जिस बात का था डर, वही हो गया! नेहा बोरा ने बिगाड़ा CJP का खेल, अब डैमेज कंट्रोल में जुटे दिपके
Abhijeet Dipke: गुरुवार को नेहा बोरा और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के बयानों के बाद संगठन के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई. इन बयानों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई तो CJP के प्रमुख अभिजीत दिपके को देर रात प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपना पक्ष स्पष्ट करना पड़ा.
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CJP: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) इन दिनों अपने आंदोलन और नेताओं के बयानों को लेकर चर्चा में है. संगठन लगातार महात्मा गांधी के विचारों, शांति और अहिंसा के रास्ते पर चलने की बात कर रहा है. लेकिन गुरुवार को नेहा बोरा और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के बयानों के बाद संगठन के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई. इन बयानों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई तो CJP के प्रमुख अभिजीत दिपके को देर रात प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपना पक्ष स्पष्ट करना पड़ा. उन्होंने साफ कहा कि संगठन का उद्देश्य सत्ता बदलना नहीं, बल्कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जवाबदेही की मांग करना है.
प्रशांत भूषण के बयान से क्यों बढ़ा विवाद?
गुरुवार को प्रेस क्लब में CJP और दूसरे संगठनों की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सत्ता परिवर्तन की बात कही. उन्होंने कहा, “हां, हम रेजीम चेंज (सत्ता परिवर्तन) चाहते हैं. यह इसी की लड़ाई है. रेजीम चेंज होकर ही रहेगा.” इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया. भाजपा ने इसे CJP के आंदोलन के उद्देश्य से जोड़कर सवाल उठाए. इसके बाद दीपके ने कहा, ‘क्या मांग रहे हैं हम. अब बस जवाबदेही मांग रहे हैं. जो ज्ञानेश कुमार चुनाव में गड़बड़ी कर रहे हैं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना फॉर्म-6 में बदलाव किया और बाकी कमिश्नरों ने कहा कि उनकी सहमति से फैसले नहीं हुए. बस हम चाहते हैं कि ज्ञानेश कुमार को हटाकर किसी और को बना दो. हम यह तो नहीं कह रहे हैं कि सत्ता पलटनी है. हम ये तो नहीं कह रहे हैं कि कुछ और करना है. हम तो बस यही कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार को हटाओ और एक निष्पक्ष तरीके से नया मुख्य चुनाव आयुक्त बनाओ.’
Neha Bora, Abhijeet Dipke, and others begin a press conference at the Press Club of India. https://t.co/LbbULz6qQx
— Neha Bora Team (@NehaAisa) October 15, 2026
नेहा बोरा के बांग्लादेश वाले बयान पर भी सवाल
विवाद सिर्फ प्रशांत भूषण के बयान तक सीमित नहीं रहा. नेहा बोरा का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वह कहती नजर आ रही हैं कि, ‘Gen-Z आंदोलन अब इस देश में हर जगह हो रहा है वह पहले बांग्लादेश में शुरू हुआ. आपको बधाई हमें भी रास्ता दिखाने के लिए.’ उनके इस बयान को लेकर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं, खासकर इसलिए क्योंकि बांग्लादेश में युवाओं के आंदोलन के दौरान हिंसा और राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिली थी.
नेहा बोरा पहले भी नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन के दौरान CJP के मंच पर दिखाई दी थीं. ऐसे में उनके बयान को संगठन की विचारधारा से जोड़कर सवाल उठाए जाने लगे. हालांकि, किसी व्यक्ति के बयान और पूरे संगठन के आधिकारिक रुख के बीच अंतर करना जरूरी है.
दिपके ने गांधी और आंबेडकर के रास्ते पर चलने की बात कही
बढ़ते विवाद के बीच अभिजीतदिपके ने नेहा की बात से पल्ला झाड़ते हुए कहा, 'मैं बात फिर से क्लियर कर देना चाहता हूं. हम महात्मा गांधी और बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के अनुयायी हैं. हम चुपचाप इस देश के नागरिक के रूप में तिरंगा लहराएंगे. उन्होंने नेहा बोरा के बयान से भी दूरी बनाते हुए कहा कि, 'भारत के पास महात्मा गांधी हैं. हम भारत के युवा हमेशा महात्मा गांधी की शांति और अहिंसा के रास्ते पर चलेंगे. ' उन्होंने यह बात एआईएसएफ के प्रमुख विराज देवांग के उस वीडियो को शेयर करते हुए कही, जिसमें उन्होंने कहा है, ‘भारत के युवाओं को अपनी आवाज बुलंद करने के लिए बांग्लादेश से प्रेरणा लेने की कोई जरूरत नहीं है. हमारे पर महात्मा गांधी जी का मॉडल है, जिससे दुनिया ने अपनाया.’
Delhi: CJP founder Abhijeet Dipke says, "Delhi Police and IB personnel have surrounded the house where I am currently staying. IB personnel and Delhi Police officers are roaming around all four lanes surrounding the house. Whenever I go out, vehicles without number plates follow me. When I returned just now, IB and police personnel were circling the house, talking to the watchman and gathering updates. So, Delhi Police may pick me up tonight or tomorrow morning..."
— IANS (@ians_india) October 15, 2026Advertisement
भाजपा ने साधा निशाना
भाजपा ने नेहा बोरा और प्रशांत भूषण के बयानों को लेकर CJP पर हमला बोला. भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि इन बयानों से आंदोलन के पीछे के उद्देश्य पर सवाल खड़े होते हैं. उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ सोच बताते हुए आलोचना की.
हालांकि, भाजपा के आरोप उसके राजनीतिक रुख का हिस्सा हैं. दूसरी ओर, दीपके ने अपने संगठन की मांग को मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करने तक सीमित बताया है.
अब CJP के लिए आगे की राह क्या होगी?
इस पूरे विवाद ने CJP के सामने एक चुनौती खड़ी कर दी है. एक तरफ संगठन शांतिपूर्ण आंदोलन की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ उससे जुड़े लोगों के बयानों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि CJP अपने आंदोलन के उद्देश्य और अहिंसक तरीके को लेकर किस तरह आगे बढ़ती है और उठ रहे सवालों का जवाब कैसे देती है.
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