Advertisement
एक ही पल में थम गई दुनिया... जिस दिन बड़े बेटे ने पहनी वर्दी, उसी दिन छोटे बेटे ने तिरंगे में ली अंतिम विदाई
Baghpat News: बागपत जिले से आई यह घटना दिल को झकझोर देने वाली है.. यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है , बल्कि जिंदगी की उस सच्चाई को भी दिखाती है, जहां कभी -कभी खुशियां और गम एक साथ दरवाजे पर आ खड़े होते हैं.
Advertisement
देश की सेवा के लिए कई जवानों ने अपनी जान गवाई है लेकिन यूपी के बागपत जिले से आई यह घटना दिल को झकझोर देने वाली है.. यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है , बल्कि जिंदगी की उस सच्चाई को भी दिखाती है, जहां कभी -कभी खुशियां और गम एक साथ दरवाजे पर आ खड़े होते हैं. जिस दिन एक ही घर में बेटे की सफलता का जश्न मनाया जा रहा था , उसी दिन उसी घर पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा...
देश सेवा करते हुए बेटे की दर्दनाक मौत
छपरौली क्षेत्र के लूम्ब गांव के रहने वाले सोहित चौहान, जो अग्निवीर के रूप में भारतीय सेना में शामिल हुए थे, अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान एक हादसे का शिकार हो गए. बर्फीले तूफान के बीच अचानक एक पेड़ गिर गया और उसकी चपेट में आकर सोहित बुरी तरह घायल हो गए.. हादसा इतना गंभीर था कि उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया. यह खबर जैसे ही गांव और परिवार तक पहुंची, हर तरफ सन्नाटा छा गया.
Advertisement
मेहनत से बनाई थी अपनी पहचान
Advertisement
सोहित साल 2023 में अग्निवीर योजना के तहत सेना में भर्ती हुए थे. वह अपने परिवार के सबसे छोटे सदस्य थे। घर की आर्थिक स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं थी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने सेना में जगह बनाई और अपने परिवार का नाम रोशन किया. गांव के युवाओं के लिए वह एक मिसाल बन चुके थे..
जिस दिन खुशी थी, उसी दिन टूट गया सब कुछ
Advertisement
इस कहानी का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि जिस दिन सोहित की मौत की खबर आई, उसी दिन उनके बड़े भाई मोहित चौहान उत्तर प्रदेश पुलिस में शामिल हो रहे थे. उस दिन उनकी पासिंग आउट परेड थी और घर में जश्न का माहौल था.. पिता मोहर सिंह बेटे की इस सफलता पर गर्व महसूस कर रहे थे. लेकिन जैसे ही छोटे बेटे की मौत की खबर मिली, खुशी का माहौल पल भर में मातम में बदल गया। एक ही दिन में परिवार ने जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी और सबसे गहरा दुख दोनों महसूस किया/.
मां-बाप का दर्द शब्दों में बयां नहीं
इस घटना के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया. मां का रो-रोकर बुरा हाल हो गया, वहीं पिता अंदर से टूट चुके हैं. उन्होंने बताया कि सोहित बहुत जिम्मेदार और मेहनती था. वह परिवार की हालत सुधारना चाहता था. उन्हें अपने बेटे पर गर्व है, लेकिन उसका यूं अचानक चले जाना उनके लिए असहनीय है.
Advertisement
पूरे गांव ने नम आंखों से दी विदाई
जब सोहित का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो पूरा गांव उमड़ पड़ा. हर कोई अपने वीर बेटे को अंतिम विदाई देने आया.. सेना के जवानों ने पूरे सम्मान के साथ उन्हें अंतिम सलामी दी.. उस वक्त वहां मौजूद हर इंसान की आंखें नम थीं. यह दृश्य इतना भावुक था कि जिसने भी देखा, वह खुद को रोने से नहीं रोक पाया.
लोगों की मांग और उम्मीद
Advertisement
यह भी पढ़ें
इस घटना के बाद गांव के लोगों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि सोहित चौहान को शहीद का दर्जा दिया जाए. साथ ही उनके परिवार को उचित मुआवजा और पेंशन दी जाए, ताकि उनका परिवार सम्मान के साथ आगे की जिंदगी जी सके. सभी का कहना है कि सोहित ने देश सेवा करते हुए अपनी जान दी है, इसलिए उन्हें पूरा सम्मान मिलना चाहिए.सोहित की यह कहानी हर किसी के दिल को छू जाती है. यह हमें बताती है कि जिंदगी कितनी अनिश्चित है और एक पल में सब कुछ बदल सकता है....