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Sambhal की जिस मस्जिद में हुआ था बवाल, वहां तिरंगे के साथ लगे हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे !

यूपी के संभल (Sambhal) में शुक्रवार को जामा मस्जिद पर देशभक्ति का नजारा देखने को मिला. यहां जुमे की नमाज के बाद नमाजियों ने हाथों में तिरंगा लेकर हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए और राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया. इस दौरान मस्जिद परिसर राष्ट्रीय एकता और सौहार्द के रंग में रंग गया. बता दें कि यहां दो महीने पहले 24 नवंबर को जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा हो गई थी, जिसके बाद तनाव का माहौल बना रहा.

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24 नवंबर 2024 का दिन था, देश की नहीं दुनिया भी संभल के नाम से परिचित हो चुकी थी, क्योंकि एक छोटे से सर्वे को रोकने के लिए हजारों की भीड़ संभल की जामा मस्जिद पर जुट गई थी। ये वहीं संभल था जहां भगवान कल्कि का अवतार होना है, ये वहीं संभल था जो पृथ्वीराज चौहान की राजधानी हुआ करती थी, इसी संभल की जामा मस्जिद के बारे में कहा गया की बाबर के सिपहसालार मीर बेग ने हरिहर मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाने का काम किया, मामला कोर्ट पहुंचा, कोर्ट ने सर्वे के आदेश दिए, लेकिन जब सर्वे की टीम सर्वे करने पहुंची तो बवाल हो गया, चार दंगाई मारे गए, एसपी, डीएम, सीओ, समेत दो दर्जन से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए। कई आरोपी गिरफ्तार भी इस मामले में कर लिए गए है। लेकिन अब उसी संभल से जहां बवाल हुआ था, एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने देश का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। दरअसल जामा मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद जब लोग मस्जिद से निकले तो उनके हाथों में तिरंगा था, हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लग रहे थे।


26 जनवरी से पहले संभल से जिस तरीके का देशप्रेम, एकता, सौहार्द का नजारा देखने को मिला है उसके बारे में लोग बात कर रहे है कि जिस संभल का इतिहास रक्तरंजित रहा है, आजादी से पहले और बाद में जहां दर्जनों दंगे हो चुके है, वहां ऐसा बदलाव आखिर कैसे आया है। हालांकि जो तिरंगा लेकर संभल में प्यार दिखाया गया, वो पहली बार था, ऐसा इससे पहले नहीं हुआ था, नमाजी हाथों में तिरंगा लहराकर देशभक्ति के रंग में रंगे नजर आए और हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए। कुछ रिपोर्ट के मुताबिक  तिरंगा बांटने वाले मुस्लिमों ने कहा कि हमें अपने देश के तिरंगे पर नाज है। गणतंत्र दिवस से पहले देशभक्ति का संदेश देने के लिए आज हम लोगों ने जामा मस्जिद के बाहर तिरंगा बांटा है और लोगों से अपील की है कि वे सभी लोग अपने-अपने घर और दुकानों के बाहर तिरंगा लगाकर देशभक्ति का संदेश दे रहे है। लेकिन जब दंगे के बाद मै खुद संभल गया था तो वहां लोगों के घरों पर हरे रंग के झंडे लगे थे, तमाम घरों पर लगे थे, किसी एक भी घर पर तिरंगा नहीं था।

लेकिन संभल में पिछले दिनों में बदलाव तो जरुर आया है, आया क्यों है इस बात को तो बेहतर तरीके से वहीं लोग बता सकते है, जिन लोगों में ये बदलाव आया है।लेकिन सवाल ये है कि क्या आज जो लोग तिरंग लहरा रहे है उन्हें ये समझ आने लगा है कि देश वाकई में संविधान और कानून से चलेगा। तभी आज तिरंगे की बात हो रही है।क्या ये लोग समझ गए है कि जो लोग इनकी रहनुमाई किया करते थे, जिन नेताओं की छत्रछाया में ये पल रहे थे, उसी कुछ भी करने की खुली छुट मिली थी, वो अब नहीं मिलेगी।
 
मैंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि 1978 में सैकड़ों लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था, तो किसने उन्हें मारा था, कानून के रखवालों को नहीं पता, इस देश के कानून और रखवाले किसी को सजा तक नहीं दिलवा पाए थे। लेकिन हैरानी की बात नहीं है। क्योंकि संभल इकलौता नहीं और इस देश में। लेकिन अब जो कानून और कानून के रखवाले है वो वाकई में कानून के हिसाब से काम कर रहे है। वो अवैध अतिक्रमण पर बुलडोजर चलना हो, बिजली चोरी करने वालों के घर करोड़ों का नोटिस भेजना हो या फिर जिन ऐतिहासिक जगहों पर से कब्जा हटवाना हो। वक्फ के नाम पर जमीनों को हड़पने वालों को भी आइना दिखा दिया है। और मस्जिद के सामने ही पुलिस चौंकी का बन जाना भी एक बड़ा कारण हो सकता है। खैर कारण जो भी है। नतीजा ये है कि संभल बदल रहा है।और सही दिशा में चल रहा है।अब हिंदू आराम से अपने घर से निकल सकता है।और इन सबका श्रेय जाता है संभल के मौजूदा प्रशासन को, क्योंकि संभल के डीएम राजेंद्र पेंसिया संभल में हाईटैक स्कूल भी तैयार करवा रहे है, जहां बच्चे मदरसे में पढने के लिए बाद में जाते है और स्कूल में पहले आते है। क्योंकि किसी भी इंसान के चरित्र निर्माण के लिए शिक्षा ही तो जरुरी है। जाते जाते सुनिए इन बच्चों के परिवार वाले लोगों का क्या कहना है।
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