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एक फोटो… दो नेता…और ‘बुरे दिनों’ पर शुरू हुई सियासत, हिमंत सरमा के पोस्ट ने बढ़ाई सियासी टेंशन, किसे दिया संदेश?

Himanta Sarma post Viral: सरमा ने बेहद छोटा लेकिन राजनितिक मायनों से भरा संदेश लिखा - बुरे दिन....( आप जानते है किसके लिए ) बस फिर क्या था, सोशल मीडिया पर लोगों ने अपने अपने अंदाज़ में इसका मतलब निकालना शरू कर दिया.

Image Source: Hemant Biswa Sarma Twitter
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Himanta Sarma post Viral: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के साथ अपनी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की, लेकिन तस्वीर से ज्यादा चर्चा उसके कैप्शन की होने लगी. सरमा ने बेहद छोटा लेकिन राजनितिक मायनों से भरा संदेश लिखा - बुरे दिन....( आप जानते है किसके लिए ) बस फिर क्या था, सोशल मीडिया पर लोगों ने अपने अपने अंदाज़ में इसका मतलब निकालना शरू कर दिया. दिलचस्प बता यह रही कि सरमा ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके इस इशारे को लेकर राजनितिक गलियारों में खूब चर्चा होने लगी. शुभेंदु अधिकारी ने भी इस पोस्ट पर जवाब देते हुए लिखा कि ''अंदाजा लगाने के लिए कोई इनाम नहीं मिलेगा, मुझे ऐसा ही लगता है''. उनके इस जवाब ने लोगों कि उत्सुकता और बढ़ा दी. दोनों नेताओं ने खुलकर कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके शब्दों ने साफ़ कर दिया कि राजनीति में संदेश कई बार सीधे नहीं , बल्कि इशारों में दिए जाते है, खासकर ऐसे समय में जब पूर्वोत्तर और बंगाल की राजनीति में BJP लगातार अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है.

दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री बने हिमंत बिस्वा सरमा

मंगलवार का दिन असम की राजनीति के लिए खास रहा. Himanta Biswa Sarma ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. इसके साथ ही राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाले NDA की लगातार तीसरी सरकार बन गई. शपथ ग्रहण समारोह काफी भव्य रहा, जिसमें देश के कई बड़े नेता शामिल हुए. प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah, रक्षा मंत्री Rajnath Singh और केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari समेत कई दिग्गज वहां मौजूद रहे.

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सरमा के साथ चार और विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली. इनमें भाजपा के अजंता नियोग और रामेश्वर तेली, AGP के अतुल बोरा और BPF के चरण बोरो शामिल रहे. समारोह के दौरान असम की संस्कृति की भी झलक देखने को मिली. मुख्यमंत्री और बाकी नेताओं ने पारंपरिक धोती-कुर्ता और गमछा पहनकर शपथ ली. सरमा सहित कई नेताओं ने असमिया भाषा में शपथ ली, जबकि चरण बोरो ने बोडो भाषा में शपथ ग्रहण किया. इससे साफ दिखा कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को भी सरकार अहमियत दे रही है.

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‘पहला कार्यकाल ट्रेलर था, अब फिल्म आएगी’

शपथ लेने के बाद हिमंत बिस्वा सरमा का बयान भी काफी चर्चा में रहा. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के तौर पर उनका पहला कार्यकाल सिर्फ “ट्रेलर” था और अब दूसरे कार्यकाल में “पूरी फिल्म” देखने को मिलेगी. उनके इस बयान को लेकर समर्थकों में उत्साह देखने को मिला. सरमा ने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में असम के विकास की रफ्तार और तेज होगी और सरकार बड़े फैसले लेगी.

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57 वर्षीय सरमा आज भाजपा के सबसे मजबूत क्षेत्रीय नेताओं में गिने जाते हैं. लेकिन उनका राजनीतिक सफर आसान नहीं रहा. साल 2015 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था. उस समय यह फैसला काफी बड़ा माना गया था. भाजपा में आने के बाद उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री Sarbananda Sonowal के साथ मिलकर असम में पार्टी को मजबूत किया और 2016 में पहली बार राज्य में भाजपा की सरकार बनवाने में अहम भूमिका निभाई.

जालुकबाड़ी सीट से बड़ी जीत

इस विधानसभा चुनाव में हिमंत बिस्वा सरमा ने जालुकबाड़ी सीट से शानदार जीत हासिल की. उन्होंने करीब 89 हजार से ज्यादा वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की. यह जीत सिर्फ एक चुनावी आंकड़ा नहीं, बल्कि राज्य में उनकी मजबूत पकड़ का संकेत भी मानी जा रही है. दिलचस्प बात यह है कि 1996 में अपना पहला चुनाव हारने वाले सरमा ने हार नहीं मानी और फिर लगातार मेहनत करते रहे. 2001 से वह लगातार जालुकबाड़ी सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

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उन्होंने कांग्रेस और भाजपा, दोनों दलों के टिकट पर चुनाव जीते हैं, जो उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता को भी दिखाता है. आज असम की राजनीति में उनका नाम सबसे प्रभावशाली नेताओं में लिया जाता है और भाजपा भी उन्हें पूर्वोत्तर में अपने सबसे बड़े चेहरे के तौर पर देखती है.

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