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समाधि स्थल, लाइसेंस, पुलिस चौकी, गायों की देखभाल...मथुरा में फरसा बाबा की मौत के बाद प्रशासन के बड़े ऐलान

यूपी पुलिस ने मथुर में फरसा वाले बाबा की मौत के मामले में अपनी जांच तेज कर दी है. वहीं लोगों का गुस्सा भी फूट पड़ा है. कहा जा रहा है कि कई प्रदर्शनकारियों ने पुलिस-प्रशासन पर पत्थरबाजी तक कर दी. वहीं प्रशासन ने कई बड़े ऐलान किए हैं.

फरसा बाबा (फाइल फोटो)
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UP के मथुरा में साधु ‘चंद्रशेखर बाबा’ की मौत के बाद बवाल मचा हुआ. भारी संख्या में लोगों ने बीते दिन प्रदर्शन और चक्का जाम किया. इसके बाद जिला प्रशासन ने लोगों की मांग पर कई बड़े ऐलान किए हैं. इसी बीच पुलिस को पता चल गया है कि ट्रक और कैंटर किस राज्य के थे. पहले अफवाह फैलाई गई कि उस ट्रक में संभवत: गौवंश था, जिसका बाबा अपने दो साथियों के साथ उस ट्रक का पीछा कर रहे थे, जिसके बाद उन पर हमला कर उन्हें मार दिया गया. हालांकि जिलाधिकारी ने साफ किया है कि जैसा कि फरसा बाबा को लेकर अफवाह फैलाई जा रही है, वैसा नहीं है. जिस सड़क दुर्घटना में बाबा की मौत हुई, उस कंटेनर में साबुन-सर्फ वगैरह का सामान था. 

इसी बीच मथुरा जिले के कोसीकलां थाना क्षेत्र में शनिवार को हुए विवाद में 22 नामजद और 300 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस ने प्रशासनिक अधिकारियों पर पथराव, लाठी-डंडों से हमला और अवैध हथियारों से फायरिंग के मामले में मुकदमा दर्ज किया है. मिली जानकारी के अनुसार पुलिस ने अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. इसके साथ ही अन्य लोगों को गिरफ्तारी के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. इनकी गिरफ्तारी के लिए कई टीमें लगातार इनकी लोकेशन पता लगा रही हैं.

फरसा बाबा की मौत के बाद प्रशासन ने किए कई ऐलान!

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जिलाधिकारी सीपी सिंह ने इस बीच ऐलान किया कि बाबा की गोशाला को सरकार की ओर से सहायता दी जाएगी और उनके दाह संस्कार स्थल पर भी समाधि बनाने में शासन को कोई आपत्ति नहीं है, पूरी मदद की जाएगी. वहीं जैसी मांग की गई है उस अनुसार प्रशासन ने यह भी कहा कि जरूरतमंद पात्र लोगों को लाइसेंस देने पर विचार किया जाएगा.

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इसके अलावा पुलिस चौकी बनाए जाने पर भी पुलिस ने कहा कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं है. एसएसपी श्लोक कुमार ने भी इस संबंध में विचार करने की बात कही है. वहीं जिलाधिकारी ने ये भी कहा कि बाबा की मौत के बाद गोशाला में जो भी गोवंश हैं उसका ख्याल खुद प्रशासन रखेगा, और उसकी जिम्मेदारी उनकी होगी.

एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि बाहरी लोगों ने माहौल खराब करने की कोशिश की थी. उन्होंने ही अफवाह फैलाने का काम किया जिनकी लगातार पहचान की जा रही है, जिससे उनको जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके. एसएसपी ने जानकारी दी है कि, "कोसीकलां क्षेत्र में चंद्रशेखर उर्फ फरसा वाले बाबा ने एक वाहन को रोका था. वह वाहन नागालैंड नंबर का एक कैंटर था. उन्हें केंटर में गोवंश की आशंका थी.

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वह जब कैंटर को चेक करने के लिए पीछे लौटे तभी कोहरे के कारण दूसरा ट्रक आकर टकराया. इसमें फरसा वाले बाबा घायल हुए और कुछ देर बाद घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई. ट्रक चालक राजस्थान के अलवर का रहने वाला था. वह भी इस घटना में घायल हुआ था. उसे पहले मथुरा जिला अस्पताल और फिर आगरा के लिए रेफर किया गया था. हालांकि, इलाज के दौरान ट्रक चालक की भी मृत्यु हो गई."

क्या था कंटेनर में?

उन्होंने बताया कि ट्रक में तार लदे हुए थे जबकि कैंटर में किराने का सामान भरा था. एसएसपी ने कहा कि घटना के समय बाबा के साथ मौजूद उनके सहयोगी ने पुलिस को एक शिकायत दी, जिसके आधार पर कोसीकलां थाने में एक्सीडेंट का मुकदमा दर्ज किया गया.

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मथुरा के एसएसपी ने लोगों से अपील करते हुए कहा, "कोई भी जानकारी बिना तथ्यों या पुष्टि के सोशल मीडिया पर शेयर या पोस्ट न करें. तथ्यों के आधार पर ही सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट करें." उन्होंने लोगों ने एहतियातन सेक्टर स्कीम लागू कर दी है, जिसमें मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी लगातार भ्रमण कर रहे हैं.

फरसा बाबा की मौत पर सीएम योगी सख्त!

इसी बीच सीएम योगी गोरक्षक ‘फरसा वाले बाबा’ की मौत पर लगतार एक्शन मोड में हैं. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. मुख्यमंत्री योगी ने जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया. उन्होंने कहा, ‘दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा. कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी.’

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कौन थे फरसा बाबा?

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आपको बता दें कि चंद्रशेखर ब्रज की पहचान एक विख्यात गौरक्षक के रूप में थी. उन्हें फरसा वाले बाबा के नाम से भी जाना जाता था. उनके हाथ में हमेशा फरसा रहता था. वह बरसाना के आजनौख गांव में रहते थे. उनको लोग एक प्रसिद्ध और निडर गौ रक्षक के रूप में थी. फरसा वाले बाबा गोसेवा और गौतस्करी के खिलाफ सक्रिय रहते थे. उनका एक गौरक्षा दल भी था, जो गायों की देखभाल और सेवा करता था. फरसा वाले बाबा गौरक्षा आंदोलन का प्रमुख चेहरा थे. ब्रज अपने कार्यों के चलते वह काफी लोकप्रिय थे. 

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