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CJP के तिरंगा मार्च पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कारोबारियों को झटका! जानें कोर्ट ने क्या कहा
दिल्ली के कनॉट प्लेस में CJP के ‘लहरा दो तिरंगा मार्च’ पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. कारोबारियों ने त्योहारों के सीजन में रोजाना 200-250 करोड़ रुपये तक के संभावित नुकसान की आशंका जताई थी. अदालत ने सभी पक्षों से समझदारी बरतने की उम्मीद जताई.
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दिल्ली के कनॉट प्लेस में अभिजीत दिपके की कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा मार्च’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. एक तरफ पार्टी आज तिरंगा मार्च निकालने की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ स्थानीय कारोबारी त्योहारों के सीजन में अपने व्यापार को होने वाले नुकसान को लेकर चिंतित हैं. इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने मार्च के खिलाफ तत्काल निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया है. हालांकि, अदालत ने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष समझदारी से काम लेंगे और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल रोक लगाने से क्यों किया इनकार?
कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. शुक्रवार को सुनवाई के दौरान वकील जय अनंत देहादराय ने दिल्ली की किराना कमिटी और दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट्स एसोसिएशन की ओर से कारोबारियों का पक्ष रखा. उन्होंने दलील दी कि प्रदर्शन के कारण मध्य दिल्ली में व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं. कारोबारियों की ओर से दावा किया गया कि विरोध-प्रदर्शन के चलते रोजाना 200 से 250 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है. उन्होंने त्योहारों के नजदीक आने का हवाला देते हुए अदालत से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की. हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इस स्तर पर कोई निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया. अदालत ने यह भी ध्यान दिलाया कि इसी तरह का मामला दिल्ली हाईकोर्ट में विचाराधीन है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हस्तक्षेप करने से परहेज किया.
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छोटे दुकानदारों की आजीविका पर भी अदालत की नजर
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सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत को उम्मीद है कि सभी लोग समझदारी दिखाएंगे. उन्होंने छोटे दुकानदारों की मुश्किलों का जिक्र करते हुए कहा कि वे इन्हीं दिनों में अपनी आजीविका कमाते हैं. कारोबार प्रभावित होने से केवल दुकानदार ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. यह टिप्पणी इसलिए अहम है, क्योंकि त्योहारों के दौरान बाजारों में खरीदारी बढ़ने की उम्मीद रहती है. ऐसे समय में आवाजाही में बाधा या बाजार बंद रहने जैसी स्थिति व्यापारियों की कमाई पर असर डाल सकती है. हालांकि, कारोबारियों की ओर से बताए गए संभावित नुकसान को अदालत द्वारा प्रमाणित आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए.
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जस्टिस बागची ने क्या कहा?
पीठ में शामिल जस्टिस बागची ने प्रदर्शन, व्यापार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि कोई विरोध करना चाहता है, कोई मूंगफली बेचना चाहता है और कोई कानून-व्यवस्था बनाए रखना चाहता है. ये सभी पहलू आपस में जुड़े हुए हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कारोबार को नुकसान पहुंचने जैसी स्थिति सामने आती है, तो अदालत अपने संवैधानिक अधिकार क्षेत्र के तहत उचित कदम उठाने पर विचार कर सकती है. यानी फिलहाल तत्काल निर्देश नहीं दिया गया है, लेकिन भविष्य में परिस्थितियों के आधार पर कानूनी हस्तक्षेप की संभावना से इनकार नहीं किया गया.
सेंट्रल पार्क बंद होने का मुद्दा भी उठा
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सुनवाई के दौरान देहादराय ने कहा कि नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने देर रात सेंट्रल पार्क बंद करने का नोटिस जारी किया था. उनके मुताबिक, इससे वहां व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होंगी. इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि यदि अदालत को यह कदम अनुचित लगता है, तो सार्वजनिक कानून और मुआवजे से जुड़े प्रावधानों के तहत उसके पास अधिकार मौजूद हैं. मामले की आगे की सुनवाई 26 या 27 अक्टूबर के लिए तय की गई है.
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बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने CJP के तिरंगा मार्च पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया है. दूसरी ओर, कारोबारियों की चिंताएं भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं. अब नजर इस बात पर रहेगी कि मार्च के दौरान कानून-व्यवस्था, आम लोगों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियों के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाता है. अदालत की नसीहत साफ है कि विरोध का अधिकार और लोगों की आजीविका, दोनों को ध्यान में रखकर जिम्मेदारी से काम किया जाना चाहिए.