जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

योगी सरकार में संभव हुआ मां कौशल्या की पहली शोभायात्रा का आयोजन, अक्षय तृतीया पर निकाली गई थी शोभायात्रा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, दीपोत्सव और धार्मिक आयोजनों से सांस्कृतिक विरासत को नया मंच मिला है. इसी वातावरण में रामायण से जुड़े पात्रों और परंपराओं को भी व्यापक पहचान मिल रही है.

Author
08 Nov 2026
( Updated: 08 Nov 2026
10:09 AM )
योगी सरकार में संभव हुआ मां कौशल्या की पहली शोभायात्रा का आयोजन, अक्षय तृतीया पर निकाली गई थी शोभायात्रा
Image Credit: NMF Input
Advertisement

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिल रही है. राम मंदिर निर्माण और दीपोत्सव जैसे आयोजनों के साथ अब रामायण कालीन परंपराओं को भी सामने लाने के प्रयास हो रहे हैं. इसी क्रम में अक्षय तृतीया पर पहली बार निकाली गई मां कौशल्या और रामलला को समर्पित शोभायात्रा दीपोत्सव-2026 के बीच चर्चा में है. कौशल्या महिला मंडल की इस पहल का उद्देश्य भगवान श्रीराम की जननी माता कौशल्या के गौरव को जन-जन तक पहुंचाना है.

महिला संत डॉ. सुनीता शास्त्री ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन त्रेतायुग का प्रारंभ हुआ था. इसी युग में भगवान श्रीराम का अवतार हुआ और माता कौशल्या ने उन्हें जन्म दिया. इसी महत्व को देखते हुए शोभायात्रा निकालने का संकल्प लिया गया.

'अयोध्या आएं, लेकिन माफी मांगकर', रामभक्तों पर गोलीकांड को लेकर सपा पर बरसे CM योगी, संतों के अपमान को लेकर भी घेरा

रामायण कालीन परंपराओं को मिल रही पहचान
डॉ. सुनीता शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीराम के साथ उनकी जननी माता कौशल्या का गौरव भी समाज के सामने आना चाहिए. इसी उद्देश्य से कौशल्या महिला मंडल ने पहली बार अक्षय तृतीया पर शोभायात्रा निकाली. इस पहल के माध्यम से माता कौशल्या के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया.

Advertisement

यह भी पढ़ें

योगी सरकार में बना सांस्कृतिक आयोजनों का वातावरण
महिला संत ने बताया कि शोभायात्रा के आयोजन में डॉ. अनिल मिश्र और राम जन्मभूमि से जुड़े नरेंद्र जी का विशेष मार्गदर्शन और सहयोग मिला. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, दीपोत्सव और धार्मिक आयोजनों से सांस्कृतिक विरासत को नया मंच मिला है. इसी वातावरण में रामायण से जुड़े पात्रों और परंपराओं को भी व्यापक पहचान मिल रही है.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें