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आतंकवाद के खिलाफ भारत-अमेरिका एकजुट, जयशंकर-रुबियो बैठक से पाकिस्तान को सख्त संदेश

विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्कों रुबियो के बीच नई दिल्ली में अहम बैठक हुई, जिसमें रक्षा, व्यापार, आतंकवाद और मिडिल ईस्ट संकट समेत कई वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई.

Image Source: IANS
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भारत और अमेरिका के रिश्तों में पिछले साल से आई दूरी अब खत्म होते हुए दिखाई दे रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का पीएम मोदी को दोस्त बताना, ट्रेड पर डील के बाद लगातार दोनों देशों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी है. इस बीच शनिवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर (S. Jaishankar) और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्कों रुबियो (Marco Rubio) के बीच हुई अहम बैठक ने यह साफ कर दिया कि दोनों देश अब केवल दोस्त नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीतिक साझेदार के रूप में आगे बढ़ रहे हैं. यह मार्को रुबियो की अमेरिकी विदेश मंत्री बनने के बाद पहली भारत यात्रा रही, इसलिए इस मुलाकात को बेहद खास माना जा रहा है.

रक्षा, व्यापार और तकनीक पर बड़ा फोकस

प्रतिनिधिमंडल स्तर पर हुई इस बैठक में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, नई तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. दोनों नेताओं ने यह माना कि बदलती दुनिया में भारत और अमेरिका की साझेदारी केवल दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है. बातचीत के दौरान आतंकवाद से लेकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव तक कई गंभीर विषयों पर खुलकर चर्चा हुई.

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आतंकवाद पर दोनों देशों का साझा रुख

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साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में एस. जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा कि आतंकवाद आज भारत और अमेरिका दोनों के लिए सबसे बड़ी साझा चुनौती है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों की एजेंसियों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है और आने वाले समय में इसे और गहरा किया जाएगा. जयशंकर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में आतंकी गतिविधियों और अस्थिरता को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है.

पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र पर गंभीर चर्चा

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बैठक का सबसे दिलचस्प पहलू पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र को लेकर हुई चर्चा रही. सूत्रों के अनुसार दोनों नेताओं ने मिस्र, इजरायल और खाड़ी देशों की मौजूदा स्थिति पर गंभीर बातचीत की. खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक गतिविधियों को लेकर दोनों देशों ने अपने विचार साझा किए. दुनिया की नजर इस समय पश्चिम एशिया पर टिकी हुई है और ऐसे माहौल में भारत-अमेरिका संवाद काफी अहम माना जा रहा है.

ईरान और परमाणु मुद्दे पर रुबियो का बयान

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका का रुख दोहराते हुए कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए. उन्होंने यह भी संकेत दिए कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में कुछ प्रगति हुई है और आने वाले दिनों में बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर क्या बोले रुबियो?

रुबियो ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यह समुद्री मार्ग बिना किसी टोल या टैक्स के अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए खुला रहना चाहिए. दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता है. भारत जैसे ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए भी यह मुद्दा काफी महत्वपूर्ण माना जाता है.

दुनिया को दिया बड़ा रणनीतिक संदेश

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एस. जयशंकर ने इस दौरान भारत-अमेरिका संबंधों को 'व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी' बताते हुए कहा कि दोनों देशों के हित कई मुद्दों पर समान हैं. उन्होंने भरोसा जताया कि जटिल वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद दोनों देशों की बातचीत दुनिया के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आएगी. वहीं मार्को रुबियो ने भारत को अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया. उन्होंने कहा कि यह रिश्ता केवल औपचारिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देश मिलकर भविष्य की वैश्विक व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं.

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बताते चलें कि नई दिल्ली में हुई यह मुलाकात केवल एक कूटनीतिक बैठक नहीं थी, बल्कि यह दुनिया को दिया गया एक बड़ा संदेश भी था कि भारत और अमेरिका आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के कई अहम मुद्दों पर साथ खड़े दिखाई देंगे.

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