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गैर यादव, सवर्ण और दलित का गठजोड़...बसपा सुप्रीमो मायावती के एक चुनावी दांव ने उड़ा दी अखिलेश यादव की नींद
बसपा प्रमुख मायावती ने विधानसभा चुनाव को लेकर ऐसी रणनीति बनाई है, जिससे सपा की नींद उड़ गई है. मायावती ने उन तबकों को अपने साथ जोड़ना शुरू कर दिया है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि अगर ये दांव सफल रहा तो अखिलेश यादव के लिए सत्ता में वापसी मुश्किल हो जाएगी.
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उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2007 को देखते हुए बसमा सुप्रीमो मायावती ने अपनी सोशल इंजीनियरिंग को सेट करना शुरू कर दिया है. इतना ही नहीं उन्होंने उन बिछड़े और नाराज तबकों, वोट बैंक को साधने की कोशिशें शुरू कर दी हैं, जिन्हें बसपा अपना मानती है, या कभी इनके वोट BSP को मिला करते थे. बसपा प्रमुख के एक्टिव होते ही सपा की नींद उड़ गई है. ऐसा इसलिए क्योंकि लोकसभा चुनाव के वक्त ऐसा देखा गया कि हाथी के वैसे वोट, जो कभी भी यादव समाज के साथ नहीं गए, जिनके बारे में कहा जाता था कि वो सपा में जा ही नहीं सकते, वे भी उदासीनता में, PDA के कथित नारे के तहत शिफ्ट हो गए. ऐसे में जब मायावती मजबूती से चुनाव लड़ेंगी, अपने नाराज वोटर्स को साध लेंगी तो जाहिर है सपा प्रमुख अखिलेश यादव के लिए खतरे की घंटी बजनी तय है.
2027 को लेकर मायावती के एक दांव से उड़ी अखिलेश की नींद!
इसी बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने कहा उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच ब्राह्मण समाज सहित अन्य सवर्ण वर्गों का रुझान तेजी से बसपा की ओर बढ़ रहा है, जिससे विरोधी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी में बेचैनी साफ दिखाई दे रही है. उन्होंने कहा कि 2007 की तरह इस बार भी ब्राह्मण समाज के सहयोग से बसपा पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच सकती है, क्योंकि सवर्ण समाज को बसपा की नीतियों और नेतृत्व पर सबसे अधिक भरोसा है.
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मायावती का अखिलेश यादव पर बड़ा हमला
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बसपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर जब से सवर्ण समाज और उसमें से खासकर ब्राह्मण समाज को उनके बीएसपी में जुड़ने को ध्यान में रखकर, पार्टी का उम्मीदवार बनाना शुरू कर दिया है, तबसे सभी विरोधी पार्टियों में खासकर समाजवादी पार्टी में नींद उड़ा देने वाली बेचैनी देखने को मिल रही है. यह वर्ष 2007 की तरह ब्राह्मण समाज के योगदान से बीएसपी को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जैसा ही इस बार के आगामी चुनाव परिणाम के रिपीट होने की संभावना के तहत स्वाभाविक ही प्रतीत होता है.
ब्राह्मणों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में मायावती
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पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि वैसे भी यह सर्वविदित है कि यूपी जैसे विशाल आबादी वाले प्रदेश में अपरकास्ट में से खासकर ’ब्राह्मण समाज का हित बीएसपी में ही सुरक्षित है’. बसपा की ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धान्त, नीयत व नीति को बहुजन समाज पार्टी ने पहले पार्टी स्तर पर अमल करके और फिर सरकार बनने पर भी उन्हें भरपूर आदर-सम्मान के साथ-साथ उन्हें हर स्तर पर पूरी-पूरी भागीदारी देकर यह साबित भी कर दिया है जबकि दूसरी पार्टियों की सरकारों में इस वर्ग के लोग पिछले काफी समय से अपने आपको काफी उपेक्षित, असुरक्षित व ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.
सामाजिक भाईचारा कमेटी पहल पर फोकस कर रही बसपा
बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि इतना ही नहीं बल्कि ’ब्राह्मण समाज द्वारा सामाजिक भाईचारा के आधार पर बीएसपी से जुड़ने की इनकी तैयारियों को ध्यान में रखकर इन्हें पार्टी उम्मीदवार बनाने की प्रक्रिया जारी है तथा इन्हें बीएसपी की आयरन लेडी नेतृत्व पर यकीन भी है कि बीएसपी की सरकार बनने पर उन्हें पहले की तरह ही हर स्तर पर भरपूर आदर-सम्मान ज़रूर दिया जायेगा, जो कि इनकी वास्तविक चिंता व दूसरी पार्टियों से मुंह मोड़ने का कारण है.
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जिसकी जितनी तैयारी उसकी उतनी भागीदारी’ के आधार पर दी जाएगी उम्मीदवारी
उन्होंने कहा कि इसके साथ ही अपरकास्ट में से क्षत्रिय, वैश्य आदि व अन्य समाज के लोगों को भी उनकी बीएसपी से जुड़ने की तैयारी अर्थात् 'जिसकी जितनी तैयारी उसकी उतनी भागीदारी’ के आधार पर चुनाव में उम्मीदवार भी जरूर बनाया जायेगा, जिसकी तैयारी हर स्तर पर लगातार जारी है. उन्होंने कहा कि बीएसपी दूसरी पार्टियों की तरह कुछ लोगों को ’लॉलीपाप’ थमाने की संकीर्ण व स्वार्थ की राजनीति नहीं करती है बल्कि पूरे समाज के हित व कल्याण की चिन्ता करना अपना संवैधानिक कर्तव्य समझती है. इसलिए भी बीएसपी की नीति व कार्यक्रम जनहित व जनकल्याण तथा अपराध नियंत्रण व कानून व्यवस्था के मामले में भी देश व जनहित में बेहतरीन होते हैं.
बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा आमचुनाव की तैयारियों के मद्देनज़र जब से अपरकास्ट समाज और उसमें से ख़ासकर ब्राह्मण समाज को, उनके बी.एस.पी. में जुड़ने को ध्यान में रखकर, पार्टी का उम्मीदवार बनाना शुरू कर दिया है, तब से सभी विरोधी पार्टियों में व ख़ासकर समाजवादी…
— Mayawati (@Mayawati) ?ref_src=twsrc%5Etfw">June 22, 2026Advertisement
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पिछड़ों में भी फिर से पैठ बढ़ाना चाह रही बसपा!
इससे पहले इसी महीने 11 जून को बसपा ने अपनी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को आगे बढ़ाते हुए फिर से पिछड़ों में पैठ बढ़ाने की रणनीति अपनाई है. इसको लेकर माल एवेन्यू स्थित पार्टी मुख्यालय में पिछड़ा वर्ग भाईचारा कमेटी की एक बैठक भी हुई, जिसमें कार्यकर्ताओं को रणनीति समझाई गई. इतना ही नहीं प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल की ओर से कमेटियों को व्यापक जनसंपर्क करने और संगठन के विस्तार के निर्देश दिए गए.
पुरानी सोशल इंजीनियरिंग को फिर से हासिल करना चाह रही बसपा
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आपको बता दें कि 2027 के विधान सभा चुनाव के लिए बसपा अपनी पुरानी सोशल इंजीनियरिंग को फिर से हासिल करने, उसे मजबूत करने और कुनबे को बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है. इस लिहाज से अपने पुराने दलित वोट बैंक को तो मजबूत किया ही जा रहा है बल्कि सवर्णों खासकर ब्राह्मणों को भी अपने साथ जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं. इसके अलावा पार्टी पिछड़े वर्गों में भी ताकत बढ़ाने की रणनीति पर काम रही है.
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इसको लेकर प्रदेशभर में भाईचारा कमेटियों को लगाया गया है. पार्टी सबसे ज्यादा फोकस गैर यादव पिछड़ी जातियों पर कर रही है. इसी को और धार देने के लिए भाईचारा कमेटियों की बैठक पर जोर दी जा रही है.