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8 साल बाद भारत पहुंचे दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति, PM मोदी से मुलाकात से पहले जयशंकर संग अहम बातचीत; जानें क्या हुई चर्चा
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग का भारत दौरा अहम माना जा रहा है. उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंध, व्यापार और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की.
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भारत और दक्षिण कोरिया के रिश्तों को नई दिशा देने के लिए दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग का भारत दौरा बेहद अहम माना जा रहा है. इस यात्रा को सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने वाले बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है. बदलते वैश्विक माहौल में दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग अब एक नए स्तर पर पहुंचता नजर आ रहा है. दौरे की शुरुआत में राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की.
जयशंकर से मुलाकात की. इस बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने, व्यापार बढ़ाने और नई तकनीकों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की. जयशंकर ने राष्ट्रपति ली की भारत-कोरिया रिश्तों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता की सराहना की और भरोसा जताया कि आने वाले समय में यह साझेदारी और गहरी होगी.
कई वर्षों बाद अहम दौरा
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यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले 8 वर्षों में किसी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की यह पहली भारत यात्रा है. ऐसे में इसे ऐतिहासिक नजरिए से देखा जा रहा है. साल 2015 में दोनों देशों ने अपने रिश्तों को ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा दिया था. तब से लेकर अब तक सेमीकंडक्टर, रक्षा उत्पादन, ग्रीन एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है. यही वजह है कि यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा भरने वाला साबित हो सकता है.
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पीएम मोदी के साथ भी होगी बैठक
इस यात्रा का सबसे अहम पड़ाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ली के बीच होने वाली मुलाकात होगी, जो हैदराबाद हाउस में आयोजित होगी. इस बैठक में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है. खासतौर पर टेक्नोलॉजी, व्यापार और रक्षा क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है. साथ ही व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को और मजबूत करने पर भी चर्चा होगी, जिससे दोनों देशों के कारोबार को बड़ा फायदा मिल सकता है.
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बिजनेस फोरम और आर्थिक सहयोग
राष्ट्रपति ली भारत मंडपम में आयोजित बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगे. यहां दोनों देशों के बड़े उद्योगपति निवेश, सप्लाई चेन और नए अवसरों पर चर्चा करेंगे. इससे आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. इसके अलावा राष्ट्रपति ली, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे, जिससे दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों को और गहराई मिलेगी.
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बताते चलें कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रिश्ते सिर्फ रणनीतिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक स्तर पर भी मजबूत हो रहे हैं. दोनों देशों के बीच बढ़ता भरोसा और सहयोग आने वाले समय में एशिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा सकता है. साफ है कि यह दौरा सिर्फ एक मुलाकात नहीं, बल्कि भविष्य की मजबूत साझेदारी की नींव साबित हो सकता है.