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"शं नो वरुणः", स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में डटी नेवी, भारतीय फ्लैग्ड शिप्स को कर रही एस्कॉर्ट, निकाल रही सुरक्षित, VIDEO

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में इंडियन नेवी भारतीय झंडा धारी और मित्र देशों के जहाजों के लिए रक्षक के तौर पर उभरी है. ईरान के हमले, अंडरवाटर माइंस से सेफ पैसेज दे रही है और बता रही है कि कैसे, कहां से और कब पास करना है.

भारतीय झंडाधारी जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही नेवी (फ्रेम में)/ फाइल फोटो/
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खाड़ी में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा और चिंता का विषय बना हुआ है. ईरान ने दुनिया की लाइफलाइन कहे जाने वाले इस रूट से गुजरने वाली ग्लोबल एनर्जी ट्रेड को बाधित कर रखा है. यहां भारत को अपने एनर्जी ट्रेड के मूवमेंट की इजाजत है. भारतीय नौसेना की मदद से भारत का एनर्जी ट्रेड धीरे-धीरे भारत पहुंच रहा है. यानी कि नेवी इस एरिया में जीवन रक्षक के तौर पर बनकर उभरी है. 

होर्मुस से भारतीय जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही Indian Navy!

इसमें खास बात यह है कि भारतीय नौसेना न सिर्फ टैंकरों को एस्कॉर्ट कर रही है, बल्कि उन्हें होर्मुज पार करने के लिए गाइड भी कर रही है. सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, नेवी उन जहाजों के संपर्क में रहती है जिन्हें एक-एक करके फारस की खाड़ी से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर बाहर निकलना होता है. 

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समुंद्र में भारतीय नौसेना के डेस्ट्रॉयर और फ्रिगेट तैनात!

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सुरक्षा के मद्देनजर नेवी इन शिप्स को गाइड कर रही है कि कैसे और किस रास्ते से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार करना है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करने के बाद भारतीय नौसेना के डेस्ट्रॉयर और फ्रिगेट उन्हें एस्कॉर्ट करते हुए आधे रास्ते तक सुरक्षित पहुंचा रहे हैं.

नौसेना की तैनाती का दायरा बढ़ा!

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भारतीय नौसेना ने पहले ही अपनी तैनाती को ओमान की खाड़ी की ओर बढ़ा दिया है. सरकारी अधिकारियों के अनुसार, एस्कॉर्ट ऑपरेशन लगातार जारी रहे, इसके लिए उस इलाके में पर्याप्त वॉरशिप और लॉजिस्टिक सपोर्ट तैनात किया गया है.

ईरान के हमलों और अंडरवॉटर माइंस से निपट रही नेवी!

दुनिया भर की शिपिंग लाइंस हाइड्रोग्राफिक चार्ट के आधार पर बनी नेविगेशन प्रणाली का उपयोग करती हैं. इनके बिना समुद्र में जहाजों की आवाजाही बेहद खतरनाक हो सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरान ने अंडरवॉटर माइंस बिछाई हैं. ये माइंस किसी भी जहाज से टकराने या संपर्क में आने पर भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं. इसके अलावा कई अन्य तरह के खतरे भी हो सकते है. इसलिए नेवी भारतीय फ्लैग्ड शिप्स को सुरक्षित रूट बताने में मदद कर रही है.

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हाइड्रोग्राफिक चार्ट के आधार पर चलते हैं जहाज!

हाइड्रोग्राफिक चार्ट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं. समुद्र की सतह ऊपर से भले ही सुरक्षित दिखे, लेकिन पानी के अंदर कई खतरे छिपे होते हैं. समुद्र हर जगह एक जैसा नहीं होता—कहीं गहराई ज्यादा होती है तो कहीं कम. हार्बर के पास इसकी गहराई कुछ मीटर ही होती है, जबकि हाई सी में यह कई सौ मीटर तक हो सकती है. समुद्र में आने वाली सुनामी जैसी घटनाओं से समुद्र तल में लगातार बदलाव होता रहता है. इन अदृश्य खतरों से निपटने के लिए हाइड्रोग्राफिक मैप्स की जरूरत होती है. इन्हें सर्वे वेसल्स द्वारा तैयार किया जाता है. ये वेसल्स समुद्र की तलहटी को स्कैन करके चार्ट बनाते हैं और सुरक्षित नेविगेशन रूट्स को चिह्नित करते हैं.

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भारत द्वारा बनाए गए हाइड्रोग्राफिक चार्ट का उपयोग कर रहे मित्र देश!

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अरब सागर और हिंद महासागर क्षेत्र में चलने वाले अधिकांश जहाज- चाहे वे वॉरशिप हों, कंटेनर शिप्स हों या तेल और गैस के टैंकर- भारत द्वारा बनाए गए हाइड्रोग्राफिक चार्ट का उपयोग करते हैं. भारतीय नौसेना न केवल भारत के लिए, बल्कि मित्र देशों के अनुरोध पर उनके एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन का सर्वे करने में भी मदद करती है. हिंद महासागर क्षेत्र के कई देशों के साथ भारत के समझौते हैं, जिनके तहत भारत उनके समुद्री क्षेत्रों का हाइड्रोग्राफिक सर्वे कर नेविगेशन चार्ट तैयार करता है. एक बार चार्ट तैयार हो जाने के बाद वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य हो जाता है. कोई भी देश या कंपनी उसे खरीदकर अपनी समुद्री गतिविधियों के लिए उपयोग कर सकता है.

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