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एक कंबल के लिए गिड़गिड़ाते रहे नेत्रहीन बुजुर्ग लेकिन नहीं पसीजा अधिकारियों का दिल !

हाड़ कंपा देने वाली ठंड को देखते हुए यूपी की सत्ता संभाल रहे योगी आदित्यनाथ ने पहले ही अधिकारियों को सख्त आदेश दे दिया है कि सभी जिलों में पर्याप्त रैन बसेरे बनाए जाएं और गरीबों को कंबल बांटे जाएं लेकिन इसके बावजूद जिला कौशांबी से कंबल मांगते हुए एक ऐसे बुजुर्ग की वीडियो सामने आई है जिसे देख कर आंखों में आंसू आ जाएंगे !

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हाड़ कंपा देने वाली ठंड को देखते हुए यूपी की सत्ता संभाल रहे योगी आदित्यनाथ ने पहले ही अधिकारियों को सख्त आदेश दे दिया है कि सभी जिलों में पर्याप्त रैन बसेरे बनाए जाएं। और गरीबों को कंबल बांटे जाएं। लेकिन लगता है अधिकारियों के कानों तक सीएम योगी की आवाज नहीं पहुंच रही है। इसीलिये उत्तर प्रदेश के जिला कौशांबी से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया।

मौर्या हैं साहेब। हम अंधे हैं। दोनों आंखें खराब हैं।सौ परसेंट अंधे हैं
जाड़ा के मारे हिम्मत ही न पड़ रही। एक दूसर आदमी ने हमको कोट दिया तो पहिनते हैं साहेब।
कंबल अब तो बचे नहीं है अब।  कंबल आए थे बंट गए हैं।
अरे साहेब। जाड़े में बहुत परेशान हैं।

जिस राजधानी लखनऊ में बैठ कर सीएम योगी सरकार चलाते हैं। उस राजधानी से महज डेढ़ सौ किलोमीटर दूर जिला कौशांबी के सिराथू इलाके से आई ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। क्योंकि जिन अधिकारियों को सीएम योगी ने निशुल्क कंबल बांटने के आदेश दिये हैं। उन अधिकारियों के पास जब दोनों आंखों से दिव्यांग एक बुजुर्ग पहुंचा तो कुर्सी से चिपके अधिकारियों ने उस बुजुर्ग की मदद के लिए दो कंबल का जुगाड़ करने की बजाए हाथ खड़े कर दिये। और कहने लगे कंबल तो खत्म हो गये। अब आएगा तब लेने आना। इस दौरान बुजुर्ग कड़ाके की ठंड का हवाला देकर दो अदद कंबल की गुहार लगाता रहा लेकिन अधिकारियों का दिल नहीं ।पसीजा। आप भी देखिये मानवता को शर्मसार कर देने वाली ये वायरल वीडियो। 

नेत्रहीन लवकुश मौर्या:  मौर्या हैं साहेब। हम अंधे हैं। दोनों आंखें खराब हैं। सौ परसेंट अंधे हैं।  हमारे कागज देख लीजिए। हमको कंबल चाहिए साहेब।
अधिकारी :  आप दोनों लोग अंधे हैं??
नेत्रहीन लवकुश मौर्या :  हां साहेब, आप कागज देख लीजिए। अंधे के कागज हैं।
अधिकारी :  तो अभी तक आपको मिला नहीं कंबल!!
नेत्रहीन लवकुश मौर्या :  अभी कहां साहेब.. लेने ही नहीं आए। जाड़ा के मारे हिम्मत ही न पड़ रही। एक दूसर आदमी ने हमको कोट दिया तो पहिनते हैं साहेब।
अधिकारी :  कंबल अब तो बचे नहीं है अब कंबल आए थे बंट गए हैं।
नेत्रहीन लवकुश मौर्या :  नहीं साहेब, मेरे लिए तो जरूर दीजिए एक।
अधिकारी :  अरे अब होगा तब!! अभी आएंगे न।तब आपको दिलवाएंगे।
नेत्रहीन लवकुश मौर्या :  अरे साहेब। जाड़े में बहुत परेशान हैं। 

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ये वीडियो कौशांबी की सिराथू तहसील के समाधान दिवस का है। बेचारे जरूरतमंद और नेत्रहीन बुजुर्ग बड़ी उम्मीद से समाधान दिवस पर आए थे सिर्फ दो कंबल की गुहार लेकर लेकिन कुर्सी पर बैठे अफसर टरकाने वाला जवाब देकर मोबाइल में व्यस्त नजर आए। और आश्वासन देने लगे कि कंबल आएंगे तो बटेंगे?। कब आएंगे। कब बटेंगे। या कब दोबारा आना है। इसकी कोई जानकारी नहीं दी। बुजुर्ग शख्स यहां तक कहता रहा कि साहेब किसी ने जैकेट दी है तो पहने हैं। ठंड के मारे कंबल लेने नहीं आ पाए। लेकिन इसके बावजूद अफसरों का दिल नहीं पसीजा। जिसे देख कर लग रहा था इन अफसरों के सीने में दिल नहीं पत्थर है। क्योंकि सरकारी अफसर बन कर बैठे ये लोग क्या एक नेत्रहीन बुजुर्ग के लिए इतना भी नहीं कर सकते थे कि कम से कम अपनी ही जेब से पैसे लगाकर दो कंबल दिला देते। 
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