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दिल्ली में हेड कांस्टेबल की सनक...'बिहारी' कहने पर गोली मारकर छीना घर का चिराग
Delhi Case: पांडव अपनी जिंदगी को साधारण और सादगी से जी रहे थे, लेकिन उनकी क्षेत्रीय पहचान ने उनकी जान ले ली. यह घटना एक दर्दनाक उदाहरण है, जो दिखती है कि किस तरह कुछ गलत सोच और नफरत भरे विचार एक बेगुनाह व्यक्ति की जान ले सकते है.
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Delhi Crime: पांडव, जो कि दिल्ली के बिंदापुर की प्रजापति कॉलोनी में अपने परिवार का इकलौता सहारा थे, अपनी जिंदगी को साधारण और सादगी से जी रहे थे, लेकिन उनकी क्षेत्रीय पहचान ने उनकी जान ले ली. यह घटना एक दर्दनाक उदाहरण है, जो दिखती है कि किस तरह कुछ गलत सोच और नफरत भरे विचार एक बेगुनाह व्यक्ति की जान ले सकते है....
पांडव की अंतिम यात्रा और न्याय की मांग
रविवार को पांडव का अंतिम संस्कार हुआ, और उनके परिवार और आसपास के लोग इस घटना पर न्याय की मांग कर रहे हैं. पांडव के घर के आसपास जगह-जगह पोस्टर लगाए गए हैं जिन पर लिखा है, "हमें न्याय चाहिए, क्या बिहारी होना गुनाह है?" और "रक्षक बना भक्षक.." यह पोस्टर उनके परिवार के ग़म और आक्रोश को व्यक्त करते हैं.
पांडव के परिवार का कहना है कि उन्हें सिर्फ इसलिए मार दिया गया क्योंकि उन्होंने यह बताया कि वह बिहार के रहने वाले हैं. इस घटना ने समाज में क्षेत्रीय भेदभाव और नफरत की गहरी समस्या को उजागर किया है..
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घटना उस समय की है जब पांडव अपने दोस्त कृष्ण और चचेरे भाई दीपक के साथ मोटरसाइकिल पर घर लौट रहे थे. पांडव सबसे आगे थे और उनके साथ उनका दोस्त और भाई थे. अचानक, हेड कांस्टेबल नीरज ने उन्हें रोका और पूछताछ करने लगा. जब पांडव ने कहा कि वह बिहार का रहने वाला है, तो नीरज का व्यवहार अचानक हिंसक हो गया. दीपक बताते हैं कि जैसे ही पांडव ने अपने राज्य का नाम लिया, नीरज का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया. उसने गालियाँ दीं और फिर नफरत से भरे शब्दों के साथ पांडव पर गोली चला दी। गोली पांडव के सीने में लगी, जिससे वह तुरंत लहूलुहान हो गए. दीपक के अनुसार, नीरज के चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था. इसके बाद, उसने धमकी दी कि अगर पांडव को अस्पताल नहीं ले जाया गया तो वह मर जाएगा, और यह सब किसी के लिए भी कोई फर्क नहीं डालने वाला था.
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पुलिस और न्याय
घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नीरज को गिरफ्तार कर लिया. उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां कोर्ट के आदेश पर उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। हालांकि, इस हत्या से जुड़े सभी सवालों का जवाब अब भी बाकी हैं, और पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद है.
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पीड़ित परिवार का दुख
पांडव की मां का दिल टूट चुका है, क्योंकि वह अपने बेटे के नाम की पुकार के साथ रो रही हैं., पांडव का परिवार, जिसमें तीन भाई-बहन और माता-पिता शामिल थे, अब पूरी तरह से टूट चुका है. पांडव ही इस परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था, और उसकी मौत के बाद परिवार की रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. परिवार की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि अब उन्हें दो वक्त की रोटी का संकट महसूस हो रहा है.
राजनीतिक मदद
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मंगलवार को बिहार के सांसद पप्पू यादव और खगड़िया के सांसद राजेश वर्मा पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे. पप्पू यादव ने इस घटना को दुखद बताया और यह कहा कि "हमारे खगड़िया के बेटे को दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल ने सिर्फ इसलिए गोली मारी क्योंकि उसने गर्व से कहा था कि वह बिहारी है." इस मौके पर उन्होंने पीड़ित परिवार को 50,000 रुपये की आर्थिक मदद भी दी ..प्रजापति कॉलोनी में माहौल अभी भी ग़मगीन है. पांडव की मौत ने न केवल उनके परिवार को गहरे आघात पहुँचाया है, बल्कि यह समाज में क्षेत्रीय भेदभाव की गंभीर समस्या को भी उजागर किया है...