जल्द भारत पहुंचेंगे होर्मुज में फंसे 13 जहाज, मोदी सरकार ने एक्टिव किया सीक्रेट प्लान
ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है. दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है. सीजफायर के बावजूद जहाजों की आवाजाही प्रभावित है.
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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष का असर अब वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है. इस तनाव का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जिसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है. यही वजह है कि भारत भी इस क्षेत्र में फंसे अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए लगातार सक्रिय प्रयास करते हुए सीक्रेट प्लानिंग पर जोर दे रहा है.
होर्मुज क्षेत्र में मौजूद हैं 13 भारतीय जहाज
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक इस क्षेत्र में फिलहाल 13 भारतीय जहाज मौजूद हैं. इनमें एक एलपीजी टैंकर, पांच कच्चे तेल के टैंकर, एक केमिकल टैंकर, तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क कैरियर और एक ड्रेजर शामिल हैं. इन जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा भारत सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है.
क्या है भारत सरकार की विशेष रणनीति?
सरकार की ओर से इन जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष रणनीति अपनाई जा रही है. हालांकि अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस पूरी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है. शिपिंग निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने संकेत दिया कि पूरे अभियान का समन्वय विदेश मंत्रालय के माध्यम से किया जा रहा है. वहीं, किस जहाज को पहले सुरक्षित बाहर निकालना है, इसका फैसला पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और उर्वरक मंत्रालय के साथ मिलकर किया जा रहा है. जानकारों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत बेहद संतुलित और सतर्क तरीके से काम कर रहा है. समुद्री मार्गों की सुरक्षा केवल व्यापार का मामला नहीं है, बल्कि देश की ऊर्जा जरूरतों से भी सीधे जुड़ी हुई है. यदि तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका असर ईंधन कीमतों से लेकर उद्योगों तक पर पड़ सकता है.
क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
दरअसल, ओमान और ईरान के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वह समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति गुजरती है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ता है. 9 अप्रैल को संघर्ष विराम लागू होने के बाद भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके हैं और जहाजों की आवाजाही अभी भी प्रभावित बनी हुई है.
कई जहाज सुरक्षित निकले
इस बीच भारत के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे हैं. ताजा जानकारी के अनुसार करीब 2.70 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आने वाला क्रूड ऑयल टैंकर 'निसोस केरोस' सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर चुका है. यह जहाज 3 जून 2026 तक विशाखापत्तनम पहुंच सकता है. इसके अलावा विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि 14 जहाज सुरक्षित रूप से इस संवेदनशील समुद्री क्षेत्र को पार करके भारत पहुंच चुके हैं. हालांकि अभी भी 11 जहाज फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं.
शिप ट्रैकिंग डेटा पर सरकार का जवाब
एक और महत्वपूर्ण मुद्दा सार्वजनिक शिप ट्रैकिंग डेटा को लेकर उठा है. अधिकारियों का कहना है कि जहाजों की लोकेशन दिखाने वाले कमर्शियल ऐप्स आम लोगों के लिए उपलब्ध हैं. ऐसे डेटा का उपयोग किस उद्देश्य से किया जाता है, यह पूरी तरह उपयोगकर्ता की मंशा पर निर्भर करता है. फिलहाल यह जानकारी सरकार और संबंधित एजेंसियों को जहाजों की निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद कर रही है.
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बहरहाल, होर्मुज संकट ने दुनिया को यह एहसास करा दिया है कि समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति कितनी संवेदनशील है. चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद भारत अपने समुद्री व्यापार को जारी रखते हुए जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है. आने वाले दिनों में इस क्षेत्र की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी.