Gen-Z पर सरकार का फुल फोकस... कैबिनेट मंत्रियों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट में PM मोदी नंबर-1, जानें क्या है डिजिटल रणनीति
दिल्ली में छात्र आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने युवाओं तक डिजिटल पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया है. कैबिनेट बैठक में पेश सोशल मीडिया रिपोर्ट में पीएम मोदी पहले स्थान पर रहे. रिपोर्ट में प्रमुख नेताओं के सोशल मीडिया एंगेजमेंट का भी आकलन किया गया.
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देश की राजधानी दिल्ली में बीते महीने छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार अब युवाओं के बीच अपनी डिजिटल मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. इसी कड़ी में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में मोडिस सरकार में शामिल मंत्रियों की सोशल मीडिया परफॉर्मेंस से जुड़ी रिपोर्ट पेश की गई. इस रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे आगे रहे.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की ओर से तैयार किए गए इस रिपोर्ट कार्ड में केवल कैबिनेट मंत्रियों की आपसी तुलना नहीं की गई, बल्कि देश के प्रमुख राजनीतिक चेहरों और जमीनी स्तर के नेताओं की सोशल मीडिया गतिविधियों का भी आकलन किया गया. यानी अब नेताओं की डिजिटल लोकप्रियता भी उनकी सार्वजनिक पहुंच का अहम हिस्सा बनती जा रही है. इससे ये तो साफ़ है कि आने वाले दिनों में अब राजनीतिक गतिविधियां पूरी तरह से Gen-Z को ध्यान में रखकर की जाएगी.
कैसे तैयार हुई रैंकिंग?
मंत्रियों की सोशल मीडिया परफॉर्मेंस का यह विश्लेषण मई से 15 अगस्त 2026 तक की गतिविधियों के आधार पर किया गया. करीब साढ़े तीन महीने के इस एनालिसिस में इंस्टाग्राम, एक्स और फेसबुक पर मंत्रियों की सक्रियता को देखा गया. रैंकिंग तय करते समय रोजाना की पोस्ट, कुल एंगेजमेंट, एक पोस्ट पर औसत एंगेजमेंट, कुल लाइक्स, औसत लाइक्स और तीनों प्लेटफॉर्म्स पर फॉलोअर्स की संख्या जैसे आंकड़ों को आधार बनाया गया. इससे साफ है कि सरकार अब सोशल मीडिया को केवल सूचना साझा करने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता से सीधे जुड़ने के एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म के तौर पर देख रही है.
Gen-Z पर खास फोकस
जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शनों के बाद युवाओं और खासकर Gen-Z तक पहुंच बनाने पर सरकार का फोकस बढ़ा है. डिजिटल कम्युनिकेशन में भी इसका असर दिखाई दे रहा है. पारंपरिक और लंबे राजनीतिक बयानों की जगह अब शॉर्ट रील्स, कैजुअल अंदाज और क्रिएटर फॉर्मेट वाले वीडियो पर जोर दिया जा रहा है. मंत्रियों और सरकारी विभागों को लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ज्यादा सक्रिय रहने और युवाओं की पसंद के मुताबिक कंटेंट तैयार करने की दिशा में भी काम करने को कहा गया है. इसी क्रम में विदेश मंत्रालय ने 7 अगस्त को स्नैपचैट पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने का ऐलान किया था.
क्या वोट में बदलेगा सोशल मीडिया?
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बताते चलें कि सरकार के इस रूख को लेकर राजनीतिक जानकारों मानना है कि इंस्टाग्राम और दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर सहज और बातचीत वाले कंटेंट को युवाओं के बीच ज्यादा आसानी से जगह मिलती है. ऐसे में सरकार की नई डिजिटल रणनीति उसे युवाओं तक पहुंच बनाने में मदद कर सकती है. हालांकि, सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स, व्यूज और एंगेजमेंट सीधे वोट में बदलेंगे, इसकी कोई गारंटी नहीं है. आखिरकार चुनावी राजनीति में डिजिटल लोकप्रियता के साथ जमीन पर लोगों का भरोसा भी उतना ही मायने रखता है. लेकिन अंतिम में यह तो कहा ही जा सकता है कि Gen-Z आंदोलन ने राजनीति के तरीक़े में बदलाव लाने की शुरुआत कर दी है.