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पाक फाइटर जेट तैनाती के बीच अचानक सऊदी अरब पहुंचे अजीत डोभाल, जानें भारत की रणनीति
एनएसए अजीत डोभाल ने सऊदी अरब का दौरा कर शीर्ष नेताओं से मुलाकात की और द्विपक्षीय सहयोग व क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा की. यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब सऊदी में पाकिस्तान ने अपने फाइटर जेट और सैनिक तैनात कर रखे हैं.
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Ajit Doval Visit Saud Arab: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने हाल ही में अचानक सऊदी अरब का दौरा किया, जहां उन्होंने वहां के वरिष्ठ नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं. इस दौरान दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की स्थिति की समीक्षा की गई और क्षेत्र में तेजी से बदलते हालात पर विस्तार से चर्चा हुई. रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने इस दौरे की पुष्टि की है. गौर करने वाली बात यह है कि यह यात्रा ऐसे वक्त पर हुई है, जब सऊदी अरब में पाकिस्तान पहले ही अपने फाइटर जेट और सैनिक तैनात कर चुका है.
रणनीतिक साझेदारी पर जोर
एनएसए डोभाल का यह दौरा बदलते भूराजनीतिक हालात के बीच भारत और सऊदी अरब के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को दिखाता है. रियाद में भारतीय दूतावास ने एक बयान में बताया कि बातचीत में कई मुद्दों पर बात हुई, जिसमें आपसी सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं और आपसी फायदे के मामले शामिल थे. एनएसए डोभाल ने सऊदी अरब के बड़े नेताओं से मुलाकात की, जिनमें ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान, विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मूसाद अल-ऐबान शामिल थे.
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भारतीय दूतावास का बयान
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रियाद में भारतीय दूतावास ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस दौरे से संबंधित जानकारी साझा करते हुए लिखा, 'एनएसए अजीत डोभाल 19 अप्रैल को रियाद के आधिकारिक दौरे पर आए थे. एयरपोर्ट पर उनका स्वागत राजदूत डॉ. सुहेल खान और राजनीतिक मामलों के मंत्री एम्बेसडर डॉ. सऊद अल-सती ने किया. बाद में, उन्होंने ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान, विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. मुसैद अल-ऐबान के साथ मीटिंग की. बैठकों के दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंध, क्षेत्रीय स्थिति और आपसी इंटरेस्ट के दूसरे मुद्दों पर चर्चा की.'
वैश्विक स्तर पर सक्रिय कूटनीति
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यह दौरा वैश्विक सुरक्षा मामलों पर भारत की एक्टिव डिप्लोमैटिक बातचीत के बीच हो रहा है. कुछ दिन पहले, 17 अप्रैल को, डोभाल ने यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और डिफेंस काउंसिल के सचिव रुस्तम उमरोव के साथ लंबी बातचीत की थी. इस मीटिंग में पूर्वी यूरोप में चल रहे संघर्ष के दौरान नई दिल्ली और कीव के बीच जारी रणनीतिक बातचीत पर जोर दिया गया.
विदेश मंत्रालय का रुख
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, यूक्रेन के साथ बातचीत में दोनों देशों के रिश्ते और रूस-यूक्रेन विवाद पर फोकस रहा. भारत ने बातचीत और डिप्लोमेसी के ज़रिए शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करते हुए अपनी लगातार बात दोहराई. ये सारी बातचीत भारत के प्रोएक्टिव डिप्लोमैटिक नजरिए को दिखाती हैं, जो क्षेत्रीय और ग्लोबल सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और खास अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने में मदद करता है.
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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अहम दौरा
यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब खाड़ी क्षेत्र में हालात फिर से तनावपूर्ण होते दिखाई दे रहे हैं. ईरान को लेकर चल रहा टकराव एक बार फिर तेज होने के संकेत दे रहा है. हाल ही में अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक ईरानी मालवाहक जहाज को रोक दिया, जो उस रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहा था. इस कार्रवाई पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'समुद्री डकैती' बताया और जवाब देने की चेतावनी भी दी है. ऐसे माहौल में क्षेत्र में फिर से संघर्ष बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, खासकर तब जब मौजूदा युद्धविराम जल्द ही खत्म होने वाला है.
सऊदी अरब में पाकिस्तानी फाइटर जेट की तैनाती
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सऊदी अरब में पाकिस्तान द्वारा फाइटर जेट की तैनाती ने खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को और नाजुक बना दिया है. इस कदम के बाद चर्चाएं तेज हो गई हैं कि यदि क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ता है और ईरान सऊदी ठिकानों पर हमला करता है, तो क्या पाकिस्तान खुलकर सऊदी अरब के साथ खड़ा होगा. पिछले वर्ष हुए रक्षा समझौते के तहत दोनों देशों ने यह स्पष्ट किया था कि किसी एक पर हमला, दोनों के खिलाफ माना जाएगा. ऐसे में आने वाले समय में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं.
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बताते चलें कि यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदल रहे हैं और हर कदम रणनीतिक मायने रखता है. भारत की सक्रिय कूटनीति और सऊदी अरब के साथ बढ़ते रिश्ते आने वाले समय में क्षेत्रीय संतुलन पर अहम असर डाल सकते हैं.