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खाने के लिए अलग टाइम, ऊंची आवाज में बात मत करो…विदेशी होटल में भारतीयों के लिए खास नियमों पर मचा बवाल, लिस्ट देख भड़के लोग

Harsh Goenka: सोशल मीडिया पर एक बार फिर “Civic Sense” यानी नागरिक शिष्टाचार को लेकर बहस तेज हो गई है. इस चर्चा की वजह बना एक कथित होटल नियमों का रूल्स, जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि यह खास तौर पर भारतीय मेहमानों के व्यवहार को ध्यान में रखकर बनाया गया है. इस मुद्दे को तब और हवा मिली जब उद्योगपति हर्ष गोयनका ने इस नियमों की सूची को साझा करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी.

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01 Jun 2026
( Updated: 01 Jun 2026
01:01 PM )
खाने के लिए अलग टाइम, ऊंची आवाज में बात मत करो…विदेशी होटल में भारतीयों के लिए खास नियमों पर मचा बवाल, लिस्ट देख भड़के लोग
Image Source: Canva/ Harsh Goenka Twitter
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Harsh Goenka: हाल ही में सोशल मीडिया पर एक बार फिर “Civic Sense” यानी नागरिक शिष्टाचार को लेकर बहस तेज हो गई है. इस चर्चा की वजह बना एक कथित होटल नियमों का रूल्स, जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि यह खास तौर पर भारतीय मेहमानों के व्यवहार को ध्यान में रखकर बनाया गया है. इस मुद्दे को तब और हवा मिली जब उद्योगपति हर्ष गोयनका ने इस नियमों की सूची को साझा करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी.

स्विट्जरलैंड के होटल के नियमों पर चर्चा क्यों शुरू हुई?

हर्ष गोयनका ने एक पोस्ट में बताया कि उन्होंने स्विट्जरलैंड के एक होटल में कुछ ऐसे नियम देखे थे, जिन्हें देखकर वे हैरान रह गए थे. इन नियमों को देखकर उन्हें लगा कि यह खास तौर पर भारतीय पर्यटकों के व्यवहार को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं. उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भारतीयों के व्यवहार को लेकर किस तरह की धारणा बन रही है.

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इसी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई, कुछ लोग इसे सामान्य होटल अनुशासन मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे भारतीयों के लिए “विशेष नियम” मानकर आलोचना कर रहे हैं.

क्या-क्या नियम बताए जा रहे हैं?

इस कथित नियम सूची में कई तरह की बातें शामिल बताई गई हैं. इनमें सबसे पहले खाने-पीने से जुड़े नियम हैं. जैसे कि नाश्ते के बुफे को केवल तय समय के अंदर इस्तेमाल करना, भोजन साथ लेकर न जाना और केवल उपलब्ध कटलरी का उपयोग करना. इसके अलावा अगर लोग खाना साझा करना चाहते हैं, तो उसके लिए अतिरिक्त शुल्क लेने की बात भी कही गई है.

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एक और बात जो चर्चा में है, वह यह कि होटल में शांति बनाए रखने पर जोर दिया गया है. जैसे गलियारों में धीमी आवाज में बात करना और बालकनी में जोर से बातचीत न करना. इसका उद्देश्य यह बताया गया है कि अन्य मेहमानों की शांति भंग न हो..

बातचीत और शांति से जुड़े निर्देश

नियमों में यह भी कहा गया है कि होटल में दुनिया भर से आए लोग ठहरते है, इसलिए सभी को एक-दूसरे की सुविधा का ध्यान रखना चाहिए. रिसेप्शन और रूम सर्विस के समय भी तय किए गए हैं, और रात के समय केवल आपातकालीन कॉल ही स्वीकार करने की बात कही गई है. इन सभी बातों को सामान्य होटल नियमों की तरह भी देखा जा सकता है, जो अक्सर कई देशों के होटलों में लागू रहते हैं.

सिविक सेंस पर फिर छिड़ी बहस

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इस पूरे मामले के बाद एक बार फिर “सिविक सेंस” यानी सार्वजनिक जगहों पर व्यवहार को लेकर चर्चा तेज हो गई है. कुछ लोग मानते हैं कि विदेशों में भारतीय पर्यटकों को अपने व्यवहार में और अधिक अनुशासन और शांति बनाए रखने की जरूरत है.  वहीं दूसरी तरफ, कई लोग इसे एक सामान्यीकरण मानते हैं और कहते हैं कि किसी एक देश या समुदाय को लेकर इस तरह के नियम जोड़कर देखना सही नहीं है.

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यह पूरा मामला सिर्फ एक होटल नियमों की सूची से शुरू हुआ, लेकिन यह बहस अब व्यापक हो गई है, कि सार्वजनिक जगहों पर व्यवहार कैसा होना चाहिए और क्या अलग-अलग देशों में अलग अपेक्षाएँ होती हैं. यह मुद्दा इस बात पर आकर टिकता है कि यात्रा करते समय स्थानीय नियमों और सामाजिक शिष्टाचार का सम्मान कितना जरूरी है.

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