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ऑपरेशन सिंदूर के बाद डरा पाकिस्तान, PM शहबाज ने कहा- 'परमाणु कार्यक्रम सिर्फ़....'

परमाणु कार्यक्रम को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा यह कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और आत्मरक्षा के लिए है, किसी पर हमले के लिए नहीं. इस्लामाबाद में छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने भारत के साथ हालिया चार दिवसीय सैन्य संघर्ष में 55 पाकिस्तानी नागरिकों के मारे जाने की पुष्टि की. साथ ही दावा किया कि पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा नहीं देता और शांति का समर्थक है. विश्लेषकों के अनुसार यह बयान भारत की जवाबी कार्रवाई के दबाव में दिया गया है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर अपने देश के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बयान दिया है. इस बार उन्होंने इसे पूरी तरह शांतिपूर्ण और आत्मरक्षा के उद्देश्य से जुड़ा बताया है. इस्लामाबाद में छात्रों को संबोधित करते हुए शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान के पास मौजूद परमाणु हथियार किसी पर हमला करने के लिए नहीं हैं, बल्कि यह देश की रक्षा के लिए एक मजबूत ढाल हैं. उन्होंने भारत के साथ हाल ही में हुए चार दिवसीय सैन्य संघर्ष की चर्चा भी की. इस दौरान उन्होंने इस टकराव में 55 पाकिस्तानी नागरिकों के मारे जाने की बात भी मानी.

भारत के जवाब का पाकिस्तान पर प्रभाव
शरीफ ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों और राष्ट्रीय रक्षा के लिए है, न कि हमले के लिए.' शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान किसी आतंकी गतिविधि को बढ़ावा नहीं देता और उनका देश शांति का पक्षधर है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की यह प्रतिक्रिया भारत की जवाबी कार्रवाई का प्रभाव माना जा रहा है. 

क्या परमाणु बयान डर का संकेत है?
शहबाज शरीफ का अचानक परमाणु हथियारों पर दिया गया यह बयान यूं ही नहीं आया. विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी पाकिस्तान की सैन्य स्थिति कमजोर होती है या आंतरिक अस्थिरता बढ़ती है, तब इस तरह के बयान दिए जाते हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन हासिल किया जा सके. भारत ने हालांकि अब तक ऐसे किसी उकसावे वाले बयान पर प्रतिक्रिया देने से परहेज किया है. लेकिन यह साफ है कि भारत की कूटनीति अब सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं है. जरूरत पड़ने पर वह ठोस कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटता. भारत अब सिर्फ हमलों की निंदा कर बैठने वाला देश नहीं रहा. ऑपरेशन सिंदूर इसका प्रमाण है. यह हमला न केवल सैन्य दृष्टि से सटीक था, बल्कि भावनात्मक रूप से भी देश के नागरिकों के साथ जुड़ता है. नाम से लेकर कार्रवाई तक, हर पहलू एक संदेश देता है. भारत आतंक के सामने झुकेगा नहीं. पाकिस्तान को भी यह समझना होगा कि अब समय बदल चुका है. यदि वह शांति की बात करता है, तो उसे पहले आतंक पर लगाम लगानी होगी. परमाणु हथियारों के नाम पर डर फैलाने की रणनीति अब पुरानी हो चुकी है. दुनिया को अब नतीजे दिखते हैं, बयान नहीं.

भारत ने की थी एयरस्ट्राइक 
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक आतंकी संगठन 'द रेसिस्टेंस फ्रंट' ने बैसरन घाटी में हमला किया, जिसमें 26 हिंदू पर्यटकों की हत्या कर दी गई. आतंकियों ने स्पष्ट रूप से धार्मिक पहचान के आधार पर लोगों को निशाना बनाया, जिससे देश भर में आक्रोश फैल गया. यह हमला देश के सामाजिक तानेबाने को झकझोर गया और इससे पैदा हुई पीड़ा की गूंज संसद तक सुनाई दी. इस आतंकी हमले के जवाब में भारत सरकार ने सख्त कदम उठाया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर भारतीय सेना ने 6 मई की रात 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया. इसका नाम उन महिलाओं की पीड़ा और सम्मान के प्रतीक स्वरूप रखा गया, जिनके पति इस हमले में मारे गए. यह केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि आतंक के खिलाफ एक भावनात्मक और निर्णायक संदेश था. भारतीय वायुसेना और विशेष बलों ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए. रिपोर्टों के अनुसार इन हमलों में कई आतंकियों और उनके कमांड सेंटर्स को भारी नुकसान पहुंचा.

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