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शहजाद बना शंकर, परिवार संग अपनाया सनातन धर्म, ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों से किया स्वागत
हरिद्वार में शहजाद ने अपने परिवार सहित पवित्र गंगा में डुबकी लगाने के बाद विधि विधान से पूजा अर्चना की और सनातन धर्म स्वीकार किया.
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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में 40 वर्षीय शहजाद ने परिवार के साथ सनातन धर्म अपना लिया है. शहजाद ने 21 मई को हरिद्वार के ब्रह्मकुंड स्थित आर्य समाज मंदिर में परिवार के साथ सनातन धर्म अपनाया और अपना नाम शंकर रख लिया . इसके बाद शंकर मंगलवार को परिवार के साथ अपने गांव पहुचे जहां उनका भव्य स्वागत किया गया. गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों, पुष्पवर्षा और माल्यार्पण कर उनका जोरदार स्वागत किया. इस दौरान उनके साथ गुरु धर्माचार्य अरुण कृष्ण जी महाराज और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे.
धर्म परिवर्तन कर शहजाद बना शंकर
आपको बता दें कि 21 अप्रैल को हरिद्वार में शहजाद ने अपने परिवार सहित पवित्र गंगा में डुबकी लगाने के बाद विधि विधान से पूजा अर्चना की और सनातन धर्म स्वीकार किया. धर्म परिवर्तन के बाद उनका नाम शंकर रखा गया. इसके बाद पहली बार अपने पैतृक गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. गांव में प्रवेश करते ही शंकर सबसे पहले स्थानीय मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और गांव के बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया. इसके बाद गांव की महिलाओं और अन्य ग्रामीणों ने उन्हें फूल-मालाएं पहनाकर, तिलक लगाकर और शुभकामनाएं देकर स्वागत किया. पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला.
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बचपन से ही शंकर की सनातन धर्म में थी आस्था
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ग्रामीणों का कहना है कि शंकर बचपन से ही सनातन धर्म और हिंदू धार्मिक परंपराओं के प्रति विशेष आस्था रखते थे. स्थानीय लोगों के मुताबिक वह अक्सर धार्मिक स्थलों पर जाते थे और विभिन्न धार्मिक आयोजनों में भी भाग लेते थे. ग्रामीणों ने बताया कि उनके इस निर्णय का गांव में बड़ी संख्या में लोगों ने स्वागत किया है.
सनातन धर्म अपनाने के बाद के क्या बोले शंकर
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शंकर ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पहले वह कई धार्मिक यात्राएं और पूजा-पाठ से जुड़े कार्यक्रम डर और संकोच के कारण छिपकर किया करते थे. अब वह अपने परिवार के साथ खुले तौर पर अपनी धार्मिक आस्था का पालन कर रहे हैं और अपने निर्णय से संतुष्ट हैं. शंकर ने बातचीत में यह भी कहा कि वर्तमान समय में उन्हें किसी प्रकार का भय नहीं है और वह अपने परिवार के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं. उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन का निर्णय उन्होंने अपनी व्यक्तिगत आस्था और विश्वास के आधार पर लिया है. इस अवसर पर मौजूद गुरु धर्माचार्य अरुण कृष्ण जी महाराज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आस्था और धार्मिक विश्वास के अनुसार जीवन जीने का अधिकार है. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म अपनाने के बाद शंकर और उनका परिवार धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है.
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इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे. लोगों ने शंकर और उनके परिवार को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की. स्वागत समारोह के बाद गांव में सामूहिक रूप से धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भाग लिया.