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भारत को तोड़ने का ख्वाब कभी नहीं होगा पूरा...'मोदी-शाह की कब्र खोदने' चले थे दानिश, साद, महबूब...JNU ने लिया ये एक्शन

JNU में पीएम मोदी-गृह मंत्री शाह के खिलाफ भड़काऊ नारे, सुप्रीम कोर्ट की सीधी अवमानना के मामले में कड़ी कार्रवाई की जा रही है. इस मुद्दे को गंभीरता से लेकरऐसे एक्शन की तैयारी है कि हमेशा के लिए इसे खत्म कर दिया जाए. वहीं विवादास्पद नारे लगाने वालों के भी नाम सामने आ गए है.

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06 Jan 2026
( Updated: 06 Jan 2026
05:23 PM )
भारत को तोड़ने का ख्वाब कभी नहीं होगा पूरा...'मोदी-शाह की कब्र खोदने' चले थे दानिश, साद, महबूब...JNU ने लिया ये एक्शन
Image: PM Modi And Amit Shah / JNU Campus (File Photo)

दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) एक बार फिर विवादों में है. इस बार भी वही विवादास्पद और भड़काऊ नारे लगाए गए हैं. बार-बार हो रही इस तरह की घटनाओं से परेशान जेएनयू प्रशासन ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई का फैसला किया है. दरअसल जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी (सीएसओ) नवीन यादव ने दिल्ली पुलिस को चिट्ठी लिखी है और आरोपियों पर केस दर्ज करने की मांग की है. 

CSO ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ लगाए गए आपत्तिजनक नारों के मामले में FIR दर्ज करने की मांग की है.  अब ऐसा लगता है कि ये छात्र बड़ी मुश्किल में पड़ने वाले हैं.

‘गुरिल्ला ढाबा’ नाम से आयोजित हुआ था कार्यक्रम!

आपको बता दें कि कई लेफ्ट-विंग छात्र संगठनों ने बीती रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के विरोध में भड़काऊ नारे लगाए. यह नारेबाजी ‘गुरिल्ला ढाबा’ नाम से आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई. यह कार्यक्रम जनवरी 2020 में हुए उस हमले की छठी बरसी पर रखा गया था, जिसमें नकाबपोश लोगों ने जेएनयू के छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया था.

कहां पर आयोजित हुआ था कार्यक्रम?

सीएसओ की ओर से वसंत कुंज थाने के थाना प्रभारी को भेजे गए पत्र में बताया गया कि यह कार्यक्रम साबरमती छात्रावास के बाहर आयोजित किया गया था. कार्यक्रम का नाम ‘गुरिल्ला ढाबा के साथ प्रतिरोध की रात’ रखा गया था, जिसका उद्देश्य उस हमले की बरसी को याद करना था. उन्होंने कहा, "शुरू में, भीड़ उस बरसी को मनाने तक ही सीमित लग रही थी. मौके पर मौजूद छात्रों की संख्या लगभग 30-35 थी. 

शरजील इमाम-उमर खालिद की बेल खारिज होने से भड़के छात्र!

CSO के मुताबिक कार्यक्रम के दौरान जब पता चला कि सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं, तब 'भीड़ का स्वभाव और लहजा काफी बदल गया.'

किस-किस ने नारे लगाए?
कार्यक्रम के दौरान पहचाने गए प्रमुख छात्रों में अदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद आजमी, महबूब इलाही, कनिष्क, पाकीजा खान, शुभम और अन्य शामिल थे."

सर्वोच्च अदालत की सीधी अवमानना: CSO

सीएसओ ने कहा, "कुछ छात्रों ने बहुत आपत्तिजनक, भड़काऊ और उत्तेजक नारे लगाने शुरू कर दिए. यह भारत की सर्वोच्च अदालत की सीधी अवमानना ​​है. ऐसे नारे लगाना लोकतांत्रिक विरोध के बिल्कुल विपरीत है, जेएनयू आचार संहिता का उल्लंघन करता है, और सार्वजनिक व्यवस्था, कैंपस में सद्भाव, और विश्वविद्यालय के सुरक्षा माहौल को गंभीर रूप से बाधित करने की क्षमता रखता है."

जानबूझकर लगाए गए नारे: JNU CSO

उन्होंने कहा, "लगाए गए नारे 'स्पष्ट रूप से सुनाई दे रहे थे, जिसमें नारे जानबूझकर लगाए और दोहराए जा रहे थे,' जो किसी 'सहज या अनजाने में अभिव्यक्ति' के बजाय 'जानबूझकर और सचेत दुराचार' का संकेत देता है. यह कार्य संस्थागत अनुशासन, सभ्य बातचीत के स्थापित मानदंडों और विश्वविद्यालय परिसर के शांतिपूर्ण शैक्षणिक चरित्र की जानबूझकर अवहेलना को दिखाता है."

BNS की धारा के तहत केस दर्ज करने की मांग

सीएसओ ने आगे बताया कि घटना के समय सुरक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद थे और स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे थे. मौजूद सुरक्षा कर्मियों में इंस्पेक्टर (एसएसएस) गोरखनाथ, सुपरवाइजर विशाल कुमार और सुरक्षा गार्ड जय कुमार मीना और पूजा शामिल थे. उन्होंने पत्र में आगे पुलिस से बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने का आग्रह किया. 

किन संगठनों ने किया था विरोध प्रदर्शन का आयोजन

यह घटना सोमवार शाम को हुई, जब सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों के मामले में जेएनयू के पूर्व छात्रों उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया. डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) से जुड़े लगभग 30 से 40 छात्रों ने कैंपस में सरकार विरोधी नारे लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया. 

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वहीं दिल्ली पुलिस को आधिकारिक रूप से शिकायत का इंतजार है. जैसे ही पत्र मिलेगा, कार्रवाई होगी. वहीं पुलिस का कहना है कि रूटीन के तहत विश्वविद्यालय कैंपस के बाहर जवानों की तैनाती है.

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