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क्या ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान के मीडिएटर बनने पर भारत ने जताई थी चिंता? मार्को रुबियो ने दो टूक जवाब

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पाकिस्तान की मध्यस्थता पर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भारत की पाकिस्तान को लेकर चिंताएं अलग हैं और ईरान मुद्दे पर भारत ने कोई आपत्ति नहीं जताई.

क्या ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान के मीडिएटर बनने पर भारत ने जताई थी चिंता? मार्को रुबियो ने दो टूक जवाब
Image Source: X / @DrSJaishankar
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अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव कब खत्म होगा, इसे लेकर अभी भी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं. दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य होते नहीं दिख रहे. इसी बीच पाकिस्तान ने खुद को इस पूरे विवाद में मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश की है. अब इस मुद्दे पर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बड़ा बयान सामने आया है, जिसने भारत और पाकिस्तान को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है.

दरअसल, एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से सवाल किया गया कि क्या भारत ने अमेरिका और ईरान विवाद में पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर कोई चिंता जताई है. इस सवाल के जवाब में रुबियो ने खुलकर अपनी बात रखी और कहा कि भारत की पाकिस्तान को लेकर चिंताएं अलग हैं.

भारत की चिंता पर क्या बोले रुबियो?

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मार्को रुबियो ने कहा कि भारत हमेशा इस बात को लेकर चिंतित रहता है कि पाकिस्तान की जमीन से ऐसे हथियारबंद आतंकी संगठन सक्रिय हैं, जो भारत को निशाना बनाते हैं. उन्होंने कहा कि भारत की यह चिंता लंबे समय से रही है और वह इसे लगातार उठाता रहा है. हालांकि रुबियो ने साफ किया कि ईरान के मामले में पाकिस्तान की संभावित मध्यस्थता को लेकर भारत की तरफ से कोई विशेष आपत्ति बातचीत में सामने नहीं आई. उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि भारत को इससे कोई दिक्कत होगी. भारत और पाकिस्तान के बीच जो मुद्दे हैं, वे अलग प्रकृति के हैं.' रुबियो के इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या पाकिस्तान वास्तव में अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते में भूमिका निभा पाएगा या नहीं.

ईरान के साथ समझौते की उम्मीद अभी बाकी

अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि ईरान के साथ समझौते की संभावना अभी खत्म नहीं हुई है. उनके मुताबिक अमेरिका की तरफ से एक काफी मजबूत प्रस्ताव बातचीत की मेज पर रखा गया है. रुबियो ने बताया कि इस प्रस्ताव में ईरान की तरफ से होर्मुज स्ट्रेट को खोलने और परमाणु मुद्दों पर गंभीर, समयबद्ध और वास्तविक बातचीत में शामिल होने की बात कही गई है. गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक माना जाता है और यहां तनाव बढ़ने से पूरी दुनिया के तेल बाजार पर असर पड़ता है. उन्होंने यह भी साफ कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी जल्दबाजी में कोई समझौता नहीं करेंगे. रुबियो के मुताबिक, 'राष्ट्रपति कोई खराब समझौता नहीं करेंगे. पहले कूटनीति को पूरा मौका दिया जाएगा, उसके बाद ही अन्य विकल्पों पर विचार होगा.'

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आखिर समझौते में देरी क्यों हो रही है?

जब रुबियो से पूछा गया कि बातचीत आगे बढ़ने में इतनी देरी क्यों हो रही है, तो उन्होंने कहा कि अब सब कुछ ईरान की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है. उनके मुताबिक ईरानी व्यवस्था को जवाब देने में अधिक समय लगता है. उन्होंने दोहराया कि अमेरिका केवल ऐसा समझौता चाहता है जो मजबूत और टिकाऊ हो. अगर सही समझौता नहीं होता, तो फिर दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है. हालांकि फिलहाल अमेरिका की प्राथमिकता बातचीत और कूटनीति ही बनी हुई है.

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बताते चलें कि भारत दौरे के दौरान मार्को रुबियो अपनी पत्नी के साथ आगरा भी पहुंचे. उन्होंने ताजमहल का दीदार किया और वहां करीब एक घंटे तक समय बिताया. भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रुबियो ने ताजमहल परिसर में तस्वीरें भी खिंचवाईं. सुरक्षा कारणों की वजह से कुछ समय के लिए ताजमहल परिसर खाली कराया गया था. रुबियो का यह दौरा ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका-ईरान तनाव और दक्षिण एशिया की राजनीति दोनों ही अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं.

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