुकेंगे नहीं बल्कि घुसपैठियों के विरुद्ध अभियान और तेज करेंगे..
बीते साल लागू हुआ था UCC कानून
इससे पहले, सोमवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून में एक अहम संशोधन किया गया. राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश-2026 को मंजूरी दी.
क्या है उत्तराखंड का UCC?
इसमें, आपराधिक प्रक्रिया संहिता-1973 के स्थान पर अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 और दंडात्मक प्रावधानों के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 को लागू किया गया है. धारा 12 के अंतर्गत सचिव के स्थान पर अपर सचिव को सक्षम प्राधिकारी नामित किया गया है.
क्या-क्या हैं प्रावधान?
संसोधन के जरिए विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत जानकारी को विवाह निरस्तीकरण का आधार बनाया गया है. विवाह और लिव-इन संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी व विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं. लिव-इन संबंध की समाप्ति पर पंजीयक की ओर से समाप्ति प्रमाण पत्र जारी किए जाने का प्रावधान किया गया है.
अनुसूची-2 में 'विधवा' शब्द के स्थान पर 'जीवनसाथी' शब्द का प्रतिस्थापन किया गया है. विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध और उत्तराधिकार से संबंधित पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति पंजीयक जनरल को प्रदान की गई है.
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