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CBSE ऑन-स्क्रीन मार्किंग विवाद: सरकार का बड़ा एक्शन, बोर्ड के चेयरमैन और सचिव पर गिरी गाज, जांच के लिए कमेटी गठित
OSM सिस्टम विवाद के बीच CBSE के चेयरमैन और सचिव का तबादला कर दिया गया. इसी के साथ टेंडर मामले की जांच के लिए कमेटी भी गठित की गई है.
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CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा एक्शन ले लिया है. सरकार ने CBSE के चेयरमैन और सचिव का तबादला कर दिया है. इसके अलावा ओएसएम सेवाओं की खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक विशेष जांच समिति भी गठित की गई है.
यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों की ओर से मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे. इससे पहले संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी स्थायी समिति ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली और कक्षा 9 और 10 में तीन-भाषा सूत्र के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की थी.
PM मोदी खुद देख रहे हैं मामला
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इस बैठक के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का ट्रांसफर कर दिया. इस बैठक में OSM प्रणाली में गड़बड़ी का खुलासा करने वाले 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत भी शामिल हुए थे. ऐसा पहली बार हुआ कि किसी मामले में कोई स्टूडेंट अपनी बात रखने के लिए पहुंचा. बताया जा रहा है OSM में गड़बड़ी के मामले पर PM मोदी की पूरी नजर है. संसद भवन एनेक्सी में हुई इस बैठक में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों की ओर से उठाई गई शिकायतों और चिंताओं पर विस्तार से चर्चा की गई.
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बैठक में क्या-क्या हुआ?
बैठक का सबसे अहम मुद्दा कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में अपनाई गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली रही. इस व्यवस्था के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल रूप में परीक्षकों को उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे कंप्यूटर स्क्रीन पर उत्तरों का मूल्यांकन करते हैं. CBSE का दावा है कि इस प्रणाली से मूल्यांकन प्रक्रिया ज्यादा तेज, पारदर्शी और मानकीकृत होती है.
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इसके लागू होने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने मूल्यांकन से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराईं. कई छात्रों का आरोप है कि उनके प्राप्तांक उत्तर पुस्तिका में लिखे गए उत्तरों के अनुरूप नहीं हैं. कुछ छात्रों ने यह भी दावा किया कि जिस उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन दिखाया गया, वह उनकी उत्तर पुस्तिका ही नहीं थी. इसी कारण प्रभावित छात्रों को संसदीय समिति के सामने अपनी बात रखने का अवसर दिया गया.
कैसे सामने आई OSM की गड़बड़ी?
दरअसल, छात्रों और अभिभावकों को पुनर्मूल्यांकन और उत्तर पुस्तिका सत्यापन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी मिली थी. शिकायतों में उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग की गुणवत्ता, डिजिटल मूल्यांकन के दौरान संभावित तकनीकी त्रुटियां, अंक अपलोडिंग में गड़बड़ी की आशंकाएं और परिणाम सत्यापन प्रक्रिया की जटिलता प्रमुख रूप से शामिल रहीं.
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कक्षा 12 के छात्रों ने पहले कॉपी जांचने में गड़बड़ी और फिर स्कैन कॉपी बदल जाने जैसी शिकायतें की. कई छात्रों का दावा था कि उन्हें धुंधले पेज, गायब सेक्शन और बोर्ड की ऑनलाइन सेवाओं के इस्तेमाल में समस्याओं का सामना करना पड़ा. इसके बाद OSM प्लेटफॉर्म और उस टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल उठे.
री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर अटैक
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CBSE की टेंशन यहीं खत्म नहीं होती. री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर अटैक की शिकायत की गई है. CBSE के अनुसार, 2 मिनट में 15 लाख एक्सेस अटेंप्ट हुए, जबकि 1 लाख से ज्यादा बार सिस्टम की फाइलों तक बिना अनुमति पहुंचने की कोशिश की गई.